सिर्फ पूजा काफी नहीं…पितृ पक्ष पर ये काम भी करें, अयोध्या के आचार्य से जानिए
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Pitru Paksha Rituals at Home : साल 2026 का पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होने वाला है जो 10 अक्टूबर तक चलेगा. पहले दिन पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा. पितृ पक्ष की तैयारी केवल पूजा और धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है. वास्तु के अनुसार इस अवधि से पहले घर में कुछ काम जरूर कर लें. लोकल 18 से अयोध्या के आचार्य सीताराम दास बताते हैं कि पितृ पक्ष शुरू होने से पहले घर के सभी हिस्सों की सफाई जरूर करें. पुराने कपड़े, कागज, बेकार पैकेट, टूटी वस्तुएं और अनुपयोगी सामान को बाहर कर सकते हैं. अगर दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा में पुराने डिब्बे, टूटा फर्नीचर या लंबे समय से बेकार पड़ा सामान है तो उसे व्यवस्थित करना न भूलें.
अयोध्या. सनातन धर्म में पितृ पक्ष का अलग महत्व है. साल 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से होगी और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा. 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा. पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण, तर्पण, श्राद्ध और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने की अवधि माना जाता है. इस दौरान लोग अपनी परंपराओं के अनुसार पूजा-पाठ, दान और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं. लोकल 18 से अयोध्या के आचार्य सीताराम दास बताते हैं कि पितृ पक्ष की तैयारी केवल पूजा और धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस अवधि से पहले घर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित करें. लंबे समय से घर में पड़ी अनुपयोगी वस्तुओं, खराब सामान और बिखरी पुरानी तस्वीरों को व्यवस्थित करने पर ध्यान दें.
न फेंके ये चीजें
पितृ पक्ष शुरू होने से पहले घर के सभी हिस्सों की अच्छी तरह सफाई करें. लंबे समय से इस्तेमाल न किए गए कपड़े, पुराने कागज, बेकार पैकेट, टूटी वस्तुएं और अनुपयोगी सामान को जमा करके न रखें. वास्तु मान्यताओं में अनावश्यक वस्तुओं के अधिक जमाव को घर के वातावरण के लिए उचित नहीं माना जाता. हालांकि, पूर्वजों से जुड़ी भावनात्मक वस्तुओं को बिना सोचे फेंकने की जरूरत नहीं है. उन्हें साफ करके सुरक्षित रखा जा सकता है.
कौन सी दिशा शुभ
वास्तु के हिसाब से दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा को पितरों से जुड़े विषयों के लिए शुभ माना जाता है. पितृ पक्ष से पहले इन दिशाओं की विशेष सफाई की जा सकती है. यदि यहां पुराने डिब्बे, टूटा फर्नीचर या लंबे समय से बेकार पड़ा सामान है तो उसे व्यवस्थित करें. इसके लिए किसी महंगे उपाय की आवश्यकता नहीं है, घर में मौजूद अनुपयोगी सामान हटाना ही पर्याप्त माना जाता है. पितृ पक्ष पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का मौका माना जाता है. ऐसे में घर में लगी दादा-दादी, नाना-नानी या दूसरे दिवंगत परिजनों की तस्वीरों को साफ कर व्यवस्थित करें. पुरानी तस्वीरें खराब हो रही हों तो उन्हें डिजिटल रूप में भी सुरक्षित किया जा सकता है. इस दौरान परिवार के बच्चों को पूर्वजों की कहानियां बताना भी पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकता है.
कोई भी कोना काफी
घर में लंबे समय से खराब पड़ी घड़ी, टूटी कुर्सी, खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान या टूटे फोटो फ्रेम जैसी वस्तुओं को लेकर निर्णय लें. उपयोगी सामान है तो उसकी मरम्मत कराएं और अगर जरूरत नहीं है तो उसे हटाया जा सकता है. किसी पूर्वज से जुड़ी वस्तु भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है तो उसे साफ करके सुरक्षित स्थान पर रखना बेहतर है. पितृ पक्ष के दौरान प्रार्थना, पूजा, तर्पण या पूर्वजों के स्मरण के लिए घर में एक साफ और शांत स्थान रखा जा सकता है. इसके लिए अलग से बड़ा स्थान बनाना जरूरी नहीं है. घर का कोई स्वच्छ कोना भी पर्याप्त हो सकता है. परिवार की परंपरा के अनुसार यहां धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं और कुछ समय शांत बैठकर पूर्वजों का स्मरण किया जा सकता है.