जयपुर. DSS Rajasthan 2026 में कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश की संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनी रहनी चाहिए. इन संस्थाओं की क्रेडिबिलिटी समाप्त नहीं होनी चाहिए और पारदर्शिता कायम रहनी चाहिए. पायलट ने कहा कि आज लोगों के मन में चुनाव आयोग को लेकर संदेह पैदा हो रहा है. लगातार प्रहार होने से संस्थाओं पर विश्वास कम हुआ है. ऐसे में लोगों के मन में यह भरोसा पैदा करना जरूरी है कि उनका वोट सुरक्षित है और चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से संचालित हो रही है.
सचिन पायलट ने कहा कि भारत को दुनिया में लोकतंत्र की जननी के रूप में देखा जाता रहा है. भारतीय लोकतंत्र का उदाहरण पूरी दुनिया में दिया जाता था, लेकिन आज संवैधानिक संस्थाओं की स्थिति और उनकी विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से सरकारें और राजनीतिक दल निपट सकते हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की साख पर आंच नहीं आनी चाहिए.
राहुल गांधी ने जो मुद्दे उठाए, उन पर संसद में चर्चा होनी चाहिए
पायलट ने राहुल गांधी की ओर से उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि यह उनका अधिकार भी है और कर्तव्य भी. संसद में इन मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि चर्चा होगी या नहीं, यह सरकार पर निर्भर करता है. जब जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन चल रहा था, तब भी संसद का सत्र चल रहा था. उस समय भी इन मुद्दों पर चर्चा हो सकती थी. लोकतंत्र में संवाद और चर्चा लगातार होती रहनी चाहिए.
चुनाव आयोग के चयन की प्रक्रिया क्यों बदली?
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों के बीच सचिन पायलट ने आयोग के चयन की प्रक्रिया में बदलाव को लेकर भी सवाल किया. उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है. चुनाव आयोग पर लोगों का भरोसा कायम रहना चाहिए. लगातार सवाल उठने और प्रहार होने से लोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है. ऐसी स्थिति में संस्थाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि मतदाताओं को भरोसा रहे कि उनका वोट सुरक्षित है और चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष है.
महंगाई-बेरोजगारी से निपट सकते हैं, संस्थाओं की साख जरूरी
पायलट ने कहा कि देश में महंगाई और बेरोजगारी जैसे कई मुद्दे हैं, जिनसे सरकार और राजनीतिक दल मिलकर निपट सकते हैं. लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता समाप्त नहीं होनी चाहिए. उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के दौरान ईडी की कार्रवाई और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान में आ रही गिरावट को लेकर भी चिंता जताई.
निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रक्रिया की विश्वसनीयता जरूरी
निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रक्रिया की विश्वसनीयता जरूरीकांग्रेस नेता सचिन पायलट ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि यह प्रक्रिया 1952 से हो रही है, लेकिन आज इस पर इतना बवाल क्यों मच रहा है. सवाल उठना स्वाभाविक है. चुनाव व्यवस्था निष्पक्ष होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा नजर नहीं आ रहा. उन्होंने कहा कि अगर खेल में अंपायर ही निष्पक्ष नहीं होगा तो मुकाबला फेयर नहीं हो सकता. हम निष्पक्ष मुकाबला चाहते हैं और पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहनी चाहिए. रामलीला मैदान से क्या माहौल बना है, यह आने वाला समय बताएगा. सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका में हमारा पूरा विश्वास है. ताकत दिखाने का अहंकार ठीक नहीं है. इसका परिणाम देश के सामने आएगा.
संवाद की पहली जिम्मेदारी सरकार की, युवाओं में बढ़ रही असुरक्षा
सचिन पायलट ने कहा कि मौजूदा हालात के कारण नौजवानों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है, जो देश के लिए ठीक नहीं है. लोकतंत्र में संवाद बेहद जरूरी है और इसकी पहली जिम्मेदारी सरकार की होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी हर चीज पर पूरा नियंत्रण चाहती है, जबकि विपक्ष लगातार इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहा है. राहुल गांधी भी इसी चुनौती का सामना कर रहे हैं. पायलट ने कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि देश की संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखें. इतिहास में पहले क्या सही हुआ और क्या गलत, इससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए. पुरानी गलतियों को दोहराने के बजाय उनसे सबक लेते हुए ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसमें हर व्यक्ति का भरोसा बना रहे.
ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में हुए चुनावों के नतीजों की समीक्षा हो
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने गलत काम किया है. उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में जिन जगहों पर कांग्रेस को जीत मिली और जहां हार का सामना करना पड़ा, उन सभी चुनाव परिणामों की समीक्षा होनी चाहिए. पायलट ने कहा कि लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव बेहद जरूरी हैं. विरोध प्रदर्शनों के दौरान लाठीचार्ज और पैलेट गन का इस्तेमाल बंद होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अपनी बात रखने वाले लोगों के खिलाफ बल प्रयोग करना उचित नहीं है. चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है और संवैधानिक संस्थाओं को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए. लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी तरह का दबाव या पक्षपात स्वीकार्य नहीं हो सकता.
राजस्थान सरकार ने वादे पूरे नहीं किए, दो साल बाद जनता देगी जवाब
राजस्थान की बीजेपी सरकार के कामकाज पर सचिन पायलट ने कहा कि डबल इंजन सरकार होने के बावजूद प्रदेश में जिस तरह का विकास होना चाहिए था, वह नहीं हुआ. बीजेपी ने जनता से किए वादे पूरे नहीं किए हैं. सरकार को कितने नंबर देंगे, इस सवाल पर पायलट ने कहा कि वे कौन होते हैं नंबर देने वाले, दो साल बाद जनता खुद इसका जवाब देगी. उन्होंने मनरेगा को लेकर भी सरकार पर आरोप लगाए. पायलट ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस का संगठन काफी मजबूत है. शहरों के चुनाव में बीजेपी को बढ़त मिली हो सकती है, लेकिन कांग्रेस के वोट शेयर में अंतर एक फीसदी से भी कम है. पंजाब के हालात पर उन्होंने कहा कि वहां ड्रग्स, गन कल्चर और जेलों से गैंगस्टर गिरोह चलाने जैसी समस्याएं गंभीर हैं. आम आदमी पार्टी ने जनता का विश्वास खो दिया है.
नौजवानों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है
सचिन पायलट ने कहा कि मौजूदा हालात के कारण नौजवानों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है, जो देश के लिए ठीक नहीं है. लोकतंत्र में संवाद बेहद जरूरी है और इसकी पहली जिम्मेदारी सरकार की होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी हर चीज पर पूरा नियंत्रण चाहती है, जबकि विपक्ष लगातार इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहा है. राहुल गांधी भी इसी चुनौती का सामना कर रहे हैं. पायलट ने कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि देश की संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखें. इतिहास में पहले क्या सही हुआ और क्या गलत, इससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए. पुरानी गलतियों को दोहराने के बजाय उनसे सबक लेते हुए ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसमें हर व्यक्ति का भरोसा बना रहे.
पंजाब में ड्रग्स, गन कल्चर और गैंगस्टरवाद से हालात दयनीय
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने पंजाब के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां स्थिति दयनीय है. ड्रग्स ने पंजाब को बुरी तरह प्रभावित किया है. प्रदेश में गन कल्चर बढ़ रहा है और गैंगस्टर जेलों के अंदर से अपने गिरोह चला रहे हैं. आम आदमी पार्टी ने जनता का विश्वास खो दिया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पंजाब में इन हालात को सुधारने का प्रयास कर रही है. पायलट ने पंजाब में आगामी राजनीतिक मुकाबले को लेकर कहा कि हर राज्य के हालात अलग-अलग होते हैं. पंजाब में मुख्य मुकाबला आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच होगा. उन्होंने पंजाब की समस्याओं को गंभीर बताते हुए कानून-व्यवस्था और नशे के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया.
अब समय कम बचा है, जो करना है जल्दी कर लीजिए
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को नसीहत देते हुए कहा कि अब समय कम बचा है, जो करना है जल्दी कर लीजिए. उन्होंने कहा कि राजस्थान की बीजेपी सरकार को सत्ता में आए करीब दो साल हो चुके हैं, लेकिन डबल इंजन सरकार होने के बावजूद प्रदेश में जिस तरह का विकास होना चाहिए था, वह नजर नहीं आ रहा है. बीजेपी ने जनता से जो वादे किए थे, उन्हें भी पूरा नहीं किया. राजस्थान सरकार को कितने नंबर देंगे, इस सवाल पर पायलट ने कहा कि वह कौन होते हैं नंबर देने वाले. दो साल बाद जनता खुद सरकार के कामकाज का जवाब देगी.