नई दिल्ली (Ajit Doval and S Jaishankar). जब भी देश के सामने कोई बड़ी कूटनीतिक चुनौती या राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर संकट खड़ा होता है तो देशवासियों की नजरें 2 ऐसे दिग्गजों पर टिक जाती हैं जिन्हें भारत का ‘राम-लक्ष्मण’ कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी. यह जोड़ी अजीत डोभाल और एस जयशंकर की है. BRICS समिट से ठीक पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के चीन दौरे का मकसद साफ था- सम्मेलन के सुचारू आयोजन से पहले भारत-चीन के बीच जमी बर्फ पिघलाकर रिश्ते ठीक करना.
नेशनल क्राइसिस में संकटमोचक जैसी ढाल बन जाते हैं अजीत डोभाल और एस जयशंकर
जब भी भारत सरकार के सामने कोई भी ‘क्राइसिस’ या संकट आता है तो एनएसए प्रमुख अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर हिमालय की तरह अडिग नजर आते हैं.
‘भारत के जेम्स बॉन्ड’ अजीत डोभाल
रॉ में मिली बेहद खतरनाक प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी
साल 1972 में अजीत डोभाल देश की खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) से जुड़ गए. अपने करियर के दौरान उन्होंने कई सालों तक अंडरकवर (गुप्तचर) रूप में भी बेहद खतरनाक काम किए. इसके चलते उन्हें ‘भारत का जेम्स बॉन्ड’ भी कहा जाता है. वे 2004 से 2005 तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के निदेशक रहे. इसके बाद मई 2014 से देश के पांचवें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के रूप में देश की सुरक्षा की कमान संभाल रहे हैं.
कूटनीति के माहिर खिलाड़ी डॉ. एस जयशंकर
आईएफएस अफसर से बने विदेश मंत्री
एक साथ घूमता है कूटनीति और सुरक्षा का पहिया
अजीत डोभाल और जयशंकर की जोड़ी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की साख को नए मुकाम पर पहुंचाया है. हाल ही में ब्रिक्स समिट से पहले एनएसए अजीत डोभाल की चीन यात्रा इसी रणनीति का हिस्सा थी, जिससे क्षेत्रीय तनाव को कम किया जा सके और भारत अपने राष्ट्रीय हितों को साधते हुए ग्लोबल बैठकों को सफल बना सके. कूटनीतिक मोर्चे पर डॉ. जयशंकर दुनिया को भारत की मजबूत विदेश नीति से रूबरू कराते हैं तो सुरक्षा के मोर्चे पर अजीत डोभाल हर नापाक साजिश का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार रहते हैं.
किसी के आगे झुकते नहीं दोनों
अजीत डोभाल और एस जयशंकर की सबसे बड़ी खूबी है कि वे किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकते. चाहे सरहद पार आतंकवाद से निपटना हो या पश्चिमी देशों की आंखों में आंखें डालकर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर टिके रहना हो.. इन दोनों ने हमेशा साबित किया है कि मजबूत लीडरशिप देश को किस बुलंदी पर ले जा सकती है. यही वजह है कि संकट के हर दौर में देश की जनता और सरकार इन दोनों चेहरों पर आंख मूंदकर भरोसा करती है.