राधाष्टमी व्रत के बिना, कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत माना जाता है अधूरा, जन्माष्टमी के 15 दिन बाद रखते हैं उपवास, द्वापर युग से चली आ रही परंपरा, जानें

राधाष्टमी व्रत के बिना, कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत माना जाता है अधूरा, जन्माष्टमी के 15 दिन बाद रखते हैं उपवास, द्वापर युग से चली आ रही परंपरा, जानें


Last Updated:

Radha Ashtami Fast: आज भी द्वापर युग से चली आ रही उस जन्मोत्सव की परंपरा को बड़े ही उत्साह के साथ बृजवासी मानते हैं. ठाकुर जी के जन्मोत्सव पर जो लोग व्रत रखते हैं, उनको एक व्रत और रखना जरूरी होता है. वह कौन सा व्रत है और जन्माष्टमी का व्रत उस उपवास के बिना अधूरा माना जाता है. पंडित गौरांग शर्मा ने लोकल 18 से बताया कि  जन्माष्टमी के 15 दिन बाद राधाष्ठमी का व्रत रखना क्यों जरूरी है

ख़बरें फटाफट

मथुरा: उत्तर प्रदेश का मथुरा भगवान श्री कृष्ण की लीला स्थली है. अपनी आराध्य के दर्शन के लिए हर दिन श्रद्धालु पहुंचते हैं. भगवान श्री कृष्ण की जन्म से जुड़ी हुई मान्यताएं और स्थल आज भी मौजूद हैं, तो वहीं राधा रानी भी उनकी अलदाहिनी के रूप में यहां विराजमान हैं. मान्यता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद राधाष्टमी का पर्व मनाया जाता है. यह पर्व क्यों मनाया जाता है.

भारत सनातन से जुड़ा हुआ है. यहां हर दिन नये चमत्कार होते हैं. योगीराज श्री कृष्ण की नगरी मथुरा भी विश्व में अपना अलग ही वर्चस्व रखती है. देश ही नहीं बल्कि विदेशों से श्रद्धालु श्री कृष्ण की लीलाओं के दर्शन करने के लिए यहां आते हैं. ठाकुर जी का जन्म मथुरा की कंस कारागार में हुआ.

राधाष्टमी व्रत के बिना माना जाता है कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत अधूरा

आज भी द्वापर युग से चली आ रही उस जन्मोत्सव की परंपरा को बड़े ही उत्साह के साथ बृजवासी मानते हैं. ठाकुर जी के जन्मोत्सव पर जो लोग व्रत रखते हैं, उनको एक व्रत और रखना जरूरी होता है. वह कौन सा व्रत है और जन्माष्टमी का व्रत उस उपवास के बिना अधूरा माना जाता है. पंडित गौरांग शर्मा ने लोकल 18 से बताया कि  जन्माष्टमी के 15 दिन बाद राधाष्ठमी का व्रत रखना क्यों जरूरी है. गौरांग शर्मा ने बताया कि हिंदू धर्म ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार, राधा अष्टमी का श्री कृष्ण जन्म (जन्माष्टमी) से बहुत गहरा और अटूट संबंध है. इन दोनों त्यौहारों और दोनों दिव्य स्वरूपों के बीच के संबंध को निम्नलिखित प्रमुख मान्यताओं से समझा जा सकता है. राधा रानी के 15 दिन बाद अवतरण (तिथि का अनोखा मेल) श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में हुआ था.

इसके ठीक 15 दिन बाद भाद्रपद मास के ही शुक्ल पक्ष की अष्टमी को दोपहर के समय श्री राधा रानी का प्राकट्य हुआ. दोनों का जन्म ‘अष्टमी’ तिथि को ही हुआ, बस दोनों के पक्ष (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष) अलग थे. उन्होंने बताया कि राधाष्टमी का व्रत जो व्यक्ति नहीं रखता है, उसका कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत अधूरा माना जाता है. कहा यह भी जाता है कि एक राधाष्टमी का व्रत कई लाख कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत रखने के बराबर होता है.



Source link