गाजीपुर: जिले के सिकंदरपुर घाट के पास 9 जून 2014 का दिन आम दिनों की तरह ही शुरू हुआ था, लेकिन कुछ ही घंटों में इस छोटे से घाट ने एक ऐसी बहादुरी की दास्तान देखी, जो आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है. महज छह साल के एक बच्चे और उसके परिवार के अदम्य साहस ने उस दिन मौत के मुंह में समा रहे 11 लोगों की जान बचाई थी. हालांकि, इस संघर्ष के बीच एक महिला की जान चली जाने का गम भी इस घटना से जुड़ा है.
चोचकपुर निवासी सूरज बताते हैं कि जिस समय यह हादसा हुआ, उनकी नाव डूब रही नाव से करीब 200 मीटर की दूरी पर थी. अचानक उनकी नजर गंगा में डूब रही नाव पर पड़ी. उन्होंने अपने पिता से कहा- ‘पापा देखो, नाव डूब रही है.’ शुरुआत में पिता को लगा कि शायद सूरज कुछ और देख रहे हैं, लेकिन जब ध्यान से देखा गया तो पता चला कि नाव सच में गंगा में डूब रही थी. इसके बाद वे लोग तुरंत अपनी नाव लेकर वहां पहुंचे.
आम खाने की जिद ने बदल दी उस दिन की कहानी
सूरज के बड़े भाई विशाल उस घटना को याद करते हुए बताते हैं कि उस दिन वे लोग सिकंदरपुर की तरफ मछली पकड़ने गए थे. गंगा के किनारे आम का पेड़ था. लौटते समय सूरज आम खाने की जिद करने लगे. विशाल बताते हैं कि किसी ने आम तोड़ लिया था और जब वे लोग करीब 200 मीटर आगे निकल आए तो सूरज ने अपने पिता से पूछा कि आम कहां है. पिता ने बताया कि आम का पेड़ तो पीछे छूट गया है.
विशाल बताते हैं कि सूरज आम खाने के लिए फिर पीछे जाने की जिद करने लगे. परिवार वापस आम के पेड़ की तरफ जाने लगा. इसी दौरान उनकी नजर उस नाव पर पड़ी, जिसमें कई लोग मुश्किल में फंसे थे. उस समय डूब रही नाव उनसे करीब 200-300 फीट की दूरी पर थी. पहले उन्हें भी लगा कि शायद सूरज ने कुछ गलत देखा है, लेकिन पास पहुंचने पर पूरा मंजर सामने था.
किसी का सिर दिख रहा था तो किसी के बाल
विशाल के मुताबिक, शुरुआत में लगा कि शायद भ्रम हो, लेकिन पास जाने पर पूरा मंजर दिल दहला देने वाला था. नाव लगभग पूरी तरह डूब चुकी थी. पानी में कुछ लोगों के सिर दिख रहे थे, तो कुछ लोग बेहोश होकर बह रहे थे. कुछ लोग एक-दूसरे को पकड़कर संघर्ष कर रहे थे.
सूरज के पिता ने अपनी सूझबूझ दिखाते हुए पतवार को पानी में आगे बढ़ाया, ताकि डूब रहे लोग उसे पकड़ सकें. जो लोग तैर सकते थे, उन्हें नाव का सहारा दिया गया, जबकि बेहोश हो चुके लोगों को खींचकर नाव पर लिटाया गया. महज छह साल की उम्र होने के बावजूद छोटे सूरज ने भी अपने पिता का पूरा साथ दिया. पानी से बाहर निकाले गए लोगों को होश में लाने और उनके सीने से पानी निकालने के प्रयास में सूरज ने अपनी उम्र से बहुत बड़ी हिम्मत दिखाई.
11 लोगों की बची जान, एक दुखद हादसा
इस भयानक हादसे और साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन में कुल 11 लोगों की जान बचा ली गई. हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद एक महिला, जिनकी पहचान माधुरी शर्मा के रूप में हुई, उन्हें नहीं बचाया जा सका. इस बड़ी घटना के बाद स्थानीय स्तर पर सूरज और उनके पिता के साहस की गूंज चारों तरफ फैल गई. साल 2014 में करंडा थाने और तत्कालीन जिला प्रशासन की ओर से उनके इस अदम्य साहस को सम्मानित किया गया था. इसके अलावा तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से भी उन्हें सम्मानित किए जाने की बात सूरज बताते हैं.
आज भले ही इस घटना को 12 साल बीत चुके हों, लेकिन सिकंदरपुर घाट की उस गंगा में छोटी नाव पर सवार होकर जिंदगियां बचाने वाले सूरज और उनके परिवार का वह साहस आज भी गाजीपुर के लिए एक मिसाल बना हुआ है.