डेमोक्रेटिक TMC के ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न पर घमासान, हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को लगाई फटकार

डेमोक्रेटिक TMC के ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न पर घमासान, हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को लगाई फटकार


डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के नए चुनाव चिह्न ‘लिफाफा’ पर बवाल मच गया है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने इसी को लेकर चुनाव आयोग को फटकार लगाई है. आयोग ने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को संतुष्ट करते हुए दो अलग-अलग चुनाव चिह्न बांटे थे. इनमें से रितब्रत के गुट को लिफाफा चुनाव चिह्न दिया था, जबकि ममता बनर्जी को फुटबॉल चुनाव चिह्न आवंटित किया था, लेकिन अब लिफाफा को लेकर दो गुटों में कोर्ट-कचहरी का मामला बन गया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने आयोग से कहा कि उसने 6 अक्टूबर के उपचुनाव के लिए ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को आवंटित कर दिया. जबकि यह चिह्न भारतीय सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) ने 2026 के विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल किया था. यही फ्रंट अब फिर से उपचुनाव में खड़ा हो रहा है, ऐसे में दो दलों के पास एक जैसा चुनाव चिह्न होना आम लोगों के लिए भी और पार्टियों के लिए भी सिरदर्द बन रहा है.

जस्टिस कृष्ण राव ने आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि आयोग चुनाव शुरू होते ही परेशानी पैदा कर रहा है और पार्टियों को कोर्ट आने के लिए मजबूर कर रहा है, जिससे अदालत पर खामखां बोझ बढ़ रहा है.

जस्टिस ने चुनाव आयोग के वकील से कहा, “अधिकारियों से वाकई तंग आ गए हैं. चुनाव शुरू होते ही आप परेशानी खड़ी करने लगते हैं. फिर पार्टियां कोर्ट आती हैं और अदालत पर बोझ डालती हैं.”

हाईकोर्ट ने अधिकारियों को सलाह दी कि उन्हें निष्पक्ष और सही तरीके से काम करना चाहिए. जस्टिस राव ने आयोग से यह भी पूछा कि 183 चुनाव चिह्नों में से आयोग ने ‘लिफाफा’ ही क्यों चुना और दूसरे दल को दे दिया. उन्होंने सवाल किया, “क्या इसी तरह काम होता है?”

लिफाफा पर क्यों घमासान?
बता दें कि नौसाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाली आईएसएफ ने भांगड़ सीट 2026 के विधानसभा चुनाव में जीती थी. इस दौरान पार्टी का चुनाव चिह्न लिफाफा ही था. हालांकि अब टीएमसी के दो गुटों में शांति कराने के चक्कर में आयोग ने एक गुट को लिफाफा दे दिया. इसी को लेकर पार्टी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ‘लिफाफा’ चिह्न को फ्रीज करने की मांग की. चुनाव आयोग ने यह चिह्न डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को तो दिया ही आईएसएफ को उपचुनाव के लिए ‘अलमारी’ चिह्न आवंटित कर दिया.

आईएसएफ के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने अदालत से कहा, “हमारे मतदाता भ्रमित हो जाएंगे. हमने 2026 के विधानसभा चुनाव में ‘लिफाफा’ चिह्न से लड़ाई लड़ी थी और अब उपचुनाव भी लड़ रहे हैं.”

चुनाव आयोग ने दी ये दलील
हालांकि इस दौरान चुनाव आयोग के वकील ने दलील दी कि आईएसएफ एक पंजीकृत लेकिन मान्यता प्राप्त पार्टी नहीं है. ऐसी पार्टियों के लिए आरक्षित चिह्न नहीं होते. आईएसएफ को ‘लिफाफा’ दो बार दिया जा चुका है, आखिरी बार 2026 के विधानसभा चुनाव में दिया गया था.

हालांकि आईएसएफ ने जवाब दिया कि उपचुनाव विधानसभा चुनाव का ही विस्तार है और इसमें भी वे उसी चुनाव चिह्न से चुनाव लड़ेंगे जिससे विधानसभा चुनाव लड़े थे.

जस्टिस राव ने पूछे ये सवाल
जस्टिस राव ने पूछा कि क्या आईएसएफ ने उपचुनाव के लिए चिह्न के लिए आवेदन किया था. पार्टी के वकील ने बताया कि कोई नई अधिसूचना नहीं आई थी जिसमें पार्टियों से फॉर्म 10बी जमा करने को कहा गया हो.

तब जस्टिस ने कहा, “अगर आपने पाया कि महज चार महीने पहले एक राजनीतिक दल ने यह चिह्न इस्तेमाल किया था, तो उपचुनाव के लिए वही चिह्न क्यों चुना? आप इसे दूसरों की तरह आरक्षित रख सकते थे. क्यों नहीं रखा?”

मामले की अगली सुनवाई अब शुक्रवार को होगी. अदालत का रुख साफ है कि चुनाव आयोग को ऐसे फैसले लेते समय सावधानी बरतनी चाहिए ताकि मतदाताओं में भ्रम न फैले और गैर-जरूरी मुकदमेबाजी न बढ़े.



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