दिवाली के बाद घर से बाहर क्यों छोड़ देती हैं महिलाएं सूप और डंडा?

दिवाली के बाद घर से बाहर क्यों छोड़ देती हैं महिलाएं सूप और डंडा?


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दिवाली का त्योहार सिर्फ दीप जलाने और मां लक्ष्मी की पूजा तक सीमित नहीं है. देश के गांवों में इससे जुड़ी कई अनोखी परंपराएं भी निभाई जाती हैं. ऐसी ही एक रस्म दिवाली के अगले दिन सुबह-सुबह सूप बजाने की है. इसमें महिलाएं बांस के सूप को डंडे या करछली से पीटते हुए ‘ईसर आवैं, दलिद्दर जांय’ बोलती हैं. मान्यता है कि इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है.

बड़ी दिवाली के अगले दिन गांवों में सुबह-सुबह सूप बजाने की परंपरा निभाई जाती है. इस दौरान घर की बुजुर्ग महिलाएं तड़के करीब तीन बजे उठती हैं और बांस का पुराना सूप लेकर उसे डंडे या करछली से पीटती हैं. गांवों में आज भी कई महिलाएं पीढ़ियों से चली आ रही इस रस्म को निभा रही हैं.

इस परंपरा में महिलाएं सूप बजाते हुए घर के हर हिस्से में जाती हैं. आंगन, कमरे और दरवाजे के पास सूप पीटा जाता है. इसके बाद महिलाएं घर से बाहर निकलकर मोहल्ले के मुख्य चौराहे तक जाती हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से घर की दरिद्रता और परेशानियां बाहर निकल जाती हैं.

सूप बजाते समय महिलाएं ‘ईसर आवैं, दलिद्दर जांय’ बोलती हैं. इसका मतलब है कि घर में ईश्वर का आगमन हो, सुख-समृद्धि और लक्ष्मी का वास हो, जबकि दरिद्रता और परेशानियां दूर चली जाएं. यह बोल इस पूरी परंपरा का खास हिस्सा माना जाता है.

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रस्म पूरी होने के बाद महिलाएं इस्तेमाल किए गए सूप और डंडे को घर वापस नहीं लातीं. इन्हें किसी बाग, तालाब, पोखर या मोहल्ले के चौराहे पर छोड़ दिया जाता है. इसके पीछे मान्यता है कि जिस तरह सूप को घर से बाहर छोड़ा जाता है, उसी तरह घर की दरिद्रता और परेशानियां भी दूर चली जाती हैं.

रामपुर के थाना अजीमनगर क्षेत्र की रहने वाली आशा देवी के मुताबिक, यह रस्म उनके बड़े-बुजुर्गों के समय से चली आ रही है. पहले घर की बुजुर्ग महिलाएं इसे निभाती थीं और अब वह भी हर साल इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं. गांव में आज भी कई घरों की महिलाएं इस परंपरा का पालन करती हैं.

सूप और डंडे को बाहर छोड़ने के बाद महिलाएं घर लौट आती हैं. इसके बाद झाड़ू-पोंछा और साफ-सफाई का काम शुरू करती हैं. गांवों में इस पूरी रस्म को घर से गरीबी, बुराई और नकारात्मकता दूर करने तथा आने वाले साल में सुख-शांति और खुशहाली की कामना से जोड़कर देखा जाता है.

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