Camel Mila Patent: ऊंटनी के दूध पर वैज्ञानिकों का बड़ा कमाल, प्रोटीन तकनीक को मिला भारत सरकार का पेटेंट

Camel Mila Patent: ऊंटनी के दूध पर वैज्ञानिकों का बड़ा कमाल, प्रोटीन तकनीक को मिला भारत सरकार का पेटेंट


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Bikaner Camel Milk Research: बीकानेर स्थित वेटरनरी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ऊंटनी के दूध में मौजूद प्रोटीन हाइड्रोलायटेट के कार्यात्मक और जैवसक्रिय गुणों को बढ़ाने की तकनीक विकसित की है, जिसे भारत सरकार से पेटेंट मिला है. शोध के अनुसार तकनीक से तैयार प्रोटीन को दूध उत्पादों में शामिल करने पर उनकी न्यूट्रिशन वैल्यू, यील्ड और सेल्फ लाइफ बढ़ाने में मदद मिल सकती है. विश्वविद्यालय अब इस तकनीक के व्यावसायिक उपयोग की दिशा में काम कर रहा है.

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ऊंटनी के दूध की प्रोटीन पावर बढ़ाने वाली तकनीक को मिला भारत सरकार का पेटेंट

बीकानेर: बीकानेर में ऊंटनी के दूध की उपयोगिता और उससे जुड़े वैज्ञानिक शोध को नई दिशा देते हुए वेटरनरी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिको कि टीम ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इस तकनीक को भारत सरकार से पेटेंट मिला है. वैज्ञानिको ने ऊंटनी के दूध में हाइड्रोलायटेट प्रोटीन पावर बढ़ाने की तकनीक विकसित जिससे दूध से बने उत्पादों की न्यूट्रिशन वल्यु बढ़ाने से साथ उनकी सेल्फ लाइफ भी बढ़ेगी.

वेटरनरी विश्वविद्यालय के पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.आर के बेरवाल ने बताया की विभाग से पीएचडी कर रही डॉ. अनीता तंवर को ऊंटनी के दूध में मौजूद प्रोटीन हाइड्रोलायटेट के कार्यात्मक गुणों और इसकी जैवसक्रिय क्षमता को बढ़ाने वाली एक विशेष तकनीक विकसित करने के लिए यह सफलता मिली है. ऊंटनी के दूध में प्रोटीन में कजिन की मात्रा 80 प्रतिशत होती है वही इसमें बीटा केजिन सबसे ज्यादा होता है. इस शोध से तैयार कजिन पाउडर को हाइड्रोलायटेट करने से जैवसक्रिय क्षमता बढ़ जाती है जिससे इसे किसी भी दूध उत्पाद में मिलाने से उसकी न्यूट्रिशन वल्यु, इल्ड व सेल्फ लाइफ कई गुणा बढ़ जाती है. जिससे उत्पाद लम्बे समय तक खराब नहीं होता और प्रोटीन भी अधिक मिलता है. विभाग अब इसके व्यवसायिक स्वरूप में लेन की दिशा में काम कर रहा है.

डॉ.आर के बेरवाल, विभागाध्यक्ष, पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग
वीओ – इस गौरवमयी उपलब्धि को लेकर वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने पूरी वैज्ञानिक टीम को बधाई देते हुए कहाकि यह अनुसंधान न केवल संस्थान के लिए गर्व की बात है,बल्कि भविष्य ऊँटनी के दुग्ध की उपयोगिता को बढ़ाने में भी सहायक होगा. उन्होंने कहाकि ऊंटनी के दूध में वैसे भी कई बीमारियों को दूर करने की क्षमता होती है यदि इस पाउडर को अन्य दूध उत्पादों में मिलाने से मानव स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा. इस शोध के बाद ऊंटनी के दूध की और संभावनाओ को भी बल मिलेगा.

डॉ. सुमंत व्यास, कुलगुरु, वेटरनरी विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय में किए जा रहे शोध का उद्देश्य केवल वैज्ञानिक उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि उनके व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं को भी आगे बढ़ाना है.



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