सेव के एक स्टॉल से होटल तक! 35 साल में 65 वर्षीय शंकर भाई ने ऐसे बदली अपनी तकदीर

सेव के एक स्टॉल से होटल तक! 35 साल में 65 वर्षीय शंकर भाई ने ऐसे बदली अपनी तकदीर


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Shankar Bhai Success Story: बुरहानपुर में एक 65 वर्षीय बुजुर्ग ने 35 साल पहले सेव के स्टॉल से अपना सफर शुरू किया था और आज वे एक सफल होटल का संचालन कर रहे हैं. उनकी कहानी बताती है कि मेहनत और हिम्मत से छोटे काम को भी सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है.

Shankar Bhai Success Story: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने जीवन में संघर्ष करते हुए खुद का व्यवसाय खड़ा किया और आज दूसरों के लिए रोजगार का जरिया भी बने हुए हैं. ऐसी ही कहानी 65 वर्षीय एक बुजुर्ग की है जिन्होंने करीब 35 साल पहले सेव के छोटे से स्टॉल से अपने सफर की शुरुआत की थी. उस समय उनके सामने आर्थिक परेशानियां और कई चुनौतियां थीं लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी. यह कहानी बताती है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों यदि इंसान मेहनत और हिम्मत के साथ आगे बढ़ता रहे तो अपने छोटे से काम को भी एक सफल व्यवसाय में बदल सकता हैं.

दुकान संचालक ने दी जानकारी
लोकल 18 की टीम को दुकान संचालक शंकर भाई ने जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती दौर में सेव का स्टॉल लगाकर उन्होंने अपने परिवार का गुजर-बसर किया. कम आमदनी के बावजूद उन्होंने मेहनत जारी रखी और धीरे-धीरे अपने काम को आगे बढ़ाने के बारे में सोचा.उनका मानना था कि मेहनत और ईमानदारी से किया गया काम कभी छोटा नहीं होता. इसी सोच के साथ उन्होंने अपने व्यवसाय को धीरे-धीरे विस्तार दिया. लगातार मेहनत और ग्राहकों के भरोसे के चलते उनका काम आगे बढ़ता गया. आज करीब 35 साल बाद वह बुरहानपुर के रेणुका माता मंदिर के पास होटल का संचालन कर रहे हैं. उनकी होटल में सुबह से ही ग्राहकों की आवाजाही शुरू हो जाती है. यहां मिलने वाला स्वादिष्ट नाश्ता लोगों को काफी पसंद आता है.

दुकान की फेमस है कड़ी
खास तौर पर उनकी होटल की कढ़ी ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय है. स्वाद पसंद आने के कारण आसपास के लोग ही नहीं बल्कि मंदिर आने वाले श्रद्धालु भी यहां नाश्ता करने पहुंचते हैं. कई ग्राहक लंबे समय से उनके यहां आते रहे हैं और उनके हाथों के स्वाद को पसंद करते हैं. आज 65 वर्ष की उम्र में भी वह अपने काम में सक्रिय हैं. उनकी मेहनत का एक और पहलू यह है कि उनके होटल के माध्यम से तीन लोगों को रोजगार भी मिल रहा है. जिस सफर की शुरुआत 35 साल पहले एक छोटे से सेव के स्टॉल से हुई थी वह आज एक होटल के संचालन तक पहुंच चुका है.



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