उधर होर्मुज में मचा है बवाल, इधर भारत ईरान के साथ निभा रहा पक्की वाली दोस्ती
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Iran Navy Ship: ईरान जंग की आग होर्मुज से बाब अल-मंदेब तक पहुंच चुकी है. ये दोनों समुद्री गलियारे एनर्जी सप्लाई के लिए काफी अहम है. होर्मुज और लाल सागर में उथल-पुथल का असर एशिया से लेकर यूरोप तक में देखा जा रहा है. पश्चिम एशिया में युद्ध के समाप्त होने का इंतजार पूरी दुनिया को है.
ईरानी नौसेना का शिप IRIS लवन अभी भी कोच्चि में है. इसके साथ तकरीबन 50 ईरानी जवान भी मौजूद हैं. (फोटो: Reuters)
Iran Navy Ship: ईरान जंग से पूरी दुनिया हैरान परेशान है. तेल के साथ ही गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के चलते खासकर विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध में एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं तो दूसरी तरफ ईरान. तेहरान को आर्थिक रूप से पंगु करने के लिए अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया है. इससे तेल और गैस के टैंकर्स की आवाजाही पर असर पड़ा है. इस बीच, भारत और ईरान की दोस्ती की बात सामने आई है. ईरानी नेवी का शिप IRIS लवन पिछले 6 महीने से कोच्चि में है. ईरान नेवी का यह शिप फरवरी में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और MILAN-2026 में हिस्सा लेने भारत आया था. अमेरिकी नौसेना ने ईरान के IRIS देना फ्रिगेट को श्रीलंका तट के करीब तबाह कर दिया था. उसके बाद से ही IRIS लवन कोच्चि में है.
ईरानी नौसेना का लैंडिंग शिप IRIS लवन (IRIS Lavan) अब भी केरल के कोच्चि बंदरगाह पर मौजूद है. जहाज के साथ उसके चालक दल के कुछ सदस्य भी कोच्चि में रुके हुए हैं. यह युद्धपोत चार मार्च को मानवीय आधार पर कोच्चि पहुंचा था. लवन और ईरानी नौसेना का फ्रिगेट IRIS देना (IRIS Dena) फरवरी में भारत आए थे. दोनों जहाजों ने विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास मिलन-2026 में हिस्सा लिया था. अभ्यास पूरा होने के बाद दोनों जहाज ईरान लौट रहे थे, तभी पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हो गया. इसी दौरान 5 मार्च को ईरानी नौसेना का तीसरा जहाज और फ्लीट सप्लाई वेसल आईआरआईएस बुशहर श्रीलंका में शरण लेने पहुंचा था.
भारत ने किस आधार पर दी है शरण
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, IRIS लवन ने भारत पहुंचने से पहले तकनीकी दिक्कतों की सूचना दी थी. इसके बाद भारत ने मानवीय आधार पर उसे 4 मार्च को कोच्चि में रुकने की अनुमति दी. जहाज के चालक दल के सदस्यों को भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया. मार्च में जब IRIS लवन कोच्चि पहुंचा था, तब उसमें 183 सदस्य सवार थे. सूत्रों के मुताबिक, अब भी 50 से अधिक चालक दल के सदस्य कोच्चि में हैं, जबकि कुछ रिपोर्टों में जहाज के संचालन के लिए जरूरी दो दर्जन से अधिक सदस्यों के वहां मौजूद होने की बात कही गई है. सूत्रों ने बताया कि जहाज की देखरेख की जिम्मेदारी अब कोचीन पोर्ट अथॉरिटी को सौंप दी गई है.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर क्या बोले
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सात मार्च को IRIS लवन को कोच्चि में प्रवेश की अनुमति दिए जाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि ईरानी पक्ष ने बताया था कि जहाज तकनीकी दिक्कतों का सामना कर रहा है. उनके अनुसार, जहाज जब भारत आया था तब परिस्थितियां पूरी तरह अलग थीं. वह भारत में फ्लीट रिव्यू और नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने आया था, लेकिन लौटते समय बदलते घटनाक्रम के बीच फंस गया. जयशंकर ने कहा था कि जहाज मुश्किल में था और उसने भारतीय बंदरगाह में प्रवेश का अनुरोध किया था. ऐसे में भारत के लिए उसे मानवीय आधार पर प्रवेश देना उचित कदम था.