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Burhanpur News: बुरहानपुर के प्रतापपुरा में स्थित मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है. तीन पीढ़ी पहले एक परिवार की मन्नत से शुरू हुआ यह मंदिर आज बुरहानपुर की धार्मिक परंपरा का अहम हिस्सा है. यहां संतान प्राप्ति, शादी-विवाह और परिवार में सुख-शांति की मन्नतें पूरी होती हैं.
Burhanpur News: मध्य प्रदेश का बुरहानपुर शहर अपनी धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है. यहां के प्रतापपुरा क्षेत्र में भगवान सत्यनारायण का मंदिर स्थित है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यह बुरहानपुर का भगवान सत्यनारायण को समर्पित प्रमुख और एकमात्र मंदिर है. यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच अपनी अनोखी मान्यता के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है.
संतान प्राप्ति की अनोखी मान्यता
इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं. खास तौर पर संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपती यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं. मन्नत पूरी होने पर भक्त भगवान सत्यनारायण को प्रसाद चढ़ाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं.
तीन पीढ़ी पुराना इतिहास
मंदिर का इतिहास काफी पुराना और प्रेरणादायक है. लोकल 18 की टीम को मंदिर के पुजारी योगेश चतुर्वेदी ने इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि मंदिर का इतिहास करीब तीन पीढ़ी पुराना है. इस मंदिर की नींव उनके दादाजी ने रखी थी. उनके दादाजी ने संतान प्राप्ति के लिए भगवान सत्यनारायण से मन्नत मांगी थी.
ओंकारेश्वर से पैदल लाकर स्थापित की प्रतिमा
जब पुजारी जी के दादाजी की मन्नत पूरी हुई तो उन्होंने भगवान के प्रति आस्था प्रकट करने का संकल्प लिया. उन्होंने अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए विशेष कदम उठाया. वे ओंकारेश्वर पहुंचे और वहां से भगवान सत्यनारायण की प्रतिमा लेकर पैदल बुरहानपुर आए. यहां आकर उन्होंने मंदिर का निर्माण कराया और प्रतिमा स्थापित की. समय के साथ यह मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया.
हलवा और मिश्री का चढ़ाते हैं प्रसाद
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मन्नत पूरी होने पर भगवान सत्यनारायण को हलवा और मिश्री का प्रसाद चढ़ाना चाहिए. भक्त मन्नत पूरी होने के बाद हलवा-मिश्री का भोग लगाकर भगवान का आभार व्यक्त करते हैं.
परिवार में सुख-शांति की कामना
मंदिर में केवल संतान प्राप्ति ही नहीं, बल्कि कई अन्य कार्यों के लिए भी लोग आते हैं. यहां लोग शादी-विवाह की अड़चनों को दूर करने के लिए मन्नत मांगते हैं. साथ ही परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना भी की जाती है. तीन पीढ़ी पहले एक परिवार की व्यक्तिगत आस्था से शुरू हुई यह कहानी आज बुरहानपुर की धार्मिक परंपरा का हिस्सा बन चुकी है.