अमेरिकी राजनीति के गलियारों में इस वक्त ऐसी सनसनी मची है जिसने दुनिया भर के कूटनीतिक हलकों को हिलाकर रख दिया है. मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, और उसके बाद से वाशिंगटन के पावर कॉरिडोर में बड़े पैमाने पर फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है. ‘द वाशिंगटन सन’ की रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि हार के बाद मार्को रूबियो पद छोड़ सकते हैं. उनके बाद इस पद के लिए वाशिंगटन से लेकर नई दिल्ली तक सिर्फ एक ही नाम चर्चा में है, सर्जियो गोर. सिर्फ विदेश मंत्री ही नहीं गोर को कई और बड़े पावरफुल पद पर तैनात करने के लिए विचार किया जा रहा है.
अमेरिका में किस पद पर बिठाए जाएंगे सर्जियो गोर?
भारत में अमेरिका के राजदूत के तौर पर काम कर रहे सर्जियो गोर को लेकर ऐसी रिपोर्ट्स आ रही हैं कि उन्हें ट्रंप प्रशासन में किसी बहुत बड़े और पावरफुल पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.
अमेरिकी मीडिया में यहां तक दावे किए जा रहे हैं कि गोर को व्हाइट हाउस का चीफ ऑफ स्टाफ या सीधे देश का नया सेक्रेटरी ऑफ स्टेट यानी विदेश मंत्री बनाया जा सकता है. इसका मतलब साफ है कि मौजूदा विदेश मंत्री मार्को रुबियो या व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है.
मिडटर्म का झटका और अंदरूनी खेमे में सुगबुगाहट
‘द वाशिंगटन सन’ की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ने अमेरिकी राजनीति में भूचाल ला दिया है. प्रशासन के अंदरूनी सूत्रों और लगभग 10 वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से ये दावा किया गया है कि मिडटर्म चुनावों के निराशाजनक नतीजों के बाद ट्रंप अपने शीर्ष नेतृत्व में बड़ा ओवरहॉल करने का मन बना चुके हैं.
सर्जियो गोर, जो ट्रंप के बेहद करीबी सिपहसालार माने जाते हैं और अतीत में व्हाइट हाउस के वरिष्ठ सलाहकार रह चुके हैं, इस रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं. स्टेट डिपार्टमेंट यानी विदेश मंत्रालय के गलियारों में भी दबी जुबान से ये चर्चा है कि गोर खुद वाशिंगटन में बड़ी भूमिका संभालने के इच्छुक हैं. भले ही ऊपर से सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश हो रही हो, लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस आग के पीछे सुलगती हुई चिंगारी बहुत गहरी है.
क्या मार्को रुबियो छोड़ेंगे विदेश मंत्री का पद?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मार्को रुबियो अपनी कुर्सी छोड़ने वाले हैं? रिपोर्ट के मुताबिक, रुबियो या सूजी वाइल्स में से किसी ने भी खुलकर अभी तक इस्तीफा देने की बात नहीं कही है. लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ये अटकलें चरम पर हैं कि रुबियो भविष्य की अपनी राष्ट्रपति पद की महत्वाकांक्षाओं साल 2028 या 2032 के चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर खुद कैबिनेट से बाहर हो सकते हैं.
चर्चा ये भी है कि अगर रुबियो हटते हैं, तो उनकी जगह लेने के लिए सर्जियो गोर का नाम सबसे ऊपर चल रहा है. हालांकि, विदेश उप-मंत्री क्रिस लान्डौ का नाम भी चर्चा में था, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है. ऐसे में सारा फोकस सर्जियो गोर पर आकर टिक गया है.
‘पूरी तरह बकवास’, सर्जियो गोर और व्हाइट हाउस का तीखा पलटवार
जैसे ही इन खबरों ने जोर पकड़ा, खुद भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर मैदान में उतर आए. उन्होंने इन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए बेहद सख्त और बेबाक लहजे में इन्हें ‘पूरी तरह से बकवास’ करार दिया.
गोर ने दो टूक कहा, ‘मेरी किसी अन्य भूमिका में रत्ती भर भी दिलचस्पी नहीं है. मैंने किसी के साथ भी पद बदलने को लेकर कोई बात नहीं की है’. उन्होंने मार्को रुबियो की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें अमेरिका का अब तक का सबसे योग्य और शानदार विदेश मंत्री बताया और खुद को उनका गहरा दोस्त करार दिया.
