कानपुरः घर में छोटे बच्चों को जिस तरह बाथ टब में बैठाकर नहलाया जाता है और वे पानी में उछल-कूद करते हुए खूब मस्ती करते हैं, ठीक वैसा ही नजारा इन दिनों कानपुर प्राणि उद्यान के अस्पताल एरिया में देखने को मिल रहा है. फर्क सिर्फ इतना है कि यहां बाथ टब में बच्चे नहीं, बल्कि जू के इतिहास में पहली बार जन्मे नौ दुर्लभ गैंगेटिक घड़ियालों के शावक अठखेलियां कर रहे हैं. करीब तीन महीने तक मां के साथ रहने के बाद अब इन्हें बाड़े से निकालकर बाथ टब में रखा गया है. यहां इनकी खास देखभाल हो रही है और डॉक्टर हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं.
जू में पहली बार जन्में घड़ियाल
कानपुर जू के 52 साल के इतिहास में पहली बार गैंगेटिक घड़ियालों के शावकों का जन्म हुआ है. इसलिए जू प्रशासन ने इनकी परवरिश का तरीका भी खास रखा है. अस्पताल एरिया में बनाए गए सुरक्षित माहौल में ये शावक दिन में धूप सेंकते हैं, पानी में तैरते हैं और खूब चहलकदमी करते हैं. फिलहाल अगले चार से पांच महीने तक इन्हें यहीं रखने की तैयारी है. इसके बाद जब ये मजबूत हो जाएंगे तो इनके लिए अलग घर तैयार किया जाएगा.
मां ने बालू में छिपाए थे अंडे, 60 से 70 दिन बाद निकले शावक
जू के डॉक्टर नासिर के मुताबिक, करीब तीन महीने पहले बाड़े की निगरानी के दौरान मादा घड़ियाल ने बालू का एक बड़ा ढेर बनाया था. इससे अंदाजा हो गया था कि वह अंडे देने वाली है. घड़ियाल मादा बालू में अंडों को सुरक्षित रखती है. इसके बाद करीब 60 से 70 दिन तक अंडों से शावक निकलने की प्रक्रिया चलती है. जब नौ शावक बाहर आए तो उन्हें कुछ समय तक मां के साथ ही रखा गया. हालांकि, छोटे होने के कारण उन पर चील, कौवे और बाज जैसे पक्षियों का खतरा बना हुआ था. ऐसे में उनकी सुरक्षा और बेहतर विकास के लिए उन्हें अस्पताल एरिया में शिफ्ट करने का फैसला किया गया.
20 दिन में दिखी ग्रोथ, मांगुर और दूसरी मछलियां बनीं पसंदीदा
बाथ टब में आने के बाद इन नन्हे घड़ियालों का अंदाज ही बदल गया है. डॉक्टर नासिर के मुताबिक, मां के साथ रहते समय ये काफी शांत रहते थे, लेकिन यहां आते ही इनकी गतिविधियां बढ़ गई हैं. कोई पूरे टब में चक्कर लगाता है तो कोई बार-बार टब से बाहर निकलने की कोशिश करता दिखाई देता है. इनके खाने में मांगुर समेत दूसरी मछलियां दी जा रही हैं, जो इन्हें खूब पसंद आ रही हैं. धूप सेंकने के साथ पानी में तैरने का मौका भी दिया जाता है. करीब 20 दिनों में ही इनके शरीर में अच्छी ग्रोथ दिखाई देने लगी है. वजन और लंबाई दोनों में बढ़ोतरी देखी गई है. इसी को देखते हुए इन्हें कुछ और महीनों तक इसी सुरक्षित माहौल में रखने का फैसला किया गया है.
मगरमच्छ जैसे दिखते हैं, लेकिन लंबी थूथन से होती है पहचान
जू के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर फिरोज खान के मुताबिक, गैंगेटिक घड़ियाल देखने में मगरमच्छ जैसे जरूर लगते हैं, लेकिन इनकी सबसे बड़ी पहचान इनकी लंबी और पतली थूथन है. नर घड़ियाल की नाक पर बड़े होने के बाद घड़े जैसी खास आकृति भी बनती है. इन्हें पानी में रहना और मछलियां खाना पसंद होता है. पानी से बाहर निकलने के बाद ये किनारे पर धूप सेंकते हैं. इनकी औसत उम्र करीब 30 साल तक होती है. नर घड़ियाल 16 से 20 फीट और मादा करीब 11.5 से 15 फीट तक लंबी हो सकती है. इनके दांत बेहद नुकीले होते हैं और पानी में मछलियों को पकड़ने में इनका इस्तेमाल करते हैं.
जू निदेशक कन्हैया पटेल ने बताया कि जू में 100 से अधिक प्रजातियों के एक हजार से ज्यादा वन्यजीव हैं, लेकिन गैंगेटिक घड़ियाल का यहां पहली बार जन्म होना खास उपलब्धि है. इन नौ शावकों की सुरक्षा और बेहतर विकास के लिए हर संभव इंतजाम किए जा रहे हैं. जू प्रशासन को उम्मीद है कि अगर ये शावक सुरक्षित तरीके से बड़े होते हैं तो आगे चलकर इनके संरक्षण में भी मदद मिलेगी.
आंकड़ों पर नजर
उत्तर प्रदेश में गैंगेटिक घड़ियाल: 2000 से अधिक
भारत में गैंगेटिक घड़ियाल: 3000 से अधिक
कानपुर जू में पहली बार जन्म: 9 शावक
अस्पताल एरिया में देखभाल: अगले 4 से 5 महीने तक