दुश्मनों से हैं परेशान, तो 24 सितंबर का दिन खास, एक उपाय से सब होंगे परास्त
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Guru Pradosh Vrat 2026: दुश्मनों पर विजय की प्राप्ति के लिए 24 सितंबर का दिन बेहद खास है क्योंकि इस दिन गुरु प्रदोष व्रत है. जब असुरों के साथ युद्ध हो रहा था तो मायावी वृत्रासुर देवताओं पर भारी पड़ रहा था. वृत्रासुर पर विजय प्राप्ति के लिए इंद्र देव ने गुरु प्रदोष की पूजा की, जिससे वे विजयी हुए. आप दुश्मनों पर विजय चाहते हैं तो जानें गुरु प्रदोष व्रत और पूजा विधि, मुहूर्त.
गुरु प्रदोष व्रत कथा और पूजा विधि.
Guru Pradosh Vrat 2026: यदि आप अपने शत्रुओं से परेशान हैं, वो आपके खिलाफ साजिशें रच रहे हैं या उनकी वजह से आप कोर्ट केस आदि से परेशान हैं तो आपके लिए 24 सितंबर का दिन बेहद महत्वपूर्ण है. इस दिन गुरु प्रदोष व्रत है, जिसमें देवों के देव महादेव की पूजा की जाती है. यदि आप विधि विधान से व्रत रखकर भगवान शिव को प्रसन्न करते हैं तो आपके जीवन के संकट दूर होंगे, आपके दुश्मन परास्त होंगे क्योंकि उनकी साजिशें विफल होंगी. आपको सफलता की प्राप्ति होगी.
गुरु प्रदोष करके इंद्र हुए विजयी, असुरों को मिली हार
देवताओं और वृत्रासुर की सेना में युद्ध हो रहा था. देवता असुरों पर हावी हो गए थे. यह देखकर वृत्रासुर गुस्से से आग बबूला हो गया. उसने माया से विकराल रूप धारण किया. जिसे देखकर देवता भयभीत हो गए. इसके निवारण के लिए देवता देव गुरु बृहस्पति की शरण में पहुंचे.
देव गुरु ने बताया कि वृत्रासुर ने गंधमादन पर्वत पर कठोर तप करके भगवान शिव को प्रसन्न किया. वह पहले चित्ररथ नाम का राजा था. एक बार वह कैलाश पर गया तो माता पार्वती को भगवान शिव के बगल में बैठा देखा. तो उसने भगवान शिव और माता पार्वती का उपहास किया. इससे नाराज होकर माता पार्वती ने उसे श्राप दे दिया, जिससे वह असुर बन गया.
त्वष्टा ऋषि के श्रेष्ठ तप से उत्पन्न होकर वह वृत्रासुर बना. वृत्रासुर बचपन से ही भगवान शिव शंकर का बड़ा भक्त है, उसको परास्त करना आसान काम नहीं है. देव गुरु ने इंद्र से कहा कि आप गुरु प्रदोष व्रत करो. इस व्रत के पुण्य प्रभाव से ही आप दुश्मन पर विजय प्राप्त कर सकते हैं.
देवराज इंद्र ने गुरु प्रदोष व्रत किया और फिर युद्ध करने गए. शिव कृपा से वृत्रासुर की हार हुई और इंद्र विजयी हुए. इस वजह से जो भी गुरु प्रदोष व्रत विधि विधान से करता है, उसे दुश्मनों पर विजय प्राप्त होती है.
गुरु प्रदोष 2026 मुहूर्त
- भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ: 23 सितंबर, रात 10:50 बजे
- भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी तिथि का समापन: 24 सितंबर, रात 11:18 बजे
- गुरु प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 6:16 बजे से लेकर रात 8:39 बजे तक
दुश्मनों पर विजय के लिए गुरु प्रदोष व्रत का उपाय
- गुरु प्रदोष के दिन प्रात:काल में उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं. उसके बाद साफ कपड़े पहनकर व्रत और शिव पूजा का संकल्प करें.
- दिन में आप सामान्य पूजा कर लें. दिनभर फलाहार और उपवास करें. उसके बाद जैसे ही सूर्यास्त का समय हो तो स्नान आदि करके साफ कपड़े पहनें.
- फिर शिव पूजा के लिए एक लोटे में जल, थाल में चंदन, बेलपत्र, भांग, फूल, अक्षत्, धूप, दीप, फल, मिठाई आदि रख लें.
- शुभ मुहूर्त में आप शिव मंदिर जाएं या फिर घर पर ही पूजा करें. सबसे पहले शिव जी की जलाभिषेक करें.
- उसके बाद बेलपत्र, चंदन, अक्षत्, फूल, माला, धूप, दीप आदि अर्पित करके पूजा करें. शिव मंत्रोच्चार करें. प्रदोष व्रत कथा सुनें और आरती करें. पूजा के बाद मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें.
- रात्रि के समय में जागरण करें और फिर 25 सितंबर को सुबह 06:11 ए एम के बाद पारण करके व्रत को पूरा करें.
- इस बात का ध्यान रखें कि प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के बाद ही करना चाहिए.