क्या आपकी कुंडली में भी है ‘राजयोग’? जानिए, किन 5 ग्रह स्थितियों को माना जाता है खास

क्या आपकी कुंडली में भी है ‘राजयोग’? जानिए, किन 5 ग्रह स्थितियों को माना जाता है खास


Rajyog in Kundli: कुंडली देखते समय आपने कई बार राजयोग का नाम सुना होगा. ज्योतिष में राजयोग को सुख-सुविधाओं, मान-सम्मान, तरक्की और अच्छे पद से जोड़कर देखा जाता है. यही वजह है कि लोग जानना चाहते हैं कि उनकी जन्मकुंडली में राजयोग है या नहीं. लेकिन सिर्फ किसी एक ग्रह का मजबूत होना राजयोग नहीं कहलाता.

इसके लिए कुंडली में ग्रहों की स्थिति, भावों के स्वामी, उनकी आपसी युति और दृष्टि जैसे कई पहलुओं को देखा जाता है. वैदिक ज्योतिष में कुछ खास ग्रह स्थितियों को राजयोग बनाने वाला माना गया है. आइए जानते हैं ऐसी ही 5 प्रमुख स्थितियों के बारे में.

1. केंद्र और त्रिकोण भाव के स्वामियों का संबंध
वैदिक ज्योतिष में कुंडली के 1, 4, 7 और 10वें भाव को केंद्र भाव कहा जाता है. वहीं 1, 5 और 9वें भाव त्रिकोण भाव माने जाते हैं. ज्योतिष के अनुसार, जब इन भावों के स्वामी ग्रहों के बीच खास संबंध बनता है, तो राजयोग बन सकता है.

यह संबंध तीन तरह से बन सकता है:
1. दोनों ग्रह एक ही भाव में बैठे हों.
2. दोनों ग्रह एक-दूसरे को देख रहे हों.
3. दोनों ग्रहों के बीच राशि परिवर्तन हो.

इस योग को करियर में तरक्की, मान-सम्मान और अच्छी स्थिति से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, इसका फल ग्रहों की मजबूती और कुंडली में दूसरे योगों पर भी निर्भर माना जाता है.

2. धर्म-कर्माधिपति योग
ज्योतिष में 9वें भाव को भाग्य और धर्म का भाव माना जाता है, जबकि 10वां भाव कर्म, काम और करियर से जुड़ा होता है. जब इन दोनों भावों के स्वामी ग्रहों के बीच युति, दृष्टि या राशि परिवर्तन का संबंध बनता है, तो इसे धर्म-कर्माधिपति योग कहा जाता है.

इस योग को खास इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें भाग्य और कर्म दोनों का मेल होता है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, ऐसी स्थिति व्यक्ति को अपने काम में पहचान, अच्छी जिम्मेदारी और सफलता दिलाने वाली हो सकती है. लेकिन इसके लिए दोनों ग्रहों की स्थिति और उनकी ताकत देखना भी जरूरी होता है.

3. पंच महापुरुष योग
पंच महापुरुष योग को ज्योतिष में खास ग्रह योगों में गिना जाता है. यह एक नहीं, बल्कि पांच अलग-अलग योगों का समूह है. जब मंगल, बुध, गुरु, शुक्र या शनि अपनी स्वराशि या उच्च राशि में होकर लग्न से केंद्र भाव यानी 1, 4, 7 या 10वें भाव में बैठते हैं, तो इन योगों में से कोई एक बन सकता है.

इसके पांच प्रकार हैं:
1. रुचक योग: मंगल से बनता है. इसे साहस, नेतृत्व और आत्मविश्वास से जोड़ते हैं.
2. भद्र योग: बुध से बनता है. इसे बुद्धि, बातचीत और समझदारी से जोड़ा जाता है.
3. हंस योग: गुरु से बनता है. इसे ज्ञान, सम्मान और अच्छे विचारों का प्रतीक माना जाता है.
4. मालव्य योग: शुक्र से बनता है. इसे सुख-सुविधाओं, कला और आकर्षण से जोड़कर देखते हैं.
5. शश योग: शनि से बनता है. इसे अनुशासन, मेहनत और जिम्मेदारी से जुड़ा माना जाता है.

ज्योतिष में इन पांचों योगों को व्यक्ति के जीवन में खास पहचान और अच्छी स्थिति से जोड़कर देखा जाता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

4. विपरीत राजयोग
विपरीत राजयोग को ज्योतिष में ऐसे योग के रूप में देखा जाता है, जिसमें व्यक्ति मुश्किल हालात से निकलकर आगे बढ़ सकता है. यह योग कुंडली के 6वें, 8वें और 12वें भाव से जुड़ा होता है.

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, जब इन तीनों भावों में से किसी भाव का स्वामी दूसरे त्रिक भाव यानी 6वें, 8वें या 12वें भाव में बैठता है, तो विपरीत राजयोग बनने की स्थिति बन सकती है. इसके तीन प्रमुख नाम हैं:

1. हर्ष योग: छठे भाव के स्वामी की खास स्थिति से बनता है.
2. सरल योग: आठवें भाव के स्वामी की खास स्थिति से बनता है.
3. विमल योग: बारहवें भाव के स्वामी की खास स्थिति से बनता है.

इस योग को संघर्ष के बाद सफलता, मुश्किलों पर जीत और विरोधियों से आगे निकलने की क्षमता से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, इसकी सही स्थिति समझने के लिए पूरी कुंडली देखना जरूरी है.

5. नीचभंग राजयोग
ज्योतिष में जब कोई ग्रह अपनी नीच राशि में बैठता है, तो उसकी स्थिति कमजोर मानी जाती है. लेकिन कुछ खास ग्रह स्थितियों में इस कमजोरी का असर कम या खत्म होने की बात कही गई है. इसी स्थिति को नीचभंग कहा जाता है. जब किसी ग्रह की नीच स्थिति खत्म होने के साथ कुंडली में राजयोग से जुड़ी दूसरी शर्तें भी पूरी होती हैं, तो इसे नीचभंग राजयोग कहा जाता है.

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, यह योग व्यक्ति को शुरुआती मुश्किलों के बाद तरक्की और पहचान दिलाने वाला हो सकता है. हालांकि, सिर्फ नीच राशि में बैठे ग्रह को देखकर नीचभंग राजयोग नहीं मान लेना चाहिए. इसके लिए ग्रह की राशि, भाव, राशि स्वामी और दूसरे ग्रहों की स्थिति भी देखी जाती है.

क्या कुंडली में राजयोग होने से राजा जैसी जिंदगी मिलती है?
यह समझना जरूरी है कि कुंडली में राजयोग होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को अपने आप बहुत सारा धन, बड़ा पद या हर तरह की सुख-सुविधाएं मिल जाएंगी. ज्योतिष में किसी भी योग का फल देखने के लिए ग्रहों की मजबूती, शुभ-अशुभ प्रभाव, भावों की स्थिति और चल रही महादशा-अंतर्दशा को भी देखा जाता है.



Source link