Table Learning Tricks: मेंटल मैथ का ब्रह्मास्त्र हैं पहाड़े, क्या AI के दौर में भी 2*2=4 रटना जरूरी है?

Table Learning Tricks: मेंटल मैथ का ब्रह्मास्त्र हैं पहाड़े, क्या AI के दौर में भी 2*2=4 रटना जरूरी है?


नई दिल्ली (Table Learning Tricks). बचपन और शुरुआती पढ़ाई-लिखाई की बात छिड़ते ही पहाड़े याद करना जरूर जेहन में आता है. भारतीय स्कूलों में बच्चों को कम से कम 20 तक के पहाड़े जुबानी रटाए जाने की परंपरा है. 2 से लेकर 20 तक के पहाड़े याद करना किसी जंग जीतने जैसा लगता था. उस वक्त हर बच्चे के मन में यही सवाल उठता था कि आखिर रोज सुबह इन लंबे-चौड़े अंकों को रटने से हमारी जिंदगी में कौन सा तीर चल जाएगा. लेकिन दुनियादारी की समझ बढ़ते-बढ़ते इसकी असल कीमत समझ में आती है.

गणित अंकों का खेल है तो पहाड़े उस खेल की एबीसीडी हैं. पहाड़े रटने की प्रैक्टिस दिमागी कसरत का सबसे पहला और असरदार पाठ होता है. पहाड़े सिर्फ मैथ्स के सवाल हल करने का जरिया नहीं हैं. ये दिमाग का न्यूरल पाथवे मजबूत बनाते हैं. कई बच्चे बिना कैलकुलेटर के पलक झपकते ही बड़े-बड़े गुणा-भाग मन में ही हल कर लेते हैं. उसकी नींव पहाड़ों के दम पर टिकी होती है. समझिए भारतीय शिक्षा प्रणाली में पहाड़े रटने पर इतना जोर क्यों दिया जाता है, इसके क्या फायदे हैं और बाकी दुनिया में इस बारे में क्या सोच है.

पहाड़े रटना इतना मुश्किल क्यों लगता है?

बचपन में 2 से 20 तक के पहाड़े (Tables) याद करना किसी पहाड़ चढ़ने से कम नहीं लगता था. छोटे बच्चों का दिमाग अमूर्त यानी एब्स्ट्रैक्ट चीजों को उतनी आसानी से स्वीकार नहीं करता. पहाड़े सुनने में एक जैसे और बोरिंग लगते हैं. इनमें कोई कहानी या रोमांच नहीं होता. लगातार एक ही चीज को बार-बार दोहराना (Rote Learning) बच्चों को मानसिक थकान देता है. इसीलिए जब तक ये जुबान पर पूरी तरह चढ़ नहीं जाते, तब तक हर शनिवार या टेस्ट के दिन बच्चों के माथे पर पसीना आ जाता है.

आखिर पहाड़े रटने पर इतना फोकस क्यों किया जाता है?

भारतीय स्कूलों में टेबल्स पर फोकस करने के पीछे वैज्ञानिक कारण है. किसी चीज को बार-बार रटने से वह ‘वर्किंग मेमोरी’ से निकलकर ‘लॉन्ग-टर्म मेमोरी’ में सेव हो जाती है. मैथ्स के न्यूमेरिकल सॉल्व करते वक्त अगर हर बार 7 को 8 से गुणा करने के लिए रफ कॉपी का इस्तेमाल करना पड़े तो आपका आधा समय तो बेसिक कैलकुलेशन में ही निकल जाएगा. पहाड़े जुबानी याद होने से दिमाग का मुख्य फोकस फॉर्मूला समझने और सवाल की गहराई तक पहुंचने पर होता है, न कि छोटे-मोटे जोड़-घटाव या गुणा-भाग करने पर.

टेबल याद करने के क्या फायदे हैं?

पहाड़ों का इस्तेमाल सिर्फ क्लासरूम या परीक्षा हॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिंदगी के हर मोड़ पर काम आता है. मार्केट में सब्जी खरीदने जाएं, कपड़े का नाप लें, घर का बजट बनाएं या किसी दुकान पर डिस्काउंट कैलकुलेट करें तो दिमाग बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के सेकेंडों में हिसाब लगा लेता है. इससे कॉन्फिडेंस बढ़ता है. इसके अलावा, इंजीनियरिंग, कोडिंग, डेटा एनालिसिस और फाइनेंस जैसे भविष्य के तमाम क्षेत्रों में मेंटल मैथ (Mental Math) की तेज स्पीड बहुत काम आती है.

क्या अन्य देशों में भी पहाड़े याद कराए जाते हैं?

एक सवाल अक्सर उठता है कि क्या पश्चिमी देशों या विकसित देशों में भी पहाड़े रटाए जाते हैं. एक दौर में अमेरिका और यूरोप के कई देशों में ‘रटने’ की पद्धति नकार दी गई थी. वहां कैलकुलेटर और समझने की कला पर जोर दिया गया. जिन देशों (जैसे भारत, जापान, सिंगापुर और चीन) के बच्चों को बेसिक पहाड़े और मेंटल मैथ जुबानी याद कराई जाती है, वे गणित की ग्लोबल रैंकिंग में आगे रहते हैं. अब पश्चिमी देश भी अपनी गलती मान रहे हैं और भारतीय तर्ज पर बेसिक मैथ्स मेमोराइजेशन को सिस्टम में ला रहे हैं.

पहाड़े याद रखने और सीखने के आसान और मजेदार तरीके

अगर आपको पहाड़े याद करने में परेशानी होती है या याद करके तुरंत भूल जाते हैं तो जानिए कुछ सिंपल और मजेदार ट्रिक्स, जिनसे टेबल्स चुटकियों में याद हो जाएंगे:

  • टेबल को पैटर्न में समझें: हर पहाड़े में गणितीय पैटर्न होता है. उसे रटने के बजाय समझें, जैसे 9 के पहाड़े में अंकों का जोड़ हमेशा 9 ही होता है.
  • संगीत या रिदम बनाएं: टेबल्स को कविता या गाने की तर्ज पर बोलने से वे लंबे समय तक दिमाग में फिट रहते हैं.
  • दैनिक जीवन में करें इस्तेमाल: सामान लाते वक्त बच्चों से कहें कि वे खुद दाम का हिसाब लगाएं. इससे दिमाग तेजी से काम करता है.
  • फ्लैश कार्ड्स का इस्तेमाल: रंग-बिरंगे कार्ड्स पर टेबल्स लिखकर कमरे में चिपका दें, आते-जाते नजर पड़ने से वे आसानी से याद हो जाते हैं.



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