Who Is Shankh Airlines Founder Sharvan Kumar Vishwakarma: यूपी से पहले एयरलाइन्स का सपना देखने वाले श्रणव कुमार विश्वकर्मा के घर और उनकी कंपनी के दफ्तर में आयकर विभाग के सर्वे की कार्रवाई चल रही है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को लखनऊ के गोमती नगर में स्थिति उनकी कंपनी के दफ्तर और विश्वकर्मा के घर पर यह सर्वे अभियान चला. इस दौरान आयकर अधिकारियों ने उनके और उनकी कंपनी शंख एयरलाइन्स के खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन की जानकारी हासिल की. श्रणव कुमार की योजना यूपी के पहले एयरलाइन्स की शुरुआत करने की है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वह कम से कम तीन विमानों के साथ इसी साल लखनऊ से दिल्ली और मुंबई के बीच उड़ान सेवा शुरू करने की योजना पर काम कर रहे हैं. इसके लिए उनको भारत सरकार से उड़ान की अनुमति मिलने का इंतजार है. इस बीच उनके ऑफिस और घर पर आयकर विभाग के सर्वे के बाद कई सवाल उठने लगे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह एयरलाइन्स जल्द शुरू हो पाएगी.
कौन हैं श्रवण कुमार विश्वकर्मा?
कानपुर से निकलकर एयरलाइन खड़ी करने वाले श्रवण कुमार विश्वकर्मा की कहानी बाकी विमानन कारोबारियों से काफी अलग है. मीडिया रिपोर्टों में उनके हवाले से बताया गया है कि कारोबारी सफर शुरू करने से पहले उन्होंने टेंपो और ऑटो चलाया था और बतौर लोडर भी काम किया. शुरुआती दौर में उन्होंने कई छोटे कारोबार आजमाए, लेकिन उनमें से कई सफल नहीं हुए. उनकी कारोबारी यात्रा में बड़ा मोड़ 2014 के आसपास आया, जब उन्होंने सीमेंट के कारोबार में कदम रखा. इसके बाद वह टीएमटी सरिया, खनन और ट्रांसपोर्ट कारोबार में उतरे. धीरे-धीरे उन्होंने ट्रांसपोर्ट के कारोबार में 400 से ज्यादा ट्रकों का बेड़ा खड़ा किया. यही कारोबार आगे चलकर विमानन क्षेत्र में उतरने के लिए उनके कारोबारी आधार का हिस्सा बना. यानी शंख एयर अचानक खड़ी की गई कोई अलग-थलग कंपनी नहीं है. इसके पीछे विश्वकर्मा का पहले से चल रहा कारोबारी समूह है. यही वजह है कि एयरलाइन के लिए पैसा कहां से आ रहा है, यह सवाल इस समय चर्चा में है.
शंख एयर कब और कैसे बनी?
शंख एयर को चलाने वाली कंपनी शंख एविएशन प्राइवेट लिमिटेड अक्टूबर 2023 में बनी. कंपनी के निदेशकों में श्रवण कुमार विश्वकर्मा के साथ अनुराग छाबड़ा और कौशिक सेनगुप्ता के नाम दर्ज हैं. कंपनी की ऑथोराइज्ड पेड कैपिटल करीब 50 करोड़ रुपये बताई गई है. इसके बाद विमानन कारोबार में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हुई. केंद्र सरकार ने मार्च 2025 में राज्यसभा में बताया था कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शंख एविएशन को निर्धारित यात्री सेवाएं शुरू करने के लिए शुरुआती एनओसी यानी अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया है. हालांकि उस समय कंपनी को उड़ान शुरू करने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए से एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट हासिल करना बाकी था. दिसंबर 2025 में शंख एयर को मंत्रालय से एनओसी मिलने के बाद कंपनी ने 2026 में उड़ान शुरू करने की तैयारी तेज की. शुरुआती योजना तीन एयरबस विमानों से सेवा शुरू करने की थी. लखनऊ से दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों को जोड़ने के साथ उत्तर प्रदेश के दूसरे शहरों तक नेटवर्क बढ़ाने की योजना भी बताई गई थी.
आखिर शंख एयर में इतना पैसा आया कहां से?