व्हाइट हाउस और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने भी इन दावों को पूरी तरह खारिज किया. सहायक विदेश मंत्री डायलन जॉनसन ने साफ कहा कि रुबियो और गोर के बीच बेहतरीन पेशेवर और निजी तालमेल है, और ये खबरें सिर्फ अनाम सूत्रों द्वारा फैलाई गई अफवाहें हैं. व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने भी इसे ‘फेक न्यूज’ बताते हुए कहा कि वाइल्स और रुबियो शानदार काम कर रहे हैं.
ट्रंप के इतने खास कैसे बन गए सर्जियो गोर?
भले ही इन खबरों का खंडन कर दिया गया हो, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सर्जियो गोर का कद ट्रंप प्रशासन में लगातार बहुत तेजी से बढ़ा है. ट्रंप के एक वरिष्ठ सलाहकार का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप खुद गोर को बहुत पसंद करते हैं.
गोर की सबसे बड़ी खूबी ये रही कि जब ट्रंप सत्ता से बाहर थे, तब भी गोर ने उनसे कोई व्यक्तिगत फायदा मांगने के बजाय हमेशा उनके सामने तगड़ी बिजनेस डील्स और राजनीतिक रणनीतियां पेश कीं. वो ट्रंप परिवार के व्यापारिक हितों से भी बहुत करीबी से जुड़े रहे हैं. उनकी पब्लिशिंग कंपनी ने खुद ट्रंप की किताबें छापी हैं और डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ उनकी गहरी दोस्ती जगजाहिर है. नवंबर 2025 में जब उन्होंने नई दिल्ली में राजदूत के तौर पर कमान संभाली थी, तब ओवल ऑफिस में ट्रंप ने खुद उन्हें एक ‘शानदार इंसान’ कहकर उनकी पीठ थपथपाई थी.
भारत और सेंट्रल एशिया में मजबूत होती गोर की पकड़
नई दिल्ली आने के बाद से सर्जियो गोर ने अपनी एक अलग ही राजनयिक शैली स्थापित की है. उन्होंने मार्को रुबियो, वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक और तत्कालीन सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल जैसे दिग्गजों के भारत दौरों को न केवल मैनेज किया, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों को एक नया आयाम दिया.
उनका दायरा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत होने के नाते उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी जैसे वैश्विक नेताओं के साथ बैठकों में अहम भूमिका निभाई है. सोवियत संघ के समय उज्बेकिस्तान में जन्मे गोर ने अपनी क्षेत्रीय समझ का इस्तेमाल करते हुए हाल ही में उज्बेकिस्तान में मार्को रुबियो के रणनीतिक दौरे को सफल बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई थी. उनकी कार्यशैली बिल्कुल ट्रंप जैसी है—जोखिम उठाना, सौदेबाजी करना और सबसे पहले अमेरिकी बिजनेस हितों को साधना.
मिडटर्म के बाद अमेरिका में मची हलचल
हालांकि, सर्जियो गोर के लिए आगे का रास्ता आसान नहीं है. नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में उनके सख्त मैनेजमेंट और कई पुराने करियर-डिप्लोमैट्स को हटाने के तरीकों की आलोचना भी हुई है. इसके अलावा, अगर ट्रंप उन्हें किसी कैबिनेट पद पर चुनते भी हैं, तो अमेरिकी सीनेट से उनकी मंजूरी लेना एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि राजदूत के रूप में उनकी नियुक्ति के वक्त भी सभी डेमोक्रेट सीनेटरों ने उनके खिलाफ वोट किया था.
मिडटर्म चुनावों के बाद वाशिंगटन में सियासी पांसे तेजी से फेंके जा रहे हैं. ट्रंप प्रशासन अपनी खोई हुई रफ्तार को वापस पाने के लिए कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकिचाएगा. ऐसे में सर्जियो गोर नई दिल्ली में ही रहकर भारत-अमेरिका के रिश्तों को मजबूत करते रहेंगे या वाशिंगटन लौटकर ट्रंप के सबसे बड़े रणनीतिकार बनेंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.