यूपी-बिहार समेत 4 राज्यों के पुरुषों की No Entry! कंपनी के CEO के फैसले से सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

यूपी-बिहार समेत 4 राज्यों के पुरुषों की No Entry! कंपनी के CEO के फैसले से सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस


Last Updated:

बेंगलुरु की एक कंपनी के CEO कार्तिक एसजी ने उत्तर प्रदेश चार राज्यों के पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी न देने का ऐलान किया है. CEO ने इस फैसले की वजह एक पूर्व कर्मचारी पर महिला स्टाफ के साथ बदसलूकी और जबरदस्ती की कोशिश के आरोपों को बताया. उनका कहना है कि कंपनी बच्चों के साथ भी काम करती है, इसलिए कर्मचारियों की सुरक्षा सबसे जरूरी है. इस फैसले ने सोशल मीडिया पर हायरिंग, क्षेत्रीय पहचान और वर्कप्लेस सेफ्टी को लेकर नई बहस छेड़ दी है. ये पूरा मामला क्या है और सीआईओ ने अपनी पोस्ट में क्या बताया है, इसके बारे में बताते हैं.

Zoom

पोस्ट की वजह से सोशल मीडिया पर हायरिंग, क्षेत्रीय पहचान और वर्कप्लेस सेफ्टी को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

जरा सोचिए, आप किसी कंपनी में नौकरी के लिए पहुंचते हैं, इंटरव्यू भी देते हैं, लेकिन तभी पता चलता है कि आपके राज्य की वजह से आपको नौकरी ही नहीं मिलेगी. सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन बेंगलुरु की एक कंपनी की हायरिंग पॉलिसी को लेकर ऐसा ही मामला सामने आया है. कंपनी ने कुछ राज्यों के पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी नहीं देने का ऐलान किया है.

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है. कंपनी के CEO ने इस पॉलिसी के पीछे एक पूर्व कर्मचारी के साथ बदसलूकी करने की वजह बताई है. A1 Sports World के फाउंडर कार्तिक एसजी ने खुद 22 सितंबर को X पर पोस्ट कर कहा कि उनकी कंपनी अब उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी नहीं देगी. उनके इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर हायरिंग, क्षेत्रीय पहचान और वर्कप्लेस सेफ्टी को लेकर बहस शुरू हो गई.

4 राज्यों के पुरुष उम्मीदवारों पर रोक का ऐलान

कार्तिक ने अपनी पोस्ट में चार राज्यों के नाम साफ तौर पर बताए. इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश शामिल हैं. कार्तिक ने अपने फैसले की वजह एक पूर्व कर्मचारी से जुड़ी कथित घटना को बताया है. इस कंपनी में 32 कर्मचारी हैं, जिनमें 14 महिलाएं हैं. कार्तिक के मुताबिक, उनकी कंपनी बच्चों से जुड़े स्पोर्ट्स प्रोग्राम भी चलाती है, इसलिए कर्मचारियों की सुरक्षा उनके लिए अहम है. यह पोस्ट सामने आने के बाद कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि किसी उम्मीदवार के राज्य के आधार पर भर्ती का फैसला करना कितना उचित है.

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे क्षेत्रीय भेदभाव से जोड़कर आलोचना की. वहीं कुछ लोगों ने कंपनी की सुरक्षा संबंधी चिंता पर बात की. इस तरह बहस सिर्फ एक कंपनी की भर्ती नीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सवाल भी उठा कि किसी कर्मचारी के कथित व्यवहार के बाद भर्ती प्रक्रिया में किस तरह बदलाव किए जाने चाहिए.

पूर्व कर्मचारी से जुड़ी घटना क्या थी?



Source link