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Narsinghpur News: मध्य प्रदेश में नरसिंहपुर में एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जब स्कूल की जर्जर इमारत को लेकर बच्चे कलेट्रेक्ट में धरना देने पहुंच गए. इस दौरान बच्चों ने बताया कि उनका स्कूल पूरी तरह से टूटा हुआ है और ढंग से बैठने की जगह भी नहीं है. इस दौरान उनके साथ सरपंच माया विश्वकर्मा भी मौजूद थे.
जर्जर स्कूल की इमारत के लिए बच्चों का प्रदर्शन
रिपोर्ट-राहुल मेहरा
Narsinghpur News: कंधों पर किताबों का भारी बस्ता नहीं, बल्कि हाथों में अपनी सुरक्षा का सवाल उठाती तख्तियां थीं. नन्हें-मुन्ने पैरों ने जब कलेक्ट्रेट की ओर कदम बढ़ाए, तो हर देखने वाले की निगाहें ठिठक गईं नरसिंहपुर की सड़कों पर जब मासूमों की बुलंद आवाज गूंजी. नहीं किसी से भीख मांगते, हम अपना अधिकार मांगते हैं. तो लगा मानो कंक्रीट की इमारतें भी एक पल के लिए सहम गई हों।
शिकायत लेकर कलेक्टर पहुंचे बच्चे
मामला नरसिंहपुर के साईंखेड़ा जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत मेहरागांव का है. गांव के प्राथमिक स्कूल की इमारत इस कदर बदहाल हो चुकी है कि वहां हर पल किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है. जब शिकायतों की फाइलें दफ्तरों की धूल फांकती रहीं और जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक न रेंगी, तो ग्रामीणों का सब्र टूट गया. महिला सरपंच माया विश्वकर्मा की अगुवाई में मासूम बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग खुद अपनी फरियाद लेकर कलेक्ट्रेट परिसर आ पहुंचे.
बच्चों ने बताई आपबीती
प्रदर्शन के दौरान स्कूल की छात्रा अंशिका ने रुंधे गले और तीखे तेवरों में कहा कि हम पढ़ाई करना चाहते हैं, लेकिन डर के साए में नहीं. पहले हमें सुरक्षित स्कूल भवन दो, फिर पढ़ाई की बात करो. बच्चों के इन शब्दों ने प्रशासनिक व्यवस्था की दावों की पोल खोलकर रख दी.
सरपंच माया विश्वकर्मा ने बताया कि जर्जर छत और दरकती दीवारों के बीच बच्चों को भेजना किसी खतरे से खाली नहीं है. बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब सिर्फ आश्वासन मिले, तो उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा.
कलेक्टर ने समाधान करने की कही बात
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन की सूचना मिलते ही तहसीलदार अमित कुमार मौके पर पहुंचे. उन्होंने ग्रामीणों से ज्ञापन लिया और जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने और मामले को वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष रखकर नए भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराने का आश्वासन दिया.
सवाल सिर्फ एक स्कूल की इमारत का नहीं, बल्कि उन दर्जनों जिंदगियों का है जो रोज उस जर्जर छत के नीचे बैठकर अपने भविष्य के सपने बुनती हैं. अब देखना यह है कि प्रशासन की नींद कब टूटती है. इन बच्चों को उनका जायज अधिकार कब मिलता है या फिर मामला दब दिया जाता है.