Nand Baba Gaushala Jaipur: छोटे संकल्प से शुरू हुई गौशाला, आज 65 बेसहारा गोवंश का बनी सुरक्षित आसरा

Nand Baba Gaushala Jaipur: छोटे संकल्प से शुरू हुई गौशाला, आज 65 बेसहारा गोवंश का बनी सुरक्षित आसरा


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Nand Baba Gaushala Jaipur: जयपुर ग्रामीण के अमरपुरा में जनवरी 2025 में शुरू हुई नंद बाबा गौशाला आज 65 से अधिक बेसहारा गोवंश का सुरक्षित आश्रय बन चुकी है. महंत नंदा बाबा यादव की प्रेरणा और सोशल मीडिया के जरिए मिले सहयोग से यहां 5.20 लाख रुपये के विकास कार्य हुए हैं. गौसेवक कालूराम झाझड़िया और उनकी टीम दिन-रात सेवा में जुटी है. गौशाला में पर्यावरण और पक्षियों के संरक्षण का भी काम हो रहा है. सेवा भावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने जेडीए को स्थायी भूमि आवंटन के निर्देश दिए हैं.

जहां सेवा का भाव होता है, वहां सहयोग भी धीरे-धीरे जुड़ता चला जाता है. जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के ग्राम अमरपुरा की नंद बाबा गौशाला इसी भावना की मिसाल बनकर सामने आई है. जनवरी 2025 में छोटे से संकल्प के साथ शुरू हुई यह गौशाला आज 65 से अधिक बेसहारा गोवंश के लिए सुरक्षित आश्रय बन चुकी है. समाज के सहयोग और गौसेवकों की लगातार मेहनत से गौशाला का स्वरूप भी समय के साथ बेहतर होता जा रहा है.

जय गुरुदेव के अनुयायी एवं नंद बाबा आश्रम के महंत नंदा बाबा यादव की प्रेरणा से गोसेवक कालूराम झाझड़िया और उनकी टीम ने गांव की सरकारी भूमि पर गौशाला शुरू करने का बीड़ा उठाया. शुरुआत में संसाधनों की कमी थी और आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं थी. इसके बावजूद टीम ने सेवा का काम लगातार जारी रखा. धीरे-धीरे इस पहल से ग्रामीणों और अन्य लोगों का जुड़ाव बढ़ा और लोगों का विश्वास भी गौशाला के साथ मजबूत होता गया.

गौशाला को मजबूत बनाने में सोशल मीडिया की भी अहम भूमिका रही. गोसेवक कालूराम झाझड़िया ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक गोसेवा का संदेश पहुंचाया, जिसके बाद देश-प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से गौभक्त सहयोग के लिए आगे आने लगे. किसी ने चारे के लिए आर्थिक मदद दी, तो किसी ने निर्माण कार्य में योगदान किया. इस तरह लोगों की छोटी-छोटी मदद धीरे-धीरे एक बड़े सेवा अभियान में बदलती चली गई.

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वर्तमान में नंद बाबा गौशाला में गांव और आसपास के क्षेत्रों में खुले में घूमने वाले 65 से अधिक बेसहारा गोवंश को आश्रय मिला हुआ है. यहां गोवंश के लिए नियमित रूप से चारे और पानी की व्यवस्था की जाती है. बीमार या घायल पशुओं की पहचान कर उनका उपचार भी कराया जाता है. गौशाला की टीम का प्रयास रहता है कि कोई भी बेसहारा गोवंश सड़क पर असुरक्षित स्थिति में न रहे और उसे सुरक्षित आश्रय मिल सके.

समाज के सहयोग से गौशाला में अब तक करीब 5 लाख 20 हजार रुपये के विकास कार्य करवाए जा चुके हैं. गौशाला की सेवा भावना और सामाजिक सरोकारों को देखते हुए जिला कलक्टर ने भी इसे स्थायी भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की है. इसके लिए जेडीए के माध्यम से भूमि आवंटन करवाने के निर्देश दिए गए हैं. स्थायी भूमि मिलने से भविष्य में गौशाला को और बेहतर एवं व्यवस्थित रूप देने में मदद मिलेगी.

नंद बाबा गौशाला की खासियत केवल गोवंश की देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां पर्यावरण और पक्षियों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. गौशाला परिसर में हर माह पौधरोपण किया जाता है, वहीं गर्मी समेत अन्य मौसम में पक्षियों के लिए परिंडे भी लगाए जाते हैं. गौशाला से जुड़े लोग सेवा कार्यों को केवल पशुओं की देखभाल तक सीमित न रखकर प्रकृति और अन्य जीव-जंतुओं के प्रति जिम्मेदारी से भी जोड़ रहे हैं.

गोसेवक कालूराम झाझड़िया प्रतिदिन स्वयं गौशाला की साफ-सफाई और गोवंश की देखभाल में जुटे रहते हैं. वे गोवंश को चारा खिलाने, पानी पिलाने और बीमार पशुओं की देखरेख के साथ जरूरत पड़ने पर उन्हें उपचार के लिए चिकित्सालय तक पहुंचाते हैं. दिन हो या रात, कहीं से भी बेसहारा गोवंश की सूचना मिलने पर टीम उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का प्रयास करती है. यही निरंतर सेवा भावना गौशाला को समाज के भरोसे और सहयोग का केंद्र बना रही है.

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