नई दिल्ली: बलोचिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ चल रहे सशस्त्र संघर्ष में महिलाओं की भूमिका अब एक नए स्तर पर पहुंचती दिखाई दे रही है. बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने पहली बार महिलाओं की एक अलग सशस्त्र यूनिट बनाने का ऐलान किया है. इस यूनिट का नाम करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन (Karima Armed Assault Division-KAAD) बताया गया है.
BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच के मुताबिक, KAAD ने अपनी पहली सैन्य कार्रवाई 22 सितंबर 2026 को बलोचिस्तान के तुरबत के जोस्क (Jusak/Jowsk) इलाके में की. संगठन का दावा है कि महिलाओं की इस नई यूनिट ने CPEC हाईवे के पास पाकिस्तानी सेना के एक काफिले को घात लगाकर निशाना बनाया.
पहली ही कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना के काफिले को बनाया निशाना
BLF के मुताबिक, KAAD के लड़ाकों ने तुरबत के जोस्क इलाके में CPEC हाईवे के पास पाकिस्तानी सेना के Action Task Force के काफिले पर हमला किया. संगठन ने इसे पहले से तैयार और कई स्तरों पर किया गया हमला बताया है. BLF का दावा है कि इस हमले में पाकिस्तानी सेना के कई जवान मारे गए और घायल हुए. संगठन ने यह भी कहा है कि सेना के कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं.
BLF प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच ने कहा कि यह हमला KAAD की पहली सैन्य कार्रवाई है. संगठन की ओर से जल्द ही इस ऑपरेशन को लेकर एक विस्तृत बयान जारी करने की बात कही गई है. इसमें कथित तौर पर पाकिस्तानी सेना को हुए नुकसान, हथियार और सैन्य संसाधनों को हुए नुकसान तथा KAAD के सैन्य उद्देश्यों की जानकारी दी जाएगी.
करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन (Karima Armed Assault Division-KAAD)
क्या है KAAD?
KAAD यानी Karima Armed Assault Division को BLF की नई महिला सशस्त्र यूनिट के तौर पर पेश किया गया है. BLF के अनुसार, इसका गठन बलोच महिलाओं को सीधे सशस्त्र संघर्ष में शामिल करने के लिए किया गया है. इस यूनिट का नाम करीमा बलोच के नाम पर रखा गया है. बलोचिस्तान के अलगाववादी आंदोलन में करीमा बलोच एक प्रमुख महिला चेहरा रही थीं.
BLF ने KAAD की तस्वीर भी जारी की है, जिसमें महिला लड़ाकों को दिखाया गया है. तस्वीर के साथ संगठन ने युद्ध को लेकर आक्रामक संदेश भी दिया है. KAAD की पहली कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है, जब बलोचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी संगठनों में महिलाओं की भूमिका लगातार चर्चा में है.
अब सिर्फ राजनीतिक भूमिका तक सीमित नहीं हैं बलोच महिलाएं
बलोच संगठनों में महिलाओं की भागीदारी नई नहीं है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में उनकी भूमिका राजनीतिक गतिविधियों और संगठन के समर्थन से आगे बढ़कर सीधे सशस्त्र हमलों तक पहुंची है.
अप्रैल 2022 में शारी बलोच ने कराची यूनिवर्सिटी के कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट में आत्मघाती हमला किया था. इस हमले में तीन चीनी शिक्षकों और उनके पाकिस्तानी ड्राइवर की मौत हुई थी. इसकी जिम्मेदारी बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ली थी. इसके बाद भी बलोच सशस्त्र संगठनों से जुड़ी कई महिलाओं के नाम हमलों में सामने आए.
The Diplomat की रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद BLA से जुड़े गुटों के कई हमलों में महिलाओं की भूमिका सामने आई. जून 2023 में तुरबत में एक सैन्य काफिले को निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती हमले में महिला हमलावर के शामिल होने की बात सामने आई थी.
- अगस्त 2024 में बेला में Frontier Corps की एक सुविधा को वाहन के जरिए निशाना बनाया गया था.
- मार्च 2025 में कलात में एक अर्धसैनिक काफिले को निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती हमले में भी महिला हमलावर के शामिल होने की बात कही गई.
- नवंबर 2025 में BLF से जुड़ी बताई गई जरीना रफीक ने नोखुंडी में Frontier Corps की एक व्यवस्था को वाहन के जरिए निशाना बनाया था, ऐसी रिपोर्ट सामने आई थी.
- BLA ने जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान अपने बड़े अभियान Operation Herof 2.0 में भी महिला लड़ाकों की भागीदारी को सार्वजनिक किया था.
BLA ने भी बनाई थी महिला विंग
महिलाओं की बढ़ती भूमिका को देखते हुए BLA ने भी मई 2026 में अपनी अलग महिला विंग बनाने का ऐलान किया था. संगठन ने शैनाज बलोच को इस विंग की कमांडर बताया था. ऐसे में BLF की KAAD की घोषणा को बलोच सशस्त्र संगठनों में महिलाओं की भूमिका को औपचारिक रूप से अलग सैन्य ढांचे में लाने की दिशा में एक और कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
CPEC रूट क्यों है इतना अहम?
KAAD की पहली कार्रवाई के लिए चुना गया इलाका भी महत्वपूर्ण है. हमला CPEC हाईवे के पास तुरबत के जोस्क इलाके में होने का दावा किया गया है. बलोचिस्तान चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है. इसी प्रांत में ग्वादर पोर्ट मौजूद है और CPEC से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट भी हैं.
KAAD ने अपनी पहली सैन्य कार्रवाई 22 सितंबर 2026 को बलोचिस्तान के तुरबत के जोस्क (Jusak/Jowsk) इलाके में की, दावा
बलोच सशस्त्र संगठन लंबे समय से पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा बलों के साथ-साथ चीन से जुड़े प्रोजेक्ट, कर्मचारियों और हितों को भी निशाना बनाते रहे हैं. BLF और BLA बलोचिस्तान में सक्रिय प्रमुख बलोच अलगाववादी सशस्त्र संगठनों में शामिल हैं. दोनों संगठनों ने पाकिस्तान के सुरक्षा बलों और चीन से जुड़े ठिकानों एवं हितों पर कई हमलों की जिम्मेदारी ली है.
KAAD की पहली कार्रवाई क्या संकेत देती है?
KAAD की पहली घोषित कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि BLF महिलाओं की भूमिका को केवल राजनीतिक या सहयोगी गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय एक अलग सशस्त्र ढांचे में लाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि KAAD का संगठनात्मक ढांचा कितना बड़ा है, इसमें कितनी महिला लड़ाके हैं और आने वाले समय में इसका संचालन किस स्तर पर किया जाएगा. BLF ने कहा है कि वह KAAD के उद्देश्यों और पहली कार्रवाई से जुड़े नुकसान की विस्तृत जानकारी बाद में जारी करेगा.
KAAD की औपचारिक घोषणा ने बलोचिस्तान के सशस्त्र संघर्ष में महिलाओं की बदलती भूमिका को एक बार फिर सामने ला दिया है.