वैज्ञानिकों के भी रोंगटे खड़े हो गए, पहली बार पकड़ा पराई दुनिया का रेडियो संदेश; 64 प्रकाश वर्ष दूर से आया

वैज्ञानिकों के भी रोंगटे खड़े हो गए, पहली बार पकड़ा पराई दुनिया का रेडियो संदेश; 64 प्रकाश वर्ष दूर से आया


नई दिल्ली: पृथ्वी से लगभग 64 प्रकाश वर्ष दूर मौजूद एक विशालकाय गैसीय ग्रह ‘बीटा पिक्टोरिस बी’ से रेडियो तरंगे आ रही हैं. अब तक वैज्ञानिक ऐसे किसी सिग्नल के स्रोत का सटीक पता नहीं लगा पाते थे, क्योंकि वे तारे और ग्रह के बीच फर्क नहीं कर पाते थे. हालांकि यह किसी एलियन सभ्यता का संदेश नहीं है, बल्कि उस ग्रह के बेहद ताकतवर मैग्नेटिक फील्ड और वायुमंडल में बनने वाले ऑरोरा का नतीजा है. साउथ अफ्रीका के मीरकैट रेडियो टेलीस्कोप की मदद से यह ऐतिहासिक खोज की गई है.

क्या किसी एलियन ने भेजा है यह रेडियो सिग्नल?

इस अनूठे सिग्नल को लेकर लोगों के मन में सबसे पहला सवाल एलियंस से जुड़ा उठता है. हार्वर्ड एंड स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स और यूनिवर्सिटी ऑफ ओरेगन के रिसर्चर्स ने यह साफ कर दिया है कि यह किसी एलियन का संदेश बिल्कुल नहीं है.

यह आवाज दरअसल ग्रह पर बनने वाले शानदार ऑरोरा की है. जब अंतरिक्ष के हाई एनर्जी पार्टिकल्स किसी ग्रह के मैग्नेटिक फील्ड से टकराते हैं, तो वायुमंडल में रोशनी और रेडियो तरंगों का भयानक विस्फोट होता है. हमारी पृथ्वी पर भी ऐसा ही नजारा उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर नॉर्दर्न लाइट्स के रूप में दिखता है.

64 प्रकाश वर्ष दूर मौजूद तारे और ग्रह के बीच का फर्क कैसे खुला?

अब तक के स्पेस मिशन में जब भी रेडियो तरंगे मिलती थीं, वैज्ञानिक यह तय नहीं कर पाते थे कि सिग्नल तारे से आ रहा है या ग्रह से. इस उलझन को सुलझाने के लिए शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष में अरबों किलोमीटर दूर मौजूद क्वासर्स का सहारा लिया.

वैज्ञानिकों ने इन बेहद चमकदार क्वासर्स को फिक्स्ड मार्कर मानकर एक मैप तैयार किया. जब मीरकैट टेलीस्कोप से मिले रेडियो डेटा को उस मैप पर बिठाया गया, तो सिग्नल सीधे तौर पर ग्रह ‘बीटा पिक्टोरिस बी’ की स्थिति से मेल खा गया. इससे यह साबित हो गया कि सिग्नल तारे से नहीं, बल्कि सीधे ग्रह से ही निकल रहा था.

बृहस्पति से 10 गुना बड़ा है यह ग्रह

बीटा पिक्टोरिस बी कोई साधारण ग्रह नहीं, बल्कि हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति से भी 10 गुना ज्यादा भारी है. यह ग्रह अपने केंद्र पर इतनी तेजी से चक्कर लगाता है कि इसका एक दिन महज 8 से 9 घंटे में ही खत्म हो जाता है.

रिसर्चर्स के एनालिसिस से सामने आया है कि इस ग्रह का मैग्नेटिक फील्ड 1250 गॉस से भी ज्यादा मजबूत है. यह ताकतवर मैग्नेटिक फील्ड पृथ्वी की चुंबकीय क्षमता से हजारों गुना ज्यादा है. किसी बाहरी ग्रह के मैग्नेटिक फील्ड की यह पहली सीधी और सटीक माप मानी जा रही है.

इस खोज ने दूसरे सौरमंडलों के ग्रहों को समझने का एक नया दरवाजा खोल दिया है. किसी ग्रह का मैग्नेटिक फील्ड ही वहां के वातावरण और संभावित जीवन को खतरनाक रेडिएशन से बचाने का काम करता है. वैज्ञानिकों की नजर अब पास के पांच स्टार सिस्टम्स में मौजूद सात दूसरे विशाल ग्रहों पर टिकी है.



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