कहानी का कारोबारी पहलू दिलचस्प है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक विश्वकर्मा की मूल कारोबारी कंपनी शंख ट्रेडिंग स्टील, सीमेंट और रेत के कारोबार में है. बिजनेस अखबार द मिंट की एक रिपोर्ट में क्रिसिल की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के हवाले से शंख ट्रेडिंग का राजस्व 643.7 करोड़ और मुनाफा 28.4 करोड़ रुपये बताया गया था. इसी कारोबार से शंख एयर के लिए पूंजी जुटाने की बात सामने आती है. विश्वकर्मा ने खुद भी कहा था कि एयरलाइन को मूल कंपनी का पूरा बैकअप प्राप्त है. उनके मुताबिक खरीदने के बजाय विमान लीज और वित्तीय व्यवस्था के जरिए लिए गए हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि कंपनी के सामने धन की कमी नहीं है.
श्रणव कुमार विश्वकर्मा. फोटो- इंस्टाग्राम (https://www.instagram.com/sharvankrvishwakarma/?hl=en)
तो क्या श्रवण कुमार की निजी संपत्ति कितनी है?
श्रवण कुमार विश्वकर्मा की सटीक निजी संपत्ति या नेटवर्थ का कोई विश्वसनीय सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. कुछ वेबसाइटों ने उनकी नेटवर्थ के अलग-अलग आंकड़े बताए हैं, लेकिन उन्हें स्वतंत्र और भरोसेमंद स्रोतों से पुष्ट नहीं किया जा सकता. इसलिए शंख एविएशन की 50 करोड़ रुपये की पेडअप कैपिटल या शंख ट्रेडिंग के सैकड़ों करोड़ रुपये के कारोबार को सीधे श्रवण कुमार की निजी संपत्ति बताना सही नहीं होगा.
इनकम टैक्स सर्वे क्यों कर रहा है?
25 सितंबर 2026 को आयकर विभाग की टीम ने लखनऊ में श्रवण कुमार विश्वकर्मा के आवास और शंख एयर के कार्यालय में जांच की. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अधिकारियों ने कंपनी के दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी खंगाली. कर्मचारियों से पूछताछ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच किए जाने की भी खबर है. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आयकर विभाग ने अभी तक सार्वजनिक तौर पर यह नहीं बताया है कि सर्वे किस खास वजह से किया गया. यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि जांच में विभाग को किस तरह की कथित कर अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी मिली है. इसलिए इस समय यह कहना कि सर्वे किसी खास घोटाले, कर चोरी या गलत लेनदेन की वजह से हुआ, तथ्यात्मक रूप से जल्दबाजी होगी. सर्वे का मतलब भी अपने-आप यह नहीं होता कि व्यक्ति या कंपनी दोषी पाए गए हैं. आयकर विभाग किसी कारोबारी के खातों, दस्तावेजों और लेनदेन की जांच करके यह देख सकता है कि घोषित आय, कारोबार और वित्तीय रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी तो नहीं है.
क्या आयकर सर्वे से शंख एयर की उड़ान थम जाएगी?
अभी ऐसा कहना भी जल्दबाजी होगी. शंख एयर को पहले ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय से शुरुआती एनओसी मिल चुकी है, लेकिन विमान उड़ाने के लिए अलग-अलग नियामकीय शर्तें और डीजीसीए की मंजूरी पूरी करना जरूरी है. आयकर विभाग की मौजूदा कार्रवाई का एयरलाइन के विमानन लाइसेंस पर क्या असर पड़ेगा, यह जांच के निष्कर्ष और संबंधित नियामकीय फैसलों पर निर्भर करेगा. यानी फिलहाल दो अलग-अलग चीजों को अलग रखना जरूरी है. एक तरफ आयकर विभाग की वित्तीय जांच और दूसरी तरफ एयरलाइन शुरू करने की विमानन नियामकीय प्रक्रिया.
क्या शंख एयर इसी साल उड़ पाएगी?
कंपनी ने 2026 में उड़ान शुरू करने की योजना बताई थी. शुरुआती तौर पर तीन एयरबस विमानों के साथ लखनऊ से दिल्ली, मुंबई और दूसरे शहरों को जोड़ने की बात कही गई थी. हालांकि जनवरी-मार्च 2026 की पहले की समय सीमा अब निकल चुकी है और सितंबर 2026 में आयकर विभाग की कार्रवाई सामने आने के बाद कंपनी की मौजूदा लॉन्च टाइमलाइन पर ताजा स्थिति स्पष्ट नहीं है. इसलिए अभी केवल इतना ही कहा जा सकता है कि शंख एयर की कहानी सिर्फ टेंपो चलाने वाले एक कारोबारी के एयरलाइन मालिक बनने की कहानी नहीं रह गई है. अब इसकी वित्तीय संरचना और कारोबारी लेनदेन भी जांच के दायरे में हैं.