क्या है छत्तीसगढ़ का अश्लील सीडी कांड? सुर्खियों में आए थे भूपेश बघेल, चुनाव बाद मिली थी CM की कुर्सी

क्या है छत्तीसगढ़ का अश्लील सीडी कांड? सुर्खियों में आए थे भूपेश बघेल, चुनाव बाद मिली थी CM की कुर्सी


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Chhattisgarh CD Scandal: छत्तीसगढ़ के चर्चित सेक्स सीडी कांड में अभी हाईकोर्ट में भूपेश बघेल की याचिका पर सुनवाई नहीं हो पाई. अब इस पर सुनवाई 25 नवंबर को होगी. सीडी कांड के बाद भूपेश बघेल काफी चर्चा में आए थे और चुनाव के बाद उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी भी मिली थी. अब आइए जानते हैं कि यह पूरा कांड था क्या?

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क्या है छत्तीसगढ़ का सीडी कांड?

Chhattisgarh CD Scandal: छत्तीसगढ़ की राजनीति के इतिहास में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, लेकिन साल 2017 में सामने आया ‘सेक्स सीडी कांड’ एक ऐसा राजनीतिक भूचाल था, जिसने पूरे प्रदेश के सियासी पारे को गरमा दिया था. इस विवाद ने न केवल सत्ता और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज की. इसकी आंच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक पहुंची, जो उनकी राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट माना जाता है.

क्या था छत्तीसगढ़ का सेक्स सीडी कांड?
यह पूरा मामला अक्टूबर 2017 में तब सामने आया, जब सोशल मीडिया और मीडिया सर्कल्स में एक विवादित सीडी वायरल होने लगी. दावा किया गया कि इस सीडी में तत्कालीन भाजपा सरकार के मंत्री राजेश मूणत मौजूद हैं. सीडी के उजागर होते ही प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया. राजेश इन आरोपों को नकारते रहे. उनकी तरफ से कहा गया कि वीडियो से छेड़छाड़ की गई है.

मंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे फर्जी और अपनी राजनीतिक छवि को धूमिल करने की साजिश बताया. मामले की गंभीरता को देखते हुए रायपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू कर दी. बाद में मामले के व्यापक प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच CBI को सौंप दी.

भूपेश बघेल ने खोला था मोर्चा
सीडी कांड के सामने आने के समय भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष थे. भूपेश ने इस मुद्दे पर तत्कालीन राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. उन्होंने सीडी कांड का जिक्र करते हुए सरकार और संबंधित मंत्री पर तीखे हमले किए और नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की.

सीडी कांड की जांच के दौरान सीबीआई ने भूपेश बघेल और पत्रकार विनोद वर्मा समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया. भूपेश पर आरोप लगा कि इस सीडी को बनवाने, बांटने और मंत्री को ब्लैकमेल करने की साजिश रची गई थी. सितंबर 2018 में इस मामले में भूपेश को रायपुर की विशेष अदालत में पेश होना पड़ा. जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था. उस दौरान उन्होंने जमानत लेने से इनकार कर दिया था. हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई.

चुनाव के बाद भूपेश को मिली थी मुख्यमंत्री की कुर्सी
ऐसा माना जाता है कि भूपेश बघेल की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस के कार्यकर्ता जोश में आ गए. उनके समर्थन में कार्यकर्ताओं ने खूब सभाएं आयोजित कीं. कांग्रेस की तरफ से कैंपेन चलाया गया कि मैं भी भूपेश. बाद में जब साल 2018 में विधानसभा चुनाव हुए थे, तो कांग्रेस पूर्व बहुमत के साथ सत्ता में वापस आई थी. इसके बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी भूपेश को मिली थी.

बरी होने के बाद भूपेश को लगा था झटका
साल 2023 में इस चर्चित मामले में बड़ा कानूनी मोड़ आया, जब विशेष सीबीआई अदालत ने साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर भूपेश बघेल को इस केस से बरी कर दिया. फिर बाद में विशेष अदालत ने बरी करने के आदेश को रद्द कर दिया था. इसके खिलाफ भूपेश ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी. जिस पर अभी तक सुनवाई पूरी नहीं हुई है. अब इस केस में 25 नवंबर को सुनवाई तय हुई है.



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