ममता को चुनाव आयोग का झटका, टीएमसी का घास फूल सिंबल और पार्टी नाम दोनों फ्रीज
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चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस में चल रहे अंदरूनी घमासान पर अंतरिम आदेश दिया है. आयोग ने पार्टी का नाम और ‘फूल और घास’ सिंबल दोनों को फ्रीज कर दिया है. ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों धड़ों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक नए नाम और फ्री सिंबल के तीन-तीन विकल्प देने को कहा गया है.
ममता बनर्जी को झटका, टीएमसी का सिंबल फ्रीज. (File Photo : PTI)
नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और उसके आधिकारिक चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी. आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में साफ किया कि ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों ही गुट आगामी उपचुनावों में मूल पार्टी के नाम और निशान का उपयोग नहीं कर सकेंगे. चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को 18 सितंबर 2026 की सुबह 11 बजे तक अपनी प्राथमिकता के आधार पर तीन नए नामों और तीन फ्री सिंबल्स के विकल्प पेश करने का निर्देश जारी किया है. चुनाव आयोग के सामने तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुट आमने-सामने आ खड़े हुए हैं. इसमें एक गुट की कमान पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हाथ में है. वहीं दूसरे गुट का नेतृत्व अरूप रॉय कर रहे हैं. दोनों ही खेमे खुद को असली और वैध तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं.
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव चिन्ह (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत विवाद के अंतिम और ठोस निपटारे के लिए विस्तृत समय की जरूरत है. वर्तमान में विधानसभा उपचुनावों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और समय बेहद कम है. ऐसे में आयोग ने निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह अंतरिम व्यवस्था लागू की है.
उपचुनावों के लिए आयोग ने क्या शर्तें तय की हैं?
- निर्वाचन आयोग के अंतरिम आदेश के मुताबिक दोनों में से कोई भी गुट अब अकेले ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा. दोनों पक्षों को चुनाव लड़ने के लिए अलग-अलग नाम चुनने की छूट दी गई है.
- वे चाहें तो अपने नए नाम के साथ मूल पार्टी का संदर्भ जोड़ सकते हैं. इसके अलावा दोनों गुटों को पार्टी के आरक्षित चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ के उपयोग से वंचित कर दिया गया है.
- आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपचुनाव लड़ने के लिए दोनों धड़ों को अधिसूचित फ्री सिंबल्स की लिस्ट में से ही कोई नया चुनाव चिह्न आवंटित किया जाएगा. इसके लिए दोनों पक्षों को 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद बतानी होगी.
तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह अंदरूनी विवाद कैसे शुरू हुआ?
पार्टी के भीतर बगावत का बिगुल उस वक्त फूंका गया जब रीतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग के सामने अपनी याचिका लगाई. उन्होंने दावा किया कि एआईटीसी की राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल 11 फरवरी 2025 को ही खत्म हो चुका था. इसके बाद उस कार्यसमिति के पास फैसले लेने का कोई कानूनी अधिकार नहीं बचा था. रीतब्रत बनर्जी ने आयोग को बताया कि 22 जून 2026 को पार्टी का एक विशेष अधिवेशन बुलाया गया था. इस अधिवेशन में अरूप रॉय को राष्ट्रीय कार्यसमिति का नया अध्यक्ष चुना गया.
ममता गुट ने इस दावे के जवाब में क्या दलीलें दीं?
आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद क्या फैसला सुनाया?