शिमला. हिमाचल प्रदेश में अब कूड़ा प्रबंधन को लेकर नियमों का पालन नहीं करने वालों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है. सॉलिड वेस्ट मैनेजमैंट रुल्स-2026 के तहत हर कचरा पैदा करने वाले व्यक्ति, संस्थान और प्रतिष्ठान के लिए कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटना अनिवार्य किया गया है. नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई के साथ बिजली और पानी का कनेक्शन काटने तक का प्रावधान किया गया है.
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव सुशील कुमार सिंगला ने बुधवार को शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि कूड़ा प्रबंधन अब केवल सफाई कर्मचारियों या स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है.
4 हिस्सों में अलग करना होगा कचरा
नए नियमों के तहत कचरे को चार श्रेणियों में अलग करना होगा. इसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी वेस्ट, डायपर, सैनिटरी पैड आदि, स्पेशल केयर वेस्ट- CFL, एक्सपायरी दवाएं, सिरिंज, बैटरी आदि शामिल है. कचरे को अलग-अलग करने की जिम्मेदारी कचरा पैदा करने वाले व्यक्ति या संस्था की होगी. नियमों के तहत खुले में कूड़ा जलाने, दबाने या नालियों और नदियों में फेंकने पर प्रतिबंध लगाया गया है. सरकार का फोकस कचरे को स्रोत पर ही अलग करने और उसके वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण पर है.
इस बीच बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वाले संस्थानों और प्रतिष्ठानों यानी बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान की जाएगी. इसके लिए 6 सप्ताह की समयसीमा तय किए जाने की बात कही गई है. नियमों का पालन नहीं करने वालों खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें बिजली और पानी के कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई भी शामिल है.
स्कूली बच्चे बनेंगे अहम कड़ी
कचरा प्रबंधन को घर-घर तक पहुंचाने के लिए स्कूली विद्यार्थियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा. उन्हें हाउसोल्ड सर्वाइवर्स की भूमिका दी जाएगी, ताकि वे अपने घरों में कचरे को 100 प्रतिशत अलग करवाने के लिए जागरूकता पैदा कर सकें. साथ ही नदियों और जलस्रोतों को कचरे से बचाने के लिए नालों पर जाली और ट्रैश बैरियर लगाने की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि कूड़ा नालियों के जरिए नदियों तक न पहुंचे.
हिमाचल में पहले ही गठित हो चुकी हैं कमेटियां
नए नियमों को लागू करने के लिए हिमाचल सरकार ने 9 अप्रैल 2026 को राज्य और जिला स्तर की कमेटियां गठित कर दी थीं. इन कमेटियों के माध्यम से नियमों के पालन और निगरानी की व्यवस्था की जाएगी. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, स्वच्छ भारत मिशन के सहयोग से नए नियमों को लेकर जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. सुशील कुमार सिंगला ने बताया कि 18 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कचरा प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिए थे. इसके बाद पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड और सुप्रीम कोर्ट एम्पावर्ड मॉनिटरिंग कमेटी की ओर से भी निर्देश जारी किए गए.
उन्होंने बताया कि नियमों को एक अप्रैल 2026 से लागू हैं और इनके तहत शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सरकारी संस्थानों को भी नियमों के दायरे में रखा गया है. सिंगला ने कहा कि कूड़ा प्रबंधन केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है. हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और कचरे को स्रोत पर ही अलग करना होगा. नए नियमों के तहत नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.