मूंगफली की जड़ें खेत में छोड़ जाती हैं नाइट्रोजन, अगली फसल को मिलता सीधा फायदा; बस पहले जान लें यह बात

मूंगफली की जड़ें खेत में छोड़ जाती हैं नाइट्रोजन, अगली फसल को मिलता सीधा फायदा; बस पहले जान लें यह बात


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खेत खाली होते ही करें यह काम, शिवपुरी के किसान कमा सकते हैं दोगुना फायदा

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Groundnut cultivation: कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) शिवपुरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पुष्पेंद्र सिंह के अनुसार, मूंगफली के बाद गेहूं की खेती शिवपुरी और चंबल क्षेत्र के किसानों के लिए सबसे फायदेमंद विकल्प है, जिससे कम लागत में बेहतर उत्पादन और मुनाफा मिल सकता है.

Groundnut cultivation: अगर आप शिवपुरी या चंबल क्षेत्र में मूंगफली की खेती करते हैं, तो फसल की खुदाई के बाद सही रबी फसल का चयन आपकी आय बढ़ा सकता है. कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) शिवपुरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पुष्पेंद्र सिंह के अनुसार, मूंगफली के बाद गेहूं किसानों के लिए सबसे लाभकारी विकल्प है, क्योंकि इससे कम लागत में बेहतर उत्पादन और मुनाफा मिल सकता है.

क्यों फायदेमंद है मूंगफली के बाद गेहूं?
डॉ. सिंह बताते हैं कि मूंगफली लगभग 100-120 दिन में तैयार होती है और शिवपुरी में अधिकांश खेत अक्टूबर के अंत तक खाली हो जाते हैं. चूंकि मूंगफली दलहनी कुल की फसल है. इसकी जड़ों में बनने वाली गांठें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करती हैं. इसका लाभ अगली गैर-दलहनी फसल, खासकर गेहूं और जौ को मिलता है.

कम खाद, अच्छा उत्पादन
वैज्ञानिक के मुताबिक, मूंगफली के बाद गेहूं लगाने से नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ जाती है, जिससे केमिकल्स फर्टिलाइजर्स की जरूरत कम पड़ती है. शिवपुरी क्षेत्र में गेहूं का उत्पादन सामान्यतः 45-50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकता है. इसलिए किसान कम लागत में बेहतर पैदावार और अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं.

किसान क्या रखें ध्यान?
मूंगफली की खुदाई के तुरंत बाद खेत तैयार करें.

सिंचाई की उपलब्धता के अनुसार गेहूं या जौ का चयन करें.

फसल चक्र अपनाने से मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है.

डॉ. पुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि मूंगफली के बाद गेहूं की खेती वैज्ञानिक दृष्टि से सबसे उपयुक्त फसल चक्रों में से एक मानी जाती है.



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