शेडनेट में करें खीरे की खेती, दोगुना होगा उत्पादन, 8 महीने कर पाएंगे हार्वेस्ट
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Cucumber Cultivation In Shade Net: शेडनेट हाउस में वैज्ञानिक तरीके से खीरे की खेती करने से पारंपरिक तरीके की तुलना में अधिक फायदा होता है. खुले खेत की तुलना में शेडनेट में प्रति पौधा 8-12 किलो तक अधिक उत्पादन मिल सकता है और फसल 6-8 महीने तक चलती है.
गया. खीरा कम अवधि वाली फसल माना जाता है. खुले खेत में खीरे की खेती मौसम, अधिक तापमान, तेज धूप, वर्षा, कीट और रोगों से प्रभावित हो सकती है. शेडनेट हाउस में वैज्ञानिक तरीके से खीरे की खेती करने पर वातावरण को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और बाजार की मांग के अनुसार ऑफ-सीजन में इसका उत्पादन भी किया जा सकता है. इसी क्रम में शेडनेट में खीरा लगाया जा सकता है.
छोटे क्षेत्र से करें शुरुआत
हालांकि अगर कोई किसान पहली बार शेडनेट में खीरा लगाना चाहता है तो सीधे बहुत बड़े क्षेत्र से शुरुआत करने के बजाय वैज्ञानिक सलाह के साथ छोटा व्यावसायिक मॉडल अपनाना व्यावहारिक हो सकता है. गया जिले के दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के कृषि विभाग द्वारा लगभग तीन कट्ठे में शेडनेट बनाकर वैज्ञानिक तरीके से खीरे की खेती की जा रही है. सही देखभाल और प्रबंधन के कारण फसल का उत्पादन भी बढ़िया हो रहा है.
शेडनेट में होता है ज्यादा दिन तक उत्पादन
कृषि विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पंकज कुमार राय के अनुसार, बाहर खुले में खीरे की खेती की तुलना में शेडनेट में उत्पादन अधिक होता है. बाहर प्रति पौधा जहां 4-6 किलो तक खीरे का उत्पादन होता है, वहीं शेडनेट में 8-12 किलो तक प्रति पौधा उत्पादन लिया जा सकता है. बाहर जहां 4 से 5 महीने में फसल खत्म हो जाती है, वहीं शेडनेट में किसान 6 से 8 महीने तक खीरे की हार्वेस्टिंग कर सकते हैं.
जड़ के पास न हो जलजमाव
उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में खीरे के पौधे लगाए थे. मेड़ बनाकर इसकी खेती की जा रही है, ताकि इसकी जड़ के पास जलजमाव न रहे. मेड़ 10 से 15 सेंटीमीटर ऊंची होनी चाहिए और इसे बनाने से पहले इसका ट्रीटमेंट जरूर कर लेना चाहिए. बाजार से जो बीज लाते हैं, उसका भी उपचार करना जरूरी होता है. नर्सरी तैयार करने के बाद इसे कुछ दिनों में ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है.
खीरे के ज्यादा बड़ा होने का इंतजार न करें
डॉ. पंकज के अनुसार, खीरे की व्यावसायिक संरक्षित खेती में पौधे को जमीन पर फैलाने के बजाय ऊपर की ओर चढ़ाना उपयोगी होता है. इससे शेडनेट के अंदर जगह का बेहतर उपयोग होता है और फल की तुड़ाई भी आसान हो सकती है. खीरे को बहुत बड़ा होने का इंतजार नहीं करना चाहिए क्योंकि बाजार छोटी या मध्यम अवस्था के फल को पसंद करता है. बार-बार उचित अवस्था में तुड़ाई करने से पौधे पर नए फलों की मांग बनी रह सकती है.