नई दिल्ली. दिवाली पर लोग निवेश करना शुभ मानते हैं और ऐसी मान्यता है कि इस दिन लगाया पैसा दिन दूना और रात चौगुना बढ़ता है. ऐसे में तमाम लोग शेयर बाजार में किस्मत आजमाते हैं, जहां कभी फायदा तो कभी नुकसान हो जाता है. अगर आप भी इस दिवाली किसी ऐसे विकल्प की तलाश में हैं, जहां आपको मुनाफा भी ठीकठाक हो जाए और पैसे डूबने की आशंका भी न रहे तो गोल्ड ईटीएफ सही विकल्प हो सकता है. वैसे भी इस दिवाली सोना खरीदने का सबसे सही समय हो सकता है. आमतौर पर त्योहारी सीजन में सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस साल निवेशकों के लिए अच्छी खबर है. पिछले छह महीनों में सोने की कीमतों में लगभग 12 फीसदी की गिरावट आई है और आने वाले कुछ महीनों में इसमें भारी उछाल आने की उम्मीद है.
सोने की कीमतों में आए इस ठहराव के कारण निवेशक गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार, गोल्ड ETF में कुल प्रबंधित संपत्ति (AUM) हर महीने बढ़ी है. यह इस साल अप्रैल में 1,58,400 करोड़ से बढ़कर अक्टूबर में 1,91,000 करोड़ हो गई है. अक्टूबर में गोल्ड ETF में लगभग 3,300 करोड़ का नेट निवेश आया है.
क्या होता है गोल्ड ईटीएफ
गोल्ड ETF स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड स्कीम हैं, जो फिजिकल सोने की घरेलू कीमतों को ट्रैक करती हैं. इसमें एक यूनिट आमतौर पर 99.5% शुद्ध फिजिकल सोने के 1 ग्राम के बराबर होती है. सोना खरीदने के लिए ETF में निवेश करने के कई फायदे हैं. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने अपने नए तिमाही आउटलुक में बताया है कि मौजूदा त्योहारी और शादी-ब्याह के सीजन से सोने की मांग बढ़ने की उम्मीद है. इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने भंडार में लगातार सोना जमा करने के कारण अगले 12 महीनों में सोने की कीमतों में काफी उछाल की संभावना दिख रही है.
क्यों बेहतर है गोल्ड ईटीएफ
पिछले 12 महीनों में गोल्ड ETF ने बाजार के मुकाबले बेहतर रिटर्न दिया है. निप्पॉन इंडिया गोल्ड ETF BeEs’ 12.58% रिटर्न के साथ सूची में सबसे ऊपर है. ‘इनवेस्को गोल्ड ETF’ और ‘ICICI गोल्ड ETF’ ने एक साल में क्रमशः 12.50% और 12.39% का रिटर्न दिया है. टाटा के गोल्ड ईटीएफ ने 12.62 फीसदी और क्वांटम के गोल्ड ईटीएफ ने इसी समय में 12.81 फीसदी का फायदा दिया है. 20 अक्टूबर, 2025 को मनाई गई पिछली दिवाली के बाद से गोल्ड ETF ने औसतन 9.22% का रिटर्न दिया है. इस अवधि के दौरान कुल 22 गोल्ड ETF मौजूद थे.
15 फीसदी सस्ता पड़ता है ईटीएफ
वैसे तो सिक्के या आभूषण खरीदना हमारी संस्कृति का एक अहम हिस्सा है, लेकिन गोल्ड ETF कई व्यावहारिक और वित्तीय फायदे देते हैं.फिजिकल सोना खरीदना काफी महंगा पड़ता है, क्योंकि इसमें ‘मेकिंग चार्ज’ (बनाने का खर्च) लगता है, जिससे इसकी कीमत लगभग 15% तक बढ़ जाती है. गोल्ड ETF में मेकिंग चार्ज बिल्कुल नहीं लगता और यह फिजिकल सोने से 15 फीसदी सस्ता हो जाता है. साथ ही ETF में चोरी होने का कोई डर नहीं होता और न ही बैंक लॉकर का खर्च देना पड़ता है, क्योंकि ये पूरी तरह सुरक्षित तरीके से आपके डीमैट खाते में जमा रहते हैं. फिजिकल सोना बेचने पर अक्सर कटौती हो जाती है और टेस्टिंग फीस जैसे खर्च भी लगते हैं, लेकिन गोल्ड ETF को NSE और BSE पर ट्रेडिंग के दौरान बाजार कीमत पर ही खरीदा या बेचा जा सकता है.
छोटी रकम से खरीदें सोना
आप ज्वैलर की दुकान पर जाते हैं तो सोने का छोटा सा सामान खरीदने के लिए भी हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन गोल्ड ETF में आप बहुत छोटी मात्रा में भी निवेश कर सकते हैं. इसमें एसआईपी का भी विकल्प होता है जो महज कुछ सौ रुपये से भी शुरू किया जा सकता है. वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026 तक गोल्ड ETF या फंड कैटेगरी ने साल की शुरुआत से अब तक 6.94%, एक साल में 18.64%, तीन साल में 31.90% और पांच साल में 23.15% का रिटर्न दिया है. ऑप्टिमा मनी के फाउंडर और CEO पंकज मथपाल का कहना है कि सोने को लेकर आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है, क्योंकि इसमें निवेश की मजबूत डिमांड है और सप्लाई कम है. अभी भले ही कीमत पर दबाव है, लेकिन आने वाले समय में यह तेजी से चढ़ेगा. एक निवेशक के तौर पर अभी इसमें थोड़ा-थोड़ा एलोकेशन बढ़ाने की जरूरत है.
(Disclaimer: यहां बताए गए ईटीएफ ब्रोकरेज हाउसेज की सलाह पर आधारित हैं. यदि आप इनमें से किसी में भी पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह की लाभ या हानि के लिए लिए News18 जिम्मेदार नहीं होगा.)