Dhanteras 2026: धन्वंतरि आरोग्‍य के देवता, तो फिर धनतेरस पर क्‍यों खरीदा जाता है ‘सोना’? कहां से आई ये परंपरा

Dhanteras 2026: धन्वंतरि आरोग्‍य के देवता, तो फिर धनतेरस पर क्‍यों खरीदा जाता है ‘सोना’? कहां से आई ये परंपरा


होमताजा खबरनॉलेज

धन्वंतरि आरोग्‍य के देवता, तो फिर धनतेरस पर क्‍यों खरीदा जाता है ‘सोना’?

Last Updated:

धनतेरस पर सोना खरीदना आज भारत में दिवाली की सबसे अहम परंपराओं में से एक बन चुका है. द‍िवाली पर लक्ष्‍मी जी का पूजन होता है और 5 द‍िनों के इस त्‍योहार में अक्‍सर लोग सोने को वैभव से जोड़कर घर लाते हैं. लेकिन ये महज एक ट्रेड‍िशन नहीं है. इसके पीछे हेल्‍थ, वेल्‍थ और सेफ्टी जैसी आर्थ‍िक सोच भी जुड़ी है.

Zoom

धनतेरस पर सोना खरीदने की आदत कैसे बनी? (फोटो साभार – रॉयटर्स)

इस साल 6 नवंबर को धनतेरस का त्‍योहार मनाया जा रहा है. हर साल की तरह इस साल भी ग्रेटर नोएडा के जोशी पर‍िवार ने साफ-सफाई और घर की सजावट कर ली है. व‍िभा धनतेरस पर इस बार सोना की अंगूठी लेना का सोच रही हैं. जबकि उनके पति राजेश जोशी का प्‍लान है कि इस बार धनतेरस पर ड‍िज‍िटल गोल्‍ड ले ल‍िया जाए. गोल्‍ड का गोल्‍ड और इनवेस्‍टमेंट का इनवेस्‍टमेंट. धनतेरस मौके पर अक्‍सर हर परिवार में सोना खरीदने की तैयारी होती है. क्‍योंकि गोल्‍ड के प्राइज ज्‍यादा हैं, तो कई पर‍िवार बर्तन या दूसरी चीजें खरीदते हैं. समुद्र मंथन में धन्‍वंतरि निकले थे और आरोग्‍य के देवता माने जाते हैं. धनतेरस पर उनकी पूजा की जाती है.

पर सवाल ये है कि सेहत और न‍िरोग से जुड़े धन्‍वंतरि के पूजन के साथ सोना खरीदने की प्रथा कहां से जुड़ी? क्‍या प्राचीन ग्रंथों में इस द‍िन सोना खरीदने का कहीं ज‍िक्र है या ये बाजार का बनाया गया ऐसा तरीका है, ज‍िसे हम सदियों से ‘प्रथा’ मानकर पूरा क‍िए जा रहे हैं?

धनतेरस के पीछे जुड़ी आर्थ‍िक सोच
धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है और इसी द‍िन से द‍िवाली का 5 द‍िनों का त्‍योहार शुरू होता है. यानी धनतेरस, रूप चौदस, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज. धनतेरस के द‍िन लक्ष्मीजी, धन के देवता कुबेर तथा आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि की पूजा की जाती है.

धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है और इसी द‍िन से द‍िवाली का 5 द‍िनों का त्‍योहार शुरू होता है. (फोटो साभार – रॉयटर्स)

समुद्र मंथन की कहानी
श्रीमद्भागवत महापुराण के 8वें स्कंध के 8वें अध्याय में समुद्र मंथन के प्रसंग में भगवान धन्वंतरि ज‍िक्र है. वह इस मंथन के तेरहवे द‍िन अमृत कलश लेकर प्रकट हुए. इसल‍िए इस त्‍योहार को धन्‍वंतरि त्रयोदशी भी कहा जाता है. वे आयुर्वेद और आरोग्य के देवता माने जाते हैं. धन्वंतरि के हाथ में स्वर्ण कलश होने की मान्यता ने इस दिन धातु और मूल्यवान वस्तुओं की खरीद को शुभ बना दिया. समय के साथ यही विश्वास सोने-चाँदी की खरीदारी से जुड़ गया. हालांकि इस द‍िन सोना-चांदी ही खरीदना चाहिए, इस बात का ज‍िक्र क‍िसी धर्म ग्रंथ में नहीं है. लेकिन वैभव की कामना के साथ कुछ लोगों ने इस कलश के रूप में बर्तन खरीदने शुरू कर द‍िए, तो धीरे-धीरे बाजार ने ‘स्‍वर्ण-कलश’ के स्‍वर्ण यानी सोने को वैभव और सेहत से जोड़ द‍िया. विष्णु पुराण के प्रथम अंश के अध्याय 9 में समुद्र मंथन का वर्णन है. समुद्र मंथन में कई अनमोल चीजें न‍िकली थीं. इसी कथा में देवी लक्ष्मी के प्रकट होने का वर्णन मिलता है. देवी लक्ष्मी को ऐश्वर्य, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री माना गया है. सोने की खरीद माता लक्ष्‍मी से भी जोड़ दी गई.

धातु को धन का प्रतीक मानना
भारतीय संस्कृति में सोना और चांदी को समृद्धि का प्रतीक माना गया है. सोना दुर्लभ, टिकाऊ और समय के साथ मूल्य बनाए रखने वाली धातु रही है. इसलिए उसे केवल आभूषण नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक पहुंचने वाली परिवारिक संपत्ति भी माना गया. इसके पीछे आर्थ‍िक सोच भी अहम है. पुराने समय में बैंकिंग, बीमा या इनवेस्‍टमेंट के औपचारिक विकल्प उतने नहीं थे. ऐसे में सोने के गहने या सिक्के जरूरत पड़ने पर बेचे या गिरवी रखे जा सकते थे. यही व्यावहारिक उपयोगिता सोने को ‘सुरक्षित धन’ का दर्जा देती है. यही वजह है कि भारतीय परंपरा में सोने के आभूषण रखना हमेशा समझदारी का प्रतीक समझा जाता है.

बाजार ने बर्तन से ज्‍यादा बनाया सोने को जरूरी
कई विद्वान और परंपरा-विशेषज्ञ मानते हैं कि धनतेरस पर असल में नए बर्तन जैसे कलश, घड़ा और पूजा से जुड़े बर्तन खरीदने की प्रथा थी. धन्वंतरि के अमृत-कलश से इसका संबंध जोड़ा गया. लेकिन बाद में जब सोना-चांदी और धातु को समृद्धि का प्रतीक माना गया, तो बर्तन की जगह सोने के गहने और चांदी की चीजें खरीदने की बात होने लगी.

भारतीय संस्कृति में सोना और चांदी को समृद्धि का प्रतीक माना गया है. (फोटो साभार – रॉयटर्स)
img

खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव

QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें

QR Code

login



Source link