हर माह 2 लाख पेंशन, जब मन होता निकल लेते विदेश, 90 की उम्र में भी मजे में कट रही बिहार के BN मिश्रा की जिंदगी

हर माह 2 लाख पेंशन, जब मन होता निकल लेते विदेश, 90 की उम्र में भी मजे में कट रही बिहार के BN मिश्रा की जिंदगी


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हर माह 2 लाख पेंशन, जब मन होता निकल लेते विदेश, 90 की उम्र में भी कर रहे मजे

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जिंदगी हो तो ऐसीः बिहार के 90 वर्षीय प्रो. बीएन मिश्रा 1996 में रिटायर हुए थे. उन्हें हर महीने 2 लाख रुपये पेंशन मिलती है. फिलहाल दिल्ली में रहते हैं और वे पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं. खास बात यह है कि आज भी अपने हाथ पैरों पर फिट हैं. यहां तक कि जब मन होता है विदेश यात्रा पर निकल जाते हैं. उन्होंने रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविताओं की 18 किताबों का अनुवाद भी किया है.

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नई दिल्लीः दिल्ली के मॉल अपार्टमेंट में एक ऐसे शख्स रहते हैं जिनको सरकारी नौकरी से रिटायरमेंट हुए 30 साल हो चुके हैं. उम्र 90 साल है. फिर भी अपने हाथ पैरों पर फिट हैं. जो पेंशन मिलती है उससे अपनी जिंदगी मस्त होकर जी रहे हैं. इनके तीन बच्चे हैं, तीनों विदेश में अपनी नौकरी और जिंदगी में व्यस्त हैं. 90 साल की उम्र में भी यह शख्स अपने बच्चों पर बिल्कुल भी निर्भर नहीं है. जो पेंशन मिलती है उसी से अपने शौक पूरे कर रहे हैं और बीते 30 सालों से पेंशन के दम पर ही अपनी जिंदगी जी रहे हैं. यह कहानी है नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के निदेशक पद से 1996 में रिटायर प्रोफेसर बीएन मिश्रा की. इन साहब ने उम्र को कभी अपनी जिंदगी की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगाने दिया. आज भी देश-विदेश की यात्राएं करते हैं, नई जगहों को देखते हैं, अनुभवों को शब्दों में पिरोते हैं और मशहूर लेखक रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविताओं को इंग्लिश में अनुवाद करते हैं.

रिटायरमेंट से पहले बच्चों को बनाया आत्मनिर्भर
मूल रूप से बिहार में जन्मे प्रो. बीएन मिश्रा 1968 से दिल्ली में रह रहे हैं. खास बातचीत में बताया कि वह इंजीनियरिंग के तमाम सरकारी कॉलेजों में विभिन्न पदों पर रहे हैं. और तो और इंजीनियरिंग और शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने काफी काम किया. सरकार के साथ मिलकर कई संस्थाओं को नया रूप दिया लेकिन जब 1996 में उनका रिटायरमेंट हुआ उससे पहले ही उन्होंने अपने तीनों बच्चों को आत्मनिर्भर बना दिया था. वह नहीं चाहते थे कि रिटायरमेंट के बाद किसी भी तरह की कोई दिक्कत बच्चों को आए. उन्होंने बताया कि उनका बड़ा बेटा जिसका नाम अनिमेष है वह इन एनवीडिया जो बहुत बड़ी कंपनी है उसमें चिप बनाने का काम करते हैं और इस समय यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में है. जबकि दूसरा बेटा लंदन में है और एक बेटी है जो सिडनी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्र की निदेशक है. उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग इस कदर की थी कि रिटायरमेंट के आज 30 साल हो गए हैं फिर भी उनके निर्भरता अपने बच्चों पर नहीं है. बच्चे अपनी जिंदगी जी रहे हैं और बहुत अच्छा कमाते हैं.

घूम चुके हैं 6 से ज्यादा देश
बीएन मिश्रा ने बताया कि रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी असल में जीना शुरु की, क्योंकि इंजीनियरिंग और साइंस के क्षेत्र में तो उन्होंने बहुत काम किया. रिटायरमेंट के बाद वह आराम चाहते थे. इसीलिए रिटायरमेंट के बाद उन्होंने देश दुनिया घूमना शुरू किया. अब तक वह सिंगापुर, सिडनी, लंदन, अमेरिका, चीन के साथ ही सैन फ्रांसिस्को और अफ्रीका के साथ तमाम देश और विदेश घूम चुके हैं. उन्होंने बताया कि साल 2020 के बाद उन्होंने विदेश जाना थोड़ा कम कर दिया है, क्योंकि अब उम्र 90 साल की हो गई है और यात्रा के दौरान उन्हें थोड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. अब बच्चे उनके पास छुट्टियों में आ जाते हैं. यहीं रहते हैं और फिलहाल जो दो लाख की पेंशन आती है उसे उन्होंने एक मेड लगा रखी है जो खाना बनाती है और घर की साफ सफाई करती है. एक ड्राइवर है जो उनकी गाड़ी चलाता है. इसके अलावा दिनभर दोस्त यार जो उनके वक्त के हैं वो आते हैं, मिलते हैं उनके साथ वह बातें करते हैं.

18 किताबों का किया अनुवाद
प्रो. बीएन मिश्रा ने कहा कि लोग रिटायरमेंट की चिंता करते हैं, लेकिन अगर सच में आप फाइनेंशियल प्लानिंग करना चाहते हैं तो जरूरी है कि अपने रिटायरमेंट से पहले सारे बच्चों को आत्मनिर्भर बना दें. उसके बाद आपको कोई चिंता नहीं रहेगी. आज उनके सारे बच्चे आत्मनिर्भर हैं. अच्छा कमा रहे हैं और सब की शादी भी हो चुकी है. आज रिटायरमेंट के 30 साल में भी उन्हें कभी अपने बच्चों की चिंता नहीं हुई. अपने शौक के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि वह रामधारी सिंह दिनकर जो मशहूर लेखक हैं उनकी किताबें तब पढ़ना शुरू किए थे जब उनके पैर में चोट लग गई थी और उन्हें बेड रेस्ट करना था. उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की हिंदी उन्हें समझने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी तो उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की जो कविताएं हैं उनका हिंदी में अनुवाद किया. अब तक 18 किताबों का अनुवाद वह कर चुके और 18 किताब एक दिन में ही रिलीज भी कर चुके हैं और अभी भी कई किताबों को लिख रहे हैं.



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