PoK Crisis : पाकिस्तानी आर्मी ने पार की क्रूरता की हदें, PoK के लोगों पर बरसाए ड्रोन, सड़कों पर लगे लाशों के ढेर

PoK Crisis : पाकिस्तानी आर्मी ने पार की क्रूरता की हदें, PoK के लोगों पर बरसाए ड्रोन, सड़कों पर लगे लाशों के ढेर


पाकिस्तान की सरकार और आर्मी PoK के लोगों पर ऐसे जुल्म कर रही है, जैसे कोई देश अपने दुश्मन के साथ करता है. जिस अवैध कब्जे वाले कश्मीर को पाकिस्तान अपना कहता है, वहां एक बार फिर लाशें बिछा दी गई हैं. सुबह के वक्त जब लोग अपने हक की आवाज उठा रहे थे, तब पाकिस्तानी रेंजर्स, फ्रंटियर कॉर्प्स और पुलिस ने मिलकर उन पर गोलियां की बारिश कर दी और आसमान से बारूद से लैस ड्रोन बरसा दिए.  सड़कों पर चारों तरफ चीख-पुकार मची हुई है, गोलियों की थरथराहट गूंज रही है और निर्दोष नागरिकों का खून पानी की तरह बह रहा है.

सुबह 8 बजे हुआ खूनी तांडव: 2 घंटे में बिछ गईं 7 लाशें

घटना की शुरुआत गुरुवार सुबह बेहद खौफनाक मोड़ से हुई. स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब 8 बजे जब जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले लोग रावलकोट के शांतिपूर्ण प्रदर्शन स्थलों पर मौजूद थे, तभी पाकिस्तानी सेना और पुलिस ने अचानक बिना किसी चेतावनी के कार्रवाई शुरू कर दी.

सुरक्षा बलों ने चारों तरफ से घेरकर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध सीधी फायरिंग कर डाली. देखते ही देखते शुरुआती दो घंटों के भीतर ही 7 बेकसूर लोगों ने दम तोड़ दिया और 23 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल होकर तड़पने लगे. गोलियों का शोर इतना तेज था कि पूरा रावलकोट शहर सहम गया. सड़कों पर खून फैल गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, लेकिन सुरक्षा बलों की बंदूकों का रुख सीधा आम अवाम की तरफ ही था.

आसमान से बरसा बारूद: घरों पर हुए ड्रोन हमले

इस बार पाकिस्तानी सेना ने बर्बरता की हर सीमा को लांघते हुए पहली बार अपने ही लोगों पर हमले के लिए ड्रोन का सहारा लिया है. रावलकोट के निवासियों ने आरोप लगाया है कि सेना ने सिर्फ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के रिहायशी घरों को निशाना बनाकर ड्रोन से हमले किए हैं.

स्थानीय नेता सरदार उमर नजीर ने खुद सामने आकर पाकिस्तान आर्मी की इस नीच करतूत का पर्दाफाश किया है. उन्होंने कथित ड्रोन हमले के बाद मौके से बरामद हुए बम और बारूद के जलते-सुलगते टुकड़े दुनिया के सामने रखे हैं. उन्होंने कहा कि ये कोई कानून व्यवस्था संभालने की कार्रवाई नहीं है, बल्कि पाकिस्तानी हुकूमत अपनी ही जनता के खिलाफ सीधी जंग छेड़ चुकी है और मासूमों के घरों को श्मशान बना रही है.

7 जून से अब तक 153 मौतें: श्मशान बनता PoK  

रावलकोट में गुरुवार को हुई ये खूनी कार्रवाई कोई पहली घटना नहीं है. PoK में पिछले कई महीनों से बारूद की गंध फैली हुई है. सरकारी और जमीनी आंकड़ों के मुताबिक, 7 जून से लेकर अब तक पाकिस्तानी सेना की बर्बरता में मरने वाले नागरिकों की संख्या 153 तक पहुंच चुकी है.

हर बीते दिन के साथ पाकिस्तान का दमन चक्र और कड़ा होता जा रहा है. जब भी लोग अपने अधिकारों की मांग को लेकर आवाज उठाते हैं, इस्लामाबाद की शह पर सेना उनकी आवाजों को बंदूकों की गोलियों से दबा देती है. सड़कों पर लाशों के ढेर लग चुके हैं और PoK का कोना-कोना अपनों के खून से लाल हो रहा है.

आखिर क्यों भड़की है ये आग? JAAC की 38 मांगें

सवाल उठता है कि आखिर PoK की अवाम सड़कों पर क्यों है और पाकिस्तान आर्मी उनसे इतनी बौखलाई हुई क्यों है? दरअसल, जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) लंबे समय से अपनी 38 जायज मांगों को लेकर पूरे क्षेत्र में एक बड़ा आंदोलन चला रही है.

  • सस्ती बिजली और आटा: नीलम-झेलम हाइड्रो प्रोजेक्ट से पानी और बिजली पैदा होने के बावजूद PoK के लोगों को महंगी दर पर बिजली और राशन दिया जा रहा है.
  • राजनीतिक और प्रशासनिक स्वायत्तता: स्थानीय लोगों को उनके अपने संसाधनों पर हक देने और इस्लामाबाद का सीधा दखल खत्म करने की मांग की जा रही है.
  • सरकारी फिजूलखर्ची पर रोक: अफसरशाही और हुकूमती नुमाइंदों की शाही सहूलियतों को बंद कर अवाम को राहत देने की बात कही गई है.

अपनी मूलभूत जरूरतों को मांगने पर जब सरकार ने उनकी एक न सुनी, तो अवाम सड़कों पर आ गई. लेकिन पाकिस्तानी हुकूमत ने बातचीत के दरवाजे बंद करके गोलियां चलाना चुन लिया.

रावलकोट में खौफ का माहौल और इंटरनेट ब्लैकआउट  

ताजा कार्रवाई के बाद रावलकोट में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं. पूरे इलाके में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क सेवाएं ठप कर दी गई हैं ताकि पाकिस्तानी फौज के इस खूनी खेल की तस्वीरें और वीडियो बाहर की दुनिया तक न पहुंच सकें.

इसके बावजूद, डर और खौफ को दरकिनार करते हुए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर डटे हुए हैं. चारों तरफ सेना की गाड़ियां गश्त कर रही हैं और जगह-जगह नाकेबंदी कर दी गई है. स्थानीय लोग अपनी सुरक्षा को लेकर बुरी तरह डरे हुए हैं, क्योंकि सेना की तरफ से किसी भी वक्त दोबारा गोलाबारी शुरू होने की आशंका बनी हुई है.

पाकिस्तान के दोहरे रवैये का पर्दाफाश

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को मानवाधिकारों का सबसे बड़ा मसीहा बताने वाले पाकिस्तान का असली चेहरा रावलकोट की सड़कों पर बेनकाब हो चुका है. दुनिया भर में कश्मीर का रोना रोने वाली पाकिस्तानी सरकार अपने कब्जे वाले कश्मीर के लोगों को कीड़े-मकोड़ों की तरह मसल रही है.

निहत्थे नागरिकों पर ड्रोन से हमले करना और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गोलियों से भून देना इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान के पास अवाम के जायज सवालों का कोई जवाब नहीं है. वो केवल खौफ और गोलियों के दम पर PoK पर अपना कब्जा बनाए रखना चाहता है. लेकिन जिस तरह से लोग अपनी जान की परवाह किए बिना सड़कों पर उतर रहे हैं, उससे साफ है कि अब PoK की जनता पाकिस्तान के इस खूनी अत्याचार के आगे झुकने वाली नहीं है.

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