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Medical College Solar Model: मेडिकल कॉलेज में सालभर मिलने वाली धूप अब सिर्फ गर्मी नहीं दे रही, बल्कि बिजली बनाने का काम भी कर रही है. सोलर सिस्टम के जरिए कॉलेज अपने बिजली खर्च में हर साल लाखों रुपए की बचत कर रहा है और साथ ही ग्रीन एनर्जी की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है.
Medical College Solar Model: खंडवा के नंदकुमार सिंह चौहान मेडिकल कॉलेज में हर महीने बिजली की खपत काफी ज्यादा होती है. बिजली के इस खर्च को कम करने के लिए कॉलेज प्रबंधन ने सौर ऊर्जा का सहारा लिया है. कॉलेज की छतों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिनसे बिजली तैयार की जा रही है. इस व्यवस्था से कॉलेज को हर साल करीब 17 से 18 लाख रुपए की बचत हो रही है. खास बात यह है कि इस सोलर सिस्टम को लगाने में कॉलेज या शासन की ओर से सीधे खर्च नहीं किया गया. टेंडर प्रक्रिया के तहत कंपनी ने सिस्टम लगाया है और करीब 25 साल की योजना के तहत इसका मेंटेनेंस भी कंपनी की ओर से किया जाएगा.
कॉलेज की छत पर लगा 240 किलोवॉट का सिस्टम
मेडिकल कॉलेज की अलग-अलग बिल्डिंग की छतों पर सोलर सिस्टम लगाया गया है. कॉलेज के डीन डॉ. संजय दादू ने Local18 से बातचीत में बताया कि शासन की यह योजना शासकीय भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा सिस्टम लगाने से जुड़ी है. कॉलेज में कुल करीब 240 किलोवॉट क्षमता का सिस्टम लगा है. इसमें एकेडमिक बिल्डिंग पर करीब 180 किलोवॉट और दूसरी बिल्डिंग पर करीब 80 किलोवॉट क्षमता का सिस्टम लगाए जाने की जानकारी दी गई है.यह ऑन-ग्रिड सिस्टम है. यानी बिजली व्यवस्था ग्रिड से जुड़ी रहती है और इसके लिए बैटरी स्टोरेज की जरूरत नहीं पड़ती. इससे बैटरी के रखरखाव का अतिरिक्त खर्च भी नहीं होता.
बिना बड़ा खर्च किए बिजली के बिल में बचत
डीन डॉ. संजय दादू के मुताबिक इस योजना के तहत सिस्टम लगाने और उसके रखरखाव का खर्च संबंधित कंपनी की ओर से वहन किया जा रहा है. कॉलेज को अपनी छत का उपयोग सोलर सिस्टम के लिए उपलब्ध कराना होता है. इससे कॉलेज की बिजली जरूरत में सौर ऊर्जा का योगदान बढ़ा है और बिजली के खर्च में भी बचत हो रही है. डीन के अनुसार कॉलेज को सालाना करीब 17 से 18 लाख रुपए तक की बचत हो रही है. यानी जिस धूप को हम रोजमर्रा में सिर्फ गर्मी के रूप में देखते हैं. उसी धूप का इस्तेमाल मेडिकल कॉलेज बिजली बनाने के लिए कर रहा है.
बिजली के साथ पर्यावरण को भी फायदा
सौर ऊर्जा से तैयार होने वाली बिजली का इस्तेमाल बढ़ने से पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है. साथ ही ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिलता है और बिजली उत्पादन से जुड़े कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में भी यह पहल उपयोगी हो सकती है. कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक शासकीय भवनों की बड़ी छतों का इस्तेमाल इस तरह किया जाए तो बिजली के खर्च में बचत के साथ-साथ सौर ऊर्जा को भी बढ़ावा मिल सकता है.
दूसरे कॉलेज भी अपना सकते हैं यह मॉडल
मेडिकल कॉलेज में अपनाई गई यह व्यवस्था दूसरे सरकारी कॉलेजों और संस्थानों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है. बड़े सरकारी भवनों की खाली छतों का इस्तेमाल सौर ऊर्जा के लिए किया जाए तो संस्थानों के बिजली खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है. खंडवा के मेडिकल कॉलेज में सालभर मिलने वाली धूप अब सिर्फ गर्मी नहीं दे रही, बल्कि बिजली बनाने का काम भी कर रही है. सोलर सिस्टम के जरिए कॉलेज अपने बिजली खर्च में हर साल लाखों रुपए की बचत कर रहा है और साथ ही ग्रीन एनर्जी की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है.