नई दिल्ली. भारत में धनतेरस-दिवाली के त्योहारी सीजन में नया घर खरीदना शुभ माना जाता है. यही वजह है कि फेस्टिव सीजन में रियल एस्टेट डेवलपर्स ग्राहकों को लुभाने के लिए भारी डिस्काउंट, मुफ्त मॉड्यूलर किचन, सोने के सिक्के और आकर्षक पेमेंट प्लान जैसे ऑफर्स खूब देते हैं. आप भी अगर इन चमकीले ऑफर्स को देखकर ही घर खरीदने का मन बना चुके हैं तो जरा ठहर जाइये. बिल्डर्स के वादों और दावों पर विश्वास करके फ्लैट बुक करने से पहले जरा इन चकाचौंध भरे ऑफर्स के पीछे छिपे नियमों और शर्तों जरा गौर से जरूर चेक कर लें. ऐस नहीं किया तो आपको पछताना पड़ सकता है.
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, बेसिक होम लोन के सीईओ और को-फाउंडर अतुल मोंगा का कहना है कि त्योहारी सीजन में घर खरीदारों को सिर्फ ईएमआई (EMI) या त्योहारी डिस्काउंट देखकर ही मकान लेने का फैसला नहीं करना चाहिए. अगर आप भी इस त्योहारी सीजन में प्रॉपर्टी बुक करने की योजना बना रहे हैं, तो टोकन मनी देने से पहले इन 5 जरूरी बातों की पड़ताल अवश्य कर लें.
मुफ्त गिफ्ट्स और डिस्काउंट का असली गणित समझें
मुफ्त की सुविधाएं या सीधे दाम में कटौती हमेशा सच नहीं होती. बिल्डर्स द्वारा दिए जा रहे ऑफर्स को जरा गहराई से चेक करें और समझें की आपको वास्तव में कितनी बचत होगी. डेवलपर से डिस्काउंट, माफ किए गए चार्जेज और फ्री में मिलने वाली सर्विसेज की लिस्ट लिखित में मांगे. यह भी देखें कि डिस्काउंट फ्लैट की मूल कीमत (Base Price) से घट रहा है या केवल कुछ चुनिंदा सुविधाओं से. यह जरूर जांच लें कि त्योहारी छूट देने के नाम पर बिल्डर ने फ्लैट की मूल कीमत पहले से तो नहीं बढ़ा रखी थी.
रेट की करें तुलना
सिर्फ यह देखकर फैसला न लें कि डेवलपर 5 से 10 लाख रुपये की सीधी छूट दे रहा है. उस इलाके में मौजूद अन्य समान प्रोजेक्ट्स के साथ प्रॉपर्टी की कीमत की तुलना करें. लोकेशन, कारपेट एरिया, कंस्ट्रक्शन की स्टेज, निर्माण की गुणवत्ता और मिलने वाली एमिनिटीज के आधार पर ही प्रति वर्ग फुट रेट को देखें. डेवलपर से त्योहारी ऑफर शुरू होने से पहले की रेट लिस्ट मांगें ताकि यह साफ हो सके कि डील वास्तव में किफायती है या सिर्फ दिखावा.
जरूरी मंजूरियों की करें पड़ताल
प्रॉपर्टी की बुकिंग से पहले सबसे अनिवार्य कदम है कानूनी पड़ताल. अनधिकृत या विवादित प्रोजेक्ट में पैसा लगाना जीवनभर की जमा-पूंजी फंसा सकता है. संबंधित राज्य के रेरा (RERA) पोर्टल पर जाकर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर, उसकी वैधता और पजेशन की घोषित समय-सीमा चेक करें.
जमीन का मालिकाना हक (Land Title), बिल्डिंग प्लान, कंस्ट्रक्शन शुरू करने का सर्टिफिकेट (Commencement Certificate) और पर्यावरण मंजूरियों के बारे में भी पता करें. बिल्डर का पिछला डिलीवरी रिकॉर्ड और अदालती मुकदमों की स्थिति जानें. किसी स्वतंत्र प्रॉपर्टी वकील से सेल एग्रीमेंट का ड्राफ्ट चेक कराए बिना बुकिंग का भुगतान न करें.
बुकिंग एग्रीमेंट को गौर से पढ़ें
अक्सर खरीदार बुकिंग एग्रीमेंट की शर्तों को बिना पढ़े दस्तखत कर देते हैं, जो बाद में विवाद का कारण बनता है. पजेशन मिलने की निश्चित तारीख, बुकिंग कैंसिलेशन की शर्तें, पजेशन में देरी होने पर बिल्डर द्वारा मिलने वाला मुआवजा और फोर्स मेज्योर (Force Majeure) से जुड़े क्लॉज को ध्यान से पढ़ें. यह सुनिश्चित करें कि डेवलपर को अपनी मर्जी से स्वीकृत नक्शे में मनमाना फेरबदल करने की खुली छूट न मिली हो. पेमेंट शेड्यूल हमेशा कंस्ट्रक्शन के चरणों के अनुसार होना चाहिए. काम पूरा होने से पहले बड़ी रकम मांगने वाले बिल्डर्स से तो बचना ही ठीक रहता है.
छिपे हुए खर्चों का भी लगाएं हिसाब
प्रॉपर्टी का विज्ञापन जिस कीमत पर होता है, वह उसकी अंतिम लागत नहीं होती. असल खरीदारी में कई इनडायरेक्ट खर्च शामिल होते हैं जो बजट बिगाड़ सकते हैं. स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, निर्माणाधीन फ्लैट पर जीसटी, पार्किंग शुल्क, फ्लोर-राइज प्रीमियम और एडवांस मेंटेनेंस डिपॉजिट जेब पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं. इसलिए इनके बारे में बुकिंग करने से पहले ही जान लें.