Devjhulni Ekadashi: साल में एक बार निकलते हैं ठाकुरजी, रेवाड़ी के नीचे से गुजरते हैं श्रद्धालु, जानें अनोखी परंपरा

Devjhulni Ekadashi: साल में एक बार निकलते हैं ठाकुरजी, रेवाड़ी के नीचे से गुजरते हैं श्रद्धालु, जानें अनोखी परंपरा


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Devjhulni Ekadashi: जालोर में देवझूलनी एकादशी पर साल में एक बार ठाकुरजी की भव्य रेवाड़ी निकाली जाती है. प्राचीन राधा-कृष्ण प्रतिमाओं से सजी रेवाड़ियों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. लोग रेवाड़ी के नीचे से निकलकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. इस दौरान किसान पहली बाजरे की फसल और व्यापारी नई सब्जी-फल भगवान को अर्पित करते हैं. इसके बाद ठाकुरजी को तालाब पर शाही स्नान कराया जाता है और भव्य आरती होती है.

जालोर. देवझूलनी एकादशी का दिन अपने आप में खास होता है, साल में एक दिन शहरभर के ठाकुरजी मंदिरों से निकलकर सजी-धजी रेवाड़ियों में विराजमान होते हैं और तालाब की ओर रवाना होते हैं. राधा-कृष्ण की प्राचीन प्रतिमाओं से सजी इन रेवाड़ियों के दर्शन के लिए रास्ते में जगह-जगह शहरवासी उमड़ते हैं. इन रेवाड़ियों में विराजमान राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं भी इस आयोजन का खास हिस्सा हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, इनमें कई प्रतिमाएं काफी प्राचीन हैं और करीब 15 से 16 किलो वजन वाली प्रतिमाओं को विशेष सावधानी से रेवाड़ी में विराजमान कर शोभायात्रा निकाली जाती है.

रेवाड़ी के गुजरने के दौरान श्रद्धालु भगवान के दर्शन करते हैं, इसके साथ ही रेवाड़ी के नीचे से निकलने की भी एक खास परंपरा है. श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार इसके नीचे से निकलकर भगवान से परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं. स्थानीय निवासी दिनेश सोनी ने लोकल18को जानकारी दी की देवझूलनी एकादशी पर यह परंपरा साल में एक बार होती है. शहर के अलग-अलग मंदिरों के ठाकुरजी रेवाड़ियों में सवार होकर तालाब पर जाते हैं.

रास्ते में लोग भगवान के दर्शन करते हैं और रेवाड़ी के नीचे से भी निकलते हैं. ऐसी मान्यता है कि भगवान का आशीर्वाद मिले और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहे, इसी भावना से लोग इस परंपरा को निभाते हैं. इस आयोजन में सिर्फ श्रद्धालुओं की आस्था ही नहीं कृषि और व्यापार से जुड़ी परंपरा भी नजर आती है. किसान अपनी पहली बाजरे की फसल ठाकुरजी को प्रसाद के रूप में अर्पित करते हैं. वहीं सब्जी और फल व्यापारी भी मौसम में आने वाली नई सब्जी या फल भगवान को चढ़ाते हैं. इसके बाद सभी रेवाड़ियां तालाब तक पहुंचती हैं, जहां ठाकुरजी का शाही स्नान कराया जाता है। स्नान के बाद भव्य आरती होती है और श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं.



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