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What Is Benzidine Test : उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 45 साल लालाराम की हत्या और शव को घर के बाहर गली में फेंकने वाले में अलग मोड़ आ गया है. पुलिस क्राइम सीन की वैज्ञानिक ढंग से जांच कर रही है. सबूतों को इकट्ठा करने के लिए एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने ‘बैंजीडीन टेस्ट’ कराने का आदेश दिया है. आखिर क्या है ये टेस्ट जिससे इतने पुराने केस का राज खुलेगा? आखिर कैसे इस कत्ल के सारे राज खुलने लगे.
क्या होता बैंजीडीन टेस्ट? (सांकेतिक)
Crime News: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हत्या का खौफनाक और उलझा हुआ मामला सामने आया है. पुलिस और फोरेंसिक साइंस की टीम ने हत्यारों ने जुर्म छुपाने के लिए साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश को नाकाम कर दिया है. एसएसपी दिनेश कुमार सिंह के आदेश पर बैंजीडीन टेस्ट कराया जा रहा है. इस खास वैज्ञानिक परीक्षण ने पलभर में हत्या की सारी सच्चाई सामने लाकर रख दी. इस तकनीक ने साबित कर दिया कि अपराधी चाहे कितनी भी सफाई से खून के निशान क्यों न मिटा लें, विज्ञान की नजरों से बच पाना नामुमकिन है.
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ खुलासा?
घटना बुलंदशहर की है, जहां 45 वर्षीय लालाराम की किसी ने बेहद बेरहमी से हत्या कर दी. हत्यारों ने सनक की हदें पार करते हुए लालाराम की एक टांग भी काट दी थी और उनका शव घर के बाहर गली में लाकर फेंक दिया गया था. सुबह जब सनसनी फैली और पुलिस मौके पर पहुंची, तो परिजनों से पूछताछ शुरू हुई. लेकिन सबसे हैरानी की बात यह थी कि घर के लोग इस खौफनाक वारदात को लेकर पूरी तरह चुप्पी साध गए और पुलिस के किसी भी सवाल का कोई स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. परिवार का ऐसा संदिग्ध रवैया देखकर पुलिस का शक गहरा गया.
क्या होता है ये बैंजीडीन टेस्ट
बैंजीडीन टेस्ट फॉरेंसिक साइंस और क्राइम इन्वेस्टिगेशन में इस्तेमाल होने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण प्राथमिक (प्रीसुम्पटिव) परीक्षण है, जिसका मुख्य उपयोग किसी भी सतह पर खून के सूक्ष्म या छिपे हुए निशानों का पता लगाने के लिए किया जाता है. जब अपराधी किसी हत्या या आपराधिक वारदात को अंजाम देने के बाद साक्ष्यों को मिटाने के उद्देश्य से फर्श, दीवारों या कपड़ों को पानी से अच्छी तरह धोकर खून के धब्बे गायब कर देते हैं, जो आम आंखों से दिखाई नहीं देते, तब यह टेस्ट जांच टीम के लिए एक अचूक हथियार बनता है. इस परीक्षण के दौरान संदिग्ध सतह पर बैंजीडीन केमिकल और हाइड्रोजन पेरोक्साइड का घोल छिड़का जाता है, जिससे खून में मौजूद हीमोग्लोबिन के साथ यह केमिकल प्रतिक्रिया (Reaction) करता है और छिपे हुए या धोए गए ब्लड स्पॉट्स तुरंत नीले या गहरे रंग में चमक उठते हैं. इससे जांच एजेंसियों को यह पुख्ता सबूत मिल जाता है कि वारदात को असल में उसी स्थान पर अंजाम दिया गया था, जिससे किसी भी रहस्यमयी हत्या या मौत के अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने में बहुत बड़ी मदद मिलती है.
एसएसपी के निर्देश पर मैदान में उतरी फोरेंसिक टीम
मामले की गंभीरता को भांपते हुए एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया और इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करने के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद लेने का आदेश दिया. पुलिस को अंदेशा था कि हत्या भले ही बाहर गली में फेंकी गई डेडबॉडी से जुड़ी हो, लेकिन इस खूनी खेल को अंजाम घर के अंदर ही दिया गया है और साक्ष्यों को मिटाने के लिए फर्श को धोया गया है. इसके बाद मौके पर पहुंची फोरेंसिक टीम ने वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करते हुए घर के अंदर ‘बैंजीडीन टेस्ट’ किया.
फर्श और वाइपर पर चमक उठे खून के धब्बे
बुलंदशहर के इस मामले में भी जब फोरेंसिक विशेषज्ञों ने लालाराम के घर के फर्श पर वह केमिकल छिड़का, तो फर्श पर मौजूद खून के धब्बे साफ उभरकर सामने आ गए. इसके अलावा, घर में इस्तेमाल किए गए वाइपर (Wiper) पर भी खून के निशान मिल गए, जिससे यह पूरी तरह पुख्ता हो गया कि हत्या इसी घर के अंदर की गई थी और बाद में साफ़-सफाई कर सबूत मिटाने का असफल प्रयास किया गया था. फिलहाल, सुराग हाथ लगते ही पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है. पुलिस ने मृतक के कई नजदीकी और संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है. इस कत्ल की गुत्थी को पूरी तरह सुलझाने के बेहद करीब पहुंच चुकी है.