टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की तीसरी बार Tata Sons के चेयरमैन बनने की खबर के बीच एक नया मामला सामने आ गया. मामला उनकी पत्नी ललिता चंद्रशेखरन और बेटे प्रणव से जुड़ी कंपनी हान्नो वन वेयरहाउसिंग (Hanno One Warehousing) का है. इस कंपनी का TVS Motor के साथ कारोबारी रिश्ता सामने आया है. खास बात यह है कि TVS Motor के चेयरमैन-एमेरिटस और Tata Sons के डायरेक्टर वेंकटरामन श्रीनिवासन यानी वेनु श्रीनिवासन ने हाल में चंद्रशेखरन को पांच साल की नई टर्म देने के पक्ष में वोट किया था. अब सवाल यह उठ रहा है कि परिवार की कंपनी और टीवीएस मोटर्स के बीच हुए इस कारोबार की जानकारी Tata Sons के बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स को कितनी और कब दी गई थी. मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि वेनु श्रीनिवासन टाटा संस की उस कमेटी का हिस्सा हैं जो चेयरमैन के प्रदर्शन से जुड़े मामलों को देखती है.
दरअसल, चंद्रशेखरन की पत्नी ललिता और बेटे प्रणव हान्नो वन वेयरहाउसिंग के डायरेक्टर हैं. यह कंपनी 10 मार्च 2025 को बनाई गई थी. कंपनी में 99.99 फीसदी हिस्सेदारी Hanno Infra LLP की है और रिकॉर्ड के मुताबिक ललिता इस LLP की ओर से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करती हैं. प्रणव के पास कंपनी का एक शेयर सीधे है. कंपनी बनने के करीब तीन महीने बाद, जून 2025 में TVS Motor ने तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले के उड्डनापल्ली गांव में करीब 17 एकड़ जमीन Hanno One को वेयरहाउस बनाने के लिए लीज पर दी. यानी सीधी सी बात है कि एक तरफ चंद्रशेखरन के परिवार से जुड़ी कंपनी है और दूसरी तरफ TVS Motor है, जिसने उसे जमीन लीज पर दी है.
क्या है पूरा प्रोजेक्ट, जिसके लिए दी जमीन
अब यह कोई छोटी-मोटी जमीन की बात नहीं है. जिस जगह पर प्रोजेक्ट बनाया जाना है, वहां करीब 3.3 लाख वर्ग फुट का वेयरहाउस बनाने की योजना है. Mint की रिपोर्ट में जिस HDFC Bank के टर्म शीट की जानकारी दी गई है, उसके मुताबिक इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 106.3 करोड़ रुपये है. एचडीएफसी बैंक ने नवंबर 2025 में हान्नो वन को करीब 60 करोड़ रुपये का कंस्ट्रक्शन लोन देने की पेशकश की थी. यह लोन जमीन के लीज अधिकार और बनने वाली इमारत के आधार पर था. प्रोजेक्ट को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. हालांकि TVS Motor ने यह जमीन किस किराये या किन दूसरी शर्तों पर दी, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है.
तो फिर विवाद आया कहां से
टीवीएस मोटर कोई Tata ग्रुप की कंपनी नहीं है. यह अपनी अलग और शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी है. लेकिन TVS मोटर से जुड़े वेनु श्रीनिवासन Tata Sons के बोर्ड में डायरेक्टर हैं. वह टाटा ट्रस्ट्स के वाइस-चेयरमैन भी हैं और टाटा संस की उस कमेटी के सदस्य हैं, जो चेयरमैन के प्रदर्शन और उनसे जुड़े मामलों को देखती है. ऐसे में जब उसी टीवीएस मोटर का कारोबारी संबंध टाटा संस के चेयरमैन के परिवार से जुड़ी कंपनी के साथ सामने आया, तो सवाल उठा. क्या इस रिश्ते की जानकारी बोर्ड में पूरी तरह दी गई थी. खासकर तब, जब कुछ ही दिन पहले श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन की नई पांच साल की टर्म के समर्थन में वोट किया था.
सवाल ये कि जब दोनों के बीच कारोबार है तो इसकी जानकारी पहले से सबको थी या नहीं? क्या वोट देने वाले सदस्य को इस मामले में अलग रहना चाहिए था? यही सवाल अब टाटा संस में उठ रहा है. इसका मतलब यह नहीं है कि टीवीएस मोटर ने जमीन देना गलत किया या चंद्रशेखरन ने किसी गलत काम का फायदा उठाया. उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई है. सवाल मुख्य रूप से डिस्क्लोजर और कांफ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट का है.
Tata Sons का क्या कहना
Tata Sons का इस पूरे मामले पर अपना पक्ष है. कंपनी का कहना है कि हान्नो वन वेयरहाउसिंग के गठन की जानकारी अप्रैल 2025 में उन सभी कंपनियों को दी गई थी, जहां चंद्रशेखरन चेयरमैन हैं. टाटा संस का तर्क है कि टीवीएस मोटर एक स्वतंत्र, लिस्टेड कंपनी है और उसका टाटा ग्रुप की कंपनियों के साथ कोई कारोबारी संबंध नहीं है. इसलिए टीवीएस मोटर और चंद्रशेखरन के बेटे से जुड़ी कंपनी के बीच हुए लेन-देन का अलग से टाटा संस या दूसरी टाटा कंपनियों को डिस्क्लोजर करना जरूरी नहीं था. यानी टाटा संस के हिसाब से परिवार की कंपनी बनने की जानकारी दी गई थी, लेकिन टाटा मोटर के साथ हुई खास कारोबारी डील को अलग से बताना जरूरी नहीं था.
जानकारी देने की क्या है व्यवस्था
दूसरी तरफ टाटा ट्रस्ट ने कहा है कि वेनु श्रीनिवासन ने इस कारोबारी संबंध की जानकारी ट्रस्ट्स के ट्रस्टीज को नहीं दी थी. ट्रस्ट ने यह भी कहा कि वह स्वतंत्र रूप से यह पक्का नहीं कर सकता कि Tata Sons के बोर्ड को इस बारे में जानकारी दी गई थी या नहीं. अगर रिपोर्ट में सामने आई बातें सही साबित होती हैं, तो Trusts आगे अपने संस्थागत कदम पर विचार करेगा. यही बात विवाद को और बड़ा बनाती है. क्योंकि टाटा कोड ऑफ कंडक्ट में वास्तविक या संभावित conflict of interest को लेकर डिस्क्लोजर की व्यवस्था है. रिपोर्ट के मुताबिक कोड में ऐसे मामलों को लेकर प्रावधान है, जहां किसी फैसले से किसी डायरेक्टर या उसके परिवार के सदस्य को फायदा पहुंचने की संभावना हो. लेकिन यहां यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी कारोबार का होना अपने आप में गलत या अवैध साबित नहीं करता. असली सवाल है कि नियमों के मुताबिक किसे क्या जानकारी दी गई थी और किस समय दी गई थी.