Baby Corn Kheti: एक ही खेत से डबल कमाई का जुगाड़, कतरनी के साथ ये फसल बोकर किसान पवन ने बदली किस्मत

Baby Corn Kheti: एक ही खेत से डबल कमाई का जुगाड़, कतरनी के साथ ये फसल बोकर किसान पवन ने बदली किस्मत


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एक ही खेत से डबल कमाई का जुगाड़, कतरनी के साथ ये फसल बोकर पवन ने बदली किस्मत

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Baby Corn Cultivation In Bhagalpur: भागलपुर में किसान अब कतरनी धान के साथ बेबी कॉर्न की खेती भी कर रहे हैं. पीरपैंती के पवन उपाध्याय ने इसकी शुरुआत की, जिससे किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा मिल रहा है. कृषि विभाग भी इसमें मदद कर रहा है, क्योंकि बेबी कॉर्न की बाजार में अच्छी मांग है और इसका कोई भी हिस्सा बेकार नहीं जाता.

भागलपुर: बिहार की मुख्य आजीविका कृषि है. अधिकांश लोग इसी पर निर्भर है. हालांकि बिहार में अब खेती का भी ट्रेंड बदलते जा रहा है. यहां के किसान अब नगदी फसल की खेती पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. भागलपुर के किसान भी अब बड़े पैमाने पर नगदी फसल की खेती करने लगे हैं. कतरनी धान और जर्दालु आम के लिए प्रसिद्ध भागलपुर में अब बेबी कॉर्न की भी खेती होने लगी है. बेबी कॉर्न की खेती से किसान को कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने का अवसर मिलता है. साथ ही बेबी कॉर्न की बाजार में भी जबरदस्त डिमांड है. यही वजह है कि भागलपुर में इसकी अब आकार ले रहा हे और कृषि विभाग भी किसानों को मदद मुहैया करा रहा है.

पीरपैंती में हो रही है इसकी खेती
बता दें कि भागलपुर में बेबी कॉर्न की खेती पीरपैंती में शुरू हुई हे. पीरपैंती के रहने वाले पवन उपाध्याय इसकी खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस इलाके में गन्ने की खेती अधिक होती है. बेबी कॉर्न की खेती के लिए कृषि विभाग के आत्मा ने प्रेरित किया. इसके बाद ही खेती की शुरूआत की. उन्होंने बताया कि अब इलाके के कई किसान बेबी कॉर्न की खेती करने लगे हैं. उन्होंने बताया कि विगत वर्ष 5 एकड़ में इसकी खेती हुई थी. अब इसका दायरा लगातार बढ़ते जा रहा है. आपको बता दें कि यह मात्र 3 माह में ही तैयार हो जाता है. इसमें अगर दो क्रॉप लगा दें तो, एक काटने के बाद दूसरा क्रॉप तैयार हो जाएगा. इससे आपको डबल मुनाफा कमाने का अवसर मिल जाता है. अभी के समय मे बेबीकॉर्न और मटर की खेती कर सकते हैं.

बेबी कॉर्न का कोई भी हिस्सा नहीं जाता वेस्ट
बता दें कि बेबी कॉर्न की खेती इसलिए किसानों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इसका कोई भी चीज वेस्ट नहीं जाता है और मंहगे दामों पर बिकता है. अगर यह छोटा है तो बड़े-बड़े होटलों में बिकता है. खास बात यह है कि इसका बलरी भी बिक जाता है और किसान को अच्छी कीमत मिल जाती है. इसके अलावा बेबी कॉर्न के पौधे को हरा चारा के तौर पर भी उपयोग में ला सकते हैं. वहीं इसके वेस्ट मेटेरियल का जलावन में भी उपयोग कर सकते हैं. वहीं कृषि विभाग ऐसा प्लान तैयार कर रहा कि बाहरी के बजाए भागलपुर में उपजाए जाने वाले बेबी कॉर्न की खपत होटलों में हो सके. इससे लोगों को भी ताजा बेबी कॉर्न खाने को मिल जाएगा.



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