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Noida News : नोएडा की आरजी रेजीडेंसी में मेंटिनेंस डिफॉल्टर की बिजली काटने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने AOA को राहत दी है. जानें सिंगल पॉइंट कनेक्शन, मेंटिनेंस वसूली और नोएडा-ग्रेटर नोएडा-गाजियाबाद की हाईराइज सोसायटियों के लिए इस फैसले का क्या मतलब है. यानि लोगों पर इस आदेश का क्या फर्क पड़ेगा…
नोएडा हाईराइज सोसायटी में मेंटिनेंस डिफॉल्टर की बिजली काटी गई..
नोएडा: नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद की हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले लाखों फ्लैट मालिकों के लिए मेंटिनेंस चार्ज से जुड़ी एक अहम खबर है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा सेक्टर-120 स्थित आरजी रेजीडेंसी के मामले में अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन यानी AOA के पक्ष में फैसला सुनाया है. मामला उन निवासियों से जुड़ा था, जिन्होंने सोसायटी का मेंटिनेंस शुल्क नहीं दिया था और AOA ने बिजली की सप्लाई रोक दी थी. कोर्ट के सामने सवाल केवल बिजली काटने का नहीं था, बल्कि यह भी था कि जब किसी सोसायटी में बिजली का कनेक्शन सिंगल पॉइंट हो और उसी व्यवस्था के तहत बिजली के साथ कॉमन एरिया मेंटिनेंस तथा अन्य शुल्कों का हिसाब होता हो, तो मेंटिनेंस बकाया होने पर बिजली काटे जाने के मामले में बिजली निगम किस हद तक दखलंदाजी कर सकता है.
हाईकोर्ट ने आरजी रेजीडेंसी के मामले में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड यानी PVVNL की ओर से जारी 8 और 13 अप्रैल 2026 के नोटिसों को निरस्त कर दिया. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि डिफॉल्टर की बिजली काटे जाने के मामले में विद्युत निगम की ओर से जारी निर्बाध बिजली आपूर्ति संबंधी नोटिस पर रोक रहेगी.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, नोएडा के सेक्टर-120 स्थित आरजी रेजीडेंसी में बिजली की सप्लाई सिंगल पॉइंट कनेक्शन के जरिए से होती है. यानी बिजली की मुख्य सप्लाई सोसायटी लेवल पर आती है और वहां से अलग-अलग फ्लैटों तक बिजली पहुंचती है. इस व्यवस्था में फ्लैटों में लगे उपकरण सामान्य स्वतंत्र प्रीपेड बिजली मीटर की तरह नहीं, बल्कि डिस्प्ले यूनिट के रूप में काम करते हैं. AOA की ओर से अदालत में बताया गया कि सॉफ्टवेयर आधारित व्यवस्था में निवासी जब खाते में पैसा रिचार्ज करते हैं तो उसमें से पहले कॉमन एरिया मेंटिनेंस यानी CAM और अन्य देय शुल्कों को जोड़ा जाता है, उसके बाद बिजली की खपत के लिए राशि उपलब्ध होती है.
विवाद तब बढ़ा जब कुछ निवासियों ने मेंटिनेंस शुल्क का भुगतान नहीं किया, जबकि वे बिजली और सोसायटी की अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करते रहे. AOA ने ऐसे कुछ डिफॉल्टरों की बिजली सप्लाई रोक दी. इसके बाद संबंधित निवासियों ने बिजली निगम से शिकायत की. PVVNL की ओर से AOA को नोटिस जारी कर बिजली आपूर्ति बहाल करने की बात कही गई. इसी कार्रवाई को AOA ने हाईकोर्ट में चुनौती दी.
हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
हाईकोर्ट ने PVVNL की ओर से जारी 8 और 13 अप्रैल के नोटिसों को निरस्त कर दिया. अदालत ने बकाया राशि की वसूली AOA से नहीं किए जाने की बात कही और याचिका का निस्तारण कर दिया. इस तरह आरजी रेजीडेंसी में मेंटिनेंस डिफॉल्टर की बिजली काटे जाने पर विद्युत निगम दखल नहीं दे सकेगा और सिंगल-पॉइंट कनेक्शन वाली व्यवस्था में मेंटिनेंस वसूली के AOA के पक्ष को राहत मिली है.
नोएडा-ग्रेटर नोएडा की सोसायटियों के लिए क्यों अहम है फैसला?
इस मामले की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है, क्योंकि नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद में अभी भी कई हाउसिंग सोसायटियों में सिंगल-पॉइंट बिजली सप्लाई की व्यवस्था है. नोएडा की कई सोसायटियों में सिंगल-पॉइंट बिजली आपूर्ति व्यवस्था बनी हुई है. इन सोसायटियों में कनेक्शन बिल्डर या AOA के नाम पर होने और फ्लैटों में अलग व्यवस्था से बिजली वितरण की बात सामने आई है. यही वजह है कि आरजी रेजीडेंसी का फैसला केवल एक सोसायटी का विवाद नहीं रह जाता. सिंगल-पॉइंट कनेक्शन वाली दूसरी सोसायटियों में भी AOA और निवासियों के बीच मेंटिनेंस वसूली को लेकर चल रहे विवादों में इस फैसले को संदर्भ के तौर पर देखा जा सकता है.
सिंगल पॉइंट और मल्टी पॉइंट कनेक्शन में समझिए अंतर
हाईराइज सोसायटियों में बिजली व्यवस्था को समझने के लिए सिंगल-पॉइंट और मल्टी-पॉइंट कनेक्शन का अंतर अहम है. सिंगल पॉइंट कनेक्शन में सोसायटी लेवल पर मुख्य बिजली कनेक्शन होता है और उसके बाद सोसायटी की आंतरिक व्यवस्था से अलग-अलग फ्लैटों को बिजली दी जाती है. वहीं मल्टी पॉइंट व्यवस्था में अलग-अलग फ्लैटों के लिए स्वतंत्र बिजली कनेक्शन और बिलिंग व्यवस्था हो सकती है.