पटना. अब तक बेहतर मेडिकल सुविधाओं और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों की तलाश में बिहार के डॉक्टरों को बड़े शहरों या विदेशों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है. पटना भी मेडिकल शिक्षा और आधुनिक सर्जिकल ट्रेनिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है. इसकी एक नई मिसाल तब देखने को मिली, जब सऊदी अरब के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अहमद अब्दुल्ला ने आधुनिक रोबोटिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की बारीकियां सीखने के लिए पटना को चुना. उन्होंने यहां AIOR सुपरस्पेशियलिटी यूनिट में तीन सप्ताह की अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप पूरी की.
इस दौरान डॉ. अहमद अब्दुल्ला ने वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. आशीष सिंह और उनकी विशेषज्ञ टीम के मार्गदर्शन में आर्थ्रोप्लास्टी, रोबोटिक सर्जरी और जटिल मामलों की सर्जरी की आधुनिक तकनीकों को करीब से समझा. खास बात यह रही कि इस ट्रेनिंग में केवल ऑपरेशन की तकनीक ही नहीं, बल्कि किसी जटिल सर्जरी से पहले मरीज की स्थिति को समझना, सटीक प्लानिंग करना और बेहतर परिणाम के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना भी शामिल रहा.
सऊदी अरब से कनाडा और दक्षिण कोरिया तक की ट्रेनिंग, फिर पटना को चुना
डॉ. अहमद अब्दुल्ला का मेडिकल सफर भी काफी खास रहा है. उन्होंने अपनी ऑर्थोपेडिक ट्रेनिंग सऊदी अरब में पूरी की. इसके बाद कनाडा के टोरंटो में स्पोर्ट्स मेडिसिन की सब-स्पेशियलिटी ट्रेनिंग ली और दक्षिण कोरिया में अपर एक्सट्रीमिटी सर्जरी की फेलोशिप की. इतने अंतरराष्ट्रीय अनुभव के बाद उन्होंने ज्वाइंट रिप्लेसमेंट और रोबोटिक सर्जरी की विशेष ट्रेनिंग के लिए पटना स्थित AIOR को चुना.
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने अपनी फेलोशिप के लिए डॉ. आशीष सिंह और पटना को ही क्यों चुना, तो उन्होंने बताया कि यहां सर्जरी के मामलों की संख्या काफी अधिक है. इसके साथ ही जटिल मामलों का अनुभव और अनुभवी सर्जन्स के साथ काम करने का अवसर भी दूसरे केंद्रों की तुलना में बेहतर है. यहां अलग-अलग प्रकार के कठिन मामलों को देखने और उनसे सीखने का पर्याप्त अवसर मिलता है.
केवल सर्जरी नहीं, कठिन मामलों की प्लानिंग भी सीखी
तीन सप्ताह की इस फेलोशिप में डॉ. अहमद अब्दुल्ला को रोबोटिक टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से लेकर जटिल सर्जिकल मामलों की तैयारी तक कई महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डॉ. आशीष सिंह ने उन्हें मेको (MAKO) रोबोटिक प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी और निर्धारित ट्रेनिंग के बाद सर्टिफिकेट भी दिया. डॉ. आशीष ने बताया कि किसी भी जटिल सर्जरी में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका उसकी प्लानिंग की होती है.
ऑपरेशन से पहले मरीज की स्थिति, सर्जरी की जरूरत और संभावित चुनौतियों को समझना जरूरी है. इसी प्रक्रिया में डॉ. अहमद को शामिल किया गया. उन्हें जटिल मामलों की प्लानिंग, सर्जिकल अप्रोच और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के बारे में विस्तार से बताया गया. इसके अलावा हिप रिप्लेसमेंट की कम चीरे वाली तकनीक से भी परिचित कराया गया. इस दौरान दोनों डॉक्टरों के बीच मेडिकल नॉलेज का आदान-प्रदान भी हुआ.
पटना में रहना और सीखना शानदार अनुभव रहा
पटना में तीन सप्ताह बिताने के बाद डॉ. अहमद अब्दुल्ला का अनुभव भी काफी पॉजिटिव रहा. उन्होंने बताया कि डॉ. आशीष सिंह और AIOR के साथ अनुभव शानदार रहा. पटना में रहना उन्हें पसंद आया और यहां उन्हें बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला. उन्होंने कहा कि वह पटना में ट्रेनिंग लेने के लिए दूसरे डॉक्टरों को भी प्रोत्साहित करेंगे. इस केंद्र में सीखने का माहौल और जटिल मामलों का अनुभव काफी उपयोगी रहा.
44 साल से ऑर्थोपेडिक सेवाएं, अब अंतरराष्ट्रीय ट्रेनिंग का भी केंद्र
AIOR की इस उपलब्धि के पीछे संस्थान का लंबा अनुभव भी एक महत्वपूर्ण वजह है. डॉ. आशीष सिंह ने बताया कि अनूप इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स एंड रिहैबिलिटेशन पिछले 44 वर्षों से लगातार ऑर्थोपेडिक सेवाएं प्रदान कर रहा है. प्रख्यात ऑर्थोपेडिक एक्सपर्ट डॉ. आर. एन. सिंह से हर कोई परिचित है. इसी संस्थान की सुपरस्पेशियलिटी यूनिट में रोबोटिक सर्जरी और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट के क्षेत्र में विशेष सेवाएं और ट्रेनिंग उपलब्ध कराई जा रही हैं.
यहां केवल विदेशों से ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से भी डॉक्टर ट्रेनिंग लेने पहुंचते हैं. संस्थान में NEET के माध्यम से चयनित डॉक्टरों को DNB ऑर्थोपेडिक्स की शिक्षा दी जाती है. इसके अलावा FNB आर्थ्रोप्लास्टी के लिए भी देश के अलग-अलग हिस्सों से डॉक्टर आते हैं. डॉ. आशीष ने बताया कि पुडुचेरी, केरल, दिल्ली, उदयपुर, हैदराबाद और बेंगलुरु समेत कई शहरों के डॉक्टर यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं. इनमें से कई डॉक्टर अब अपने-अपने क्षेत्रों में कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन के रूप में सेवाएं दे रहे हैं.
हाई वॉल्यूम सेंटर और रोबोटिक तकनीक बनी पहचान
डॉ. आशीष सिंह ने AIOR की विशेषताओं के बारे में बताते हुए कहा कि यहां बड़ी संख्या में जटिल सर्जिकल मामले आते हैं. पटना और आसपास के क्षेत्रों में कई मरीज बीमारी की गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचते हैं. जानकारी और जागरूकता की कमी के कारण इलाज में देरी हो जाती है, जिससे सर्जरी और अधिक चुनौतीपूर्ण बन जाती है. ऐसे मामलों को संभालने के लिए अनुभवी डॉक्टरों, विशेषज्ञ टीम और आधुनिक तकनीक की बहुत जरूरत होती है.
AIOR सुपरस्पेशियलिटी यूनिट में मेको (MAKO) समेत आधुनिक रोबोटिक सर्जिकल प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाली मेडिकल टीम और बेहतर टीमवर्क भी संस्थान की वर्किंग का हिस्सा है. डॉ. आशीष सिंह Stryker MAKO International Proctor से भी जुड़े हैं और उनका उद्देश्य आधुनिक सर्जिकल तकनीकों का ज्ञान दूसरे डॉक्टरों तक पहुंचाना है.