देश में लाखों लोग छोटे स्तर पर कारोबार करते हैं. कोई सड़क किनारे चाय बेचता है, कोई सब्जी की दुकान चलाता है तो कोई गांव या मोहल्ले में किराना स्टोर से अपनी रोजी-रोटी कमाता है. ऐसे कारोबारियों के बीच अक्सर यह सवाल रहता है कि क्या उन्हें भी GST नंबर लेना जरूरी है? कई छोटे दुकानदार यह मान लेते हैं कि कारोबार शुरू करते ही GST रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है, जबकि ऐसा हर मामले में नहीं है.
GST का नियम कारोबार के सालाना टर्नओवर और व्यापार के टाइप पर निर्भर करता है. हालांकि, कुछ परिस्थितियां ऐसी भी हैं, जिनमें कम कारोबार होने पर भी GST रजिस्ट्रेशन जरूरी हो सकता है. इसलिए छोटे व्यापारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि वे किस स्थिति में GST के दायरे में आते हैं और रजिस्ट्रेशन के बाद उन्हें क्या करना होता है.
कितने टर्नओवर तक नहीं लेना पड़ता GST नंबर?
अगर कोई कारोबारी मुख्य रूप से सामान बेचता है और उसका सालाना टर्नओवर तय लीमिट से कम है, तो आम तौर पर GST रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होती. ज्यादातर राज्यों में वस्तुओं के कारोबार के लिए यह सीमा 40 लाख रुपये सालाना है. कुछ स्पेशल कैटेगरी वाले राज्यों में यह लीमिट 20 लाख रुपये है.
वहीं, सर्विसेस देने वाले कारोबारियों के लिए सामान्य सीमा 20 लाख रुपये और कुछ राज्यों में 10 लाख रुपये है. इसका मतलब है कि कम टर्नओवर वाली छोटी किराना दुकान, सब्जी की दुकान या चाय की दुकान चलाने वाले व्यक्ति को सामान्य परिस्थितियों में सिर्फ छोटा कारोबार करने की वजह से GST नंबर लेने की जरूरत नहीं होती.
रेहड़ी-पटरी के लिए नियम
स्ट्रीट वेंडर और रेहड़ी-पटरी पर सामान बेचने वाले छोटे कारोबारी भी आम तौर पर टर्नओवर की सीमा के आधार पर GST नियमों के दायरे में आते हैं. यदि उनका कारोबार निर्धारित सीमा से नीचे है और उन पर कोई विशेष प्रावधान लागू नहीं होता, तो GST रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं होता.
हालांकि, कारोबार बढ़ने पर स्थिति बदल सकती है. इसलिए रोज की बिक्री और सालाना कमाई का रिकॉर्ड रखना जरूरी है. इससे कारोबारी को यह पता चलता रहेगा कि उसका टर्नओवर GST की सीमा के करीब तो नहीं पहुंच रहा.
कम कारोबार में भी कब लेना पड़ सकता है GST रजिस्ट्रेशन?
सिर्फ टर्नओवर कम होना ही GST से बचने की गारंटी नहीं है. कुछ खास परिस्थितियों में छोटे कारोबारी को भी रजिस्ट्रेशन की जरूरत पड़ सकती है. उदाहरण के तौर पर कुछ प्रकार की अंतरराज्यीय सप्लाई, ई-कॉमर्स के जरिए बिक्री या रिवर्स चार्ज से जुड़े लेन-देन में अलग नियम लागू हो सकते हैं.
इसलिए अगर कोई छोटा दुकानदार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामान बेचना शुरू करता है या दूसरे राज्य में कारोबार करता है, तो उसे पहले यह देखना चाहिए कि उसके मामले में अनिवार्य रजिस्ट्रेशन का प्रावधान लागू है या नहीं.
GST नंबर लेने के बाद क्या करना होगा?
GST रजिस्ट्रेशन कराने के बाद कारोबारी की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती. उसे अपने कारोबार के हिसाब से GST रिटर्न और अन्य जरूरी जानकारी समय पर जमा करनी पड़ सकती है. कारोबार में उस अवधि के दौरान बिक्री न हुई हो, तब भी लागू रिटर्न फाइलिंग नियमों का पालन करना पड़ सकता है.
छोटे कारोबारियों के लिए कंपोजिशन स्कीम भी एक ऑप्शन है, बशर्ते वे इसके लिए पात्र हों. इस व्यवस्था में टैक्स और अनुपालन का प्रोसेस सामान्य टैक्सपेयर्स की तुलना में सरल हो सकती है. हालांकि, इसमें भी कुछ शर्तें और सीमाएं होती हैं. ऐसे में छोटे दुकानदारों को अपनी बिक्री, खरीद और टर्नओवर का सही रिकॉर्ड रखना चाहिए. कारोबार बढ़ने, दूसरे राज्यों में बिक्री शुरू करने या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ने पर GST के नियमों की दोबारा चेक करना बेहतर है.