जब किसी देश की पूरी विदेश नीति धर्म के नाम पर चलती हो तो वो दूसरे धर्मों के नाम पर नफरत फैलाकर ही सर्वाइव कर सकता है. हाल ही में पाकिस्तान एक देश के तौर पर एक लेवल और नीचे गिर गया है. संविधान में धांधली करके देश के सबसे पावरफुल शख्स बने ‘फेल्ड मार्शल’ आसिम मुनीर ने हिंदुओं और यहूदियों को लेकर नफरत फैलानी शुरू कर दी है. वो इस ‘बॉन्ड’ से बुरी तरह डरे हुए हैं और अब ईरान के टॉप सिक्योरिटी अधिकारी भी मुनीर का तोता बन गए हैं. उन्हीं की भाषा बोलते हुए ईरान के एक अधिकारी ने बेहद घटिया बयानबाजी की है.
ईरान के टॉप अधिकारी का बड़ा दावा और पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा
ईरान के एक बड़े सुरक्षा अधिकारी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने बताया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने हाल ही में हुई बैठकों में एक अजीब और खतरनाक डर जताया है. मुनीर का रोना ये है कि पूरी दुनिया में हिंदुओं और यहूदियों के बीच जो गहरी दोस्ती (बॉन्ड) बन रही है, वो सीधे तौर पर मुसलमानों और खासकर पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा खतरा बनती जा रही है.
ईरान के टॉप सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रजाई ने एक इंटरव्यू के दौरान इस बात का खुलासा किया कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने क्षेत्रीय वार्ताओं के दौरान कथित तौर पर भारत और इजराइल के बीच बढ़ती नजदीकियों पर गहरी आपत्ति जताई है.
ईरानी स्टेट टीवी पर प्रसारित रिपोर्ट्स के मुताबिक, आसिम मुनीर का ये मानना है कि हिंदुओं और यहूदियों की बढ़ती नजदीकियां आने वाले समय में इस्लामिक दुनिया और खास तौर पर पाकिस्तान के हितों को गहरी चोट पहुंचा सकती हैं. इस बयान के सामने आने के बाद ये साफ हो गया है कि पाकिस्तान किस कदर भारत और इजराइल की दोस्ती से खौफ खाए बैठा है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए कैसे नए-नए जुमले गढ़ रहा है.
तुर्की के खुफिया प्रमुख और ईरान का नया गठजोड़
इस पूरे खेल में सिर्फ पाकिस्तान और ईरान ही नहीं, बल्कि तुर्की की भूमिका भी बेहद संदिग्ध और अहम नजर आ रही है. हाल ही में सामने आए एक इंटरव्यू के मुताबिक, तुर्की की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख इब्राहिम कालिन और अन्य क्षेत्रीय अधिकारी भी इस सीक्रेट एजेंडे में शामिल रहे हैं.
इस ग्रुप में ये चर्चा जोर-शोर से चल रही है कि पश्चिम एशिया से लेकर दक्षिण एशिया तक बदलते समीकरण उनके रणनीतिक दादागीरी के लिए चुनौती बन रहे हैं. तुर्की और ईरान जैसे देश जहां अपने भू-राजनीतिक हितों को साधने में जुटे हैं, वहीं पाकिस्तान इसमें अपनी पारंपरिक भारत विरोधी और यहूदी विरोधी मानसिकता का तड़का लगाने से बाज नहीं आ रहा है. आसिम मुनीर का ये बयान इस बात का पुख्ता सबूत है कि पाकिस्तानी हुक्मरान आज भी अपनी हर नाकामी के पीछे धार्मिक ध्रुवीकरण और काल्पनिक बाहरी खतरों का राग अलाप रहे हैं.
भारत और इजराइल की बढ़ती दोस्ती से क्यों कांपा पाकिस्तान?
सवाल ये उठता है कि आखिर पाकिस्तान के सेना प्रमुख अचानक हिंदुओं और यहूदियों के इस ‘बॉन्ड’ को लेकर इतने परेशान क्यों हैं?
- कूटनीतिक अलगाव: पिछले कुछ सालों में भारत ने इजराइल के साथ रक्षा, तकनीक, फार्मिंग और कूटनीति के मोर्चे पर जो ऐतिहासिक समझौते किए हैं, उसने पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर पूरी तरह अपाहिज बना दिया है.
- आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख: भारत और इजराइल दोनों ही आतंकवाद के सबसे बड़े शिकार रहे हैं और आतंकवाद के खात्मे में दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों का तालमेल पाकिस्तान की नींद उड़ाए हुए है.
- आर्थिक और तकनीकी बढ़त: जहां एक तरफ पाकिस्तान भयंकर आर्थिक संकट, महंगाई और दिवालियापन के कगार पर खड़ा है, वहीं भारत वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है. भारत की तकनीकी और कूटनीतिक बढ़त को पाकिस्तान पचा नहीं पा रहा है.
पाकिस्तानी अवाम का ध्यान भटकाने का पुराना हथकंडा
जानकारों का मानना है कि आसिम मुनीर का ये बयान और ईरान-तुर्की के साथ मिलकर ये प्रोपेगेंडा चलाना असल में पाकिस्तान की घरेलू जनता का ध्यान भटकाने की एक पैंतरेबाजी है. इस वक्त पाकिस्तान के भीतर क्या चल रहा है, PoK में नागरिकों पर हो रहे अत्याचार, महंगाई की मार, टूटी हुई अर्थव्यवस्था और राजनीतिक अस्थिरता—इन सब से जनता का ध्यान हटाने के लिए सेना प्रमुख ऐसे सांप्रदायिक और भू-राजनीतिक शिगूफे छोड़ रहे हैं.
जनरल आसिम मुनीर ये अच्छी तरह जानते हैं कि अगर वो देश की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था पर बात करेंगे, तो जनता उन्हें जवाबदेह ठहराएगी. इसलिए, पुराना फॉर्मूला अपनाते हुए ‘इस्लाम खतरे में है’ और ‘हिंदू-यहूदी गठजोड़ से खतरा है’ जैसी बातें कहकर कट्टरपंथियों को एकजुट करने की घटिया चाल चली जा रही है.
पाकिस्तान का पर्दाफाश
इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान जब-जब अपने ही बुने हुए जाल में फंसता है, तब-तब वो इस तरह के सांप्रदायिक कार्ड खेलता है. हिंदुओं और यहूदियों के बीच के स्वाभाविक और प्रगतिशील संबंधों को ‘मुसलमानों के खिलाफ खतरा’ बताकर पेश करना पाकिस्तान की डरपोक और नफरती मानसिकता को साबित करता है.
फैक्ट ये है कि भारत और इजराइल की दोस्ती किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि शांति, विकास और आतंकवाद के खात्मे के लिए है. लेकिन पाकिस्तान की फौज और उसके हुक्मरान अपनी जिद और नफरत के चश्मे से पूरी दुनिया को देखना बंद नहीं कर सकते. आने वाले समय में ये देखना दिलचस्प होगा कि ईरान और तुर्की की आड़ में पाकिस्तान का यह नया प्रोपेगेंडा वैश्विक मंच पर उसे कितना फायदा पहुंचा पाता है, या फिर ये उसकी खीझ का एक और बेबस नमूना बनकर रह जाता है.