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Barn Owl Rescue: भीलवाड़ा शहर के शास्त्री नगर इलाके में एक मकान की छत पर एक साथ तीन बार्न आउल दिखाई देने से परिवार में हलचल मच गई. तीनों उल्लुओं को देखकर लोगों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी. जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम और वन्यजीव रक्षक मौके पर पहुंचे. टीम ने तीनों बार्न आउल को सुरक्षित रेस्क्यू किया. एक साथ तीन उल्लुओं का दिखाई देना इलाके में चर्चा का विषय बना रहा.
भीलवाड़ा – भीलवाड़ा शहर के सबसे पॉश इलाके में से एक माने जाने वाले शास्त्री नगर में एक मकान की छत पर अचानक तीन बार्न आउल दिखाई देने से परिवार में हलचल मच गई. घर की छत पर एक साथ तीन उल्लुओं को देखकर लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी. सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम और वन्यजीव रक्षक उस मकान पर पहुँचे.
वनरक्षक दीपा कंवर, सावित्री तेली और नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवक एवं वन्यजीव रक्षक नारायण लाल बैरवा ने बताया कि ये मामला शास्त्री नगर पार्किंग गैराज के पास स्थित मकान नंबर 845 का है. जहां कोनार्क मंगनानी के घर की छत पर तीन बार्न आउल दिखाई दिए थे. मौके पर पहुंची टीम ने स्थिति का जायजा लिया और सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया. टीम विशेष सावधानी बरतते हुए तीनों उल्लुओं को सुरक्षित पकड़ लिया. रेस्क्यू के दौरान इस बात का खास ध्यान रखा गया कि पक्षियों को किसी तरह की चोट न लगे और उन्हें अनावश्यक परेशानी भी न हो. रेस्क्यू के बाद वन विभाग की मौजूदगी में तीनों बार्न आउल को उनके अनुकूल प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया.
प्रशिक्षित वन्यजीव रक्षक को सूचना देना चाहिए
वन्यजीव रक्षक नारायण लाल बैरवा ने बताया कि रेस्क्यू किए गए बार्न आउल का वैज्ञानिक नाम Tyto alba है. यह उल्लू की व्यापक रूप से पाई जाने वाली प्रजातियों में शामिल है. उन्होंने बताया कि दुनिया में उल्लुओं की 223 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, हालांकि आम लोगों को इनमें से कुछ ही प्रजातियां अक्सर दिखाई देती हैं. कई बार पक्षी या अन्य वन्यजीव भोजन, सुरक्षित स्थान या मौसम से बचने के लिए आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं. ऐसे में घबराने या उन्हें नुकसान पहुंचाने के बजाय वन विभाग अथवा प्रशिक्षित वन्यजीव रक्षक को सूचना देना चाहिए.
वन विभाग ने आमजन से अपील की
वन विभाग ने आमजन से अपील की कि घर, छत या आसपास कोई वन्यजीव अथवा पक्षी दिखाई दे तो उसे पकड़ने या भगाने की कोशिश न करें. इसकी सूचना तुरंत संबंधित वन्यजीव रक्षक या वन विभाग को दें, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके.