25 या 26 सितंबर, भाद्रपद पूर्णिमा कब? उज्जैन के आचार्य से जानें सही तिथि और महत्व

25 या 26 सितंबर, भाद्रपद पूर्णिमा कब? उज्जैन के आचार्य से जानें सही तिथि और महत्व


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25 या 26 सितंबर, भाद्रपद पूर्णिमा कब? आचार्य से जानें सही तिथि और महत्व

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Bhadrapada Purnima 2026: हिंदू धर्म में भाद्रपद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है. इस दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ध्यान करने की परंपरा है. मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए धार्मिक कार्यों से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है.

उज्जैन. हिंदू धर्म में भाद्रपद मास की पूर्णिमा को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, व्रत और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. हालांकि इस बार पूर्णिमा की तिथि को लेकर श्रद्धालुओं में असमंजस बना हुआ है. उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया कि इस वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा किस दिन मनाई जाएगी, साथ ही उन्होंने स्नान-दान, महत्व आदि की जानकारी भी दी है.

वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 25 सितंबर 2026 को रात 11 बजकर 06 मिनट से होगी. वहीं पूर्णिमा तिथि का समापन 26 सितंबर 2026 को रात 10 बजकर 18 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर 2026, दिन शनिवार को मनाई जाएगी.

भाद्रपद पूर्णिमा पर स्नान-दान का महत्व
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. इस दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ध्यान करने की परंपरा है. मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए धार्मिक कार्यों से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है. पूर्णिमा पर कई श्रद्धालु पवित्र नदियों और तीर्थ स्थलों में स्नान करते हैं. यदि तीर्थ स्नान संभव न हो, तो घर पर स्नान कर भगवान का ध्यान और विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं.

भाद्रपद पूर्णिमा के दिन जरूर करें ये काम
भाद्रपद पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करें और स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें. पूजा स्थल पर दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें. फूल, फल और प्रसाद अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करें. इसके बाद जरूरतमंद को भोजन कराएं या अपनी क्षमता के अनुसार दान करें. दिन में भगवान के नाम का जाप, ध्यान या धार्मिक पाठ करें. घर का माहौल शांत और सात्विक रखें. अनावश्यक विवाद से बचें और जरूरतमंदों की मदद करें.



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