कोटा. जब ज्यादातर लोग सुबह की नींद पूरी कर रहे होते हैं, तब राजस्थान केसरी का खिताब जीतने वाले साहिल खान का दिन शुरू हो जाता है. सुबह 4 बजे उठना, ड्राई फ्रूट्स खाना और 5 बजे अखाड़े में पहुंचकर कुश्ती के दांव-पेच आजमाना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. करीब 8 साल की मेहनत और अनुशासित दिनचर्या के दम पर साहिल ने 600 से ज्यादा पहलवानों को पछाड़कर राजस्थान केसरी का खिताब अपने नाम किया है.
राजस्थान केसरी का खिताब जीतने वाले अलवर के पहलवान साहिल खान की दिनचर्या किसी आम खिलाड़ी से बिल्कुल अलग है
आठ साल की मेहनत से बने राजस्थान केसरी
कोटा के राष्ट्रीय दशहरा मेले में 600 से ज्यादा पहलवानों को पछाड़कर उन्होंने दूसरी बार राजस्थान केसरी का खिताब जीता
सुबह 5 से 8 और शाम 4 से 7 बजे तक करते हैं अभ्यास
साहिल की दिनचर्या में समय की अहम भूमिका है. वह सुबह 4 बजे उठते हैं और ड्राई फ्रूट्स खाने के बाद करीब 5 बजे अखाड़े पहुंच जाते हैं. यहां सुबह 8 बजे तक लगातार कुश्ती का अभ्यास करते हैं. इसके बाद खानपान और आराम का समय रहता है. शाम को 4 बजे फिर अखाड़े में पहुंचकर 7 बजे तक अभ्यास करते हैं. इस तरह रोजाना करीब 6 से 7 घंटे उनकी ट्रेनिंग में गुजरते हैं. कुश्ती के दांव-पेच के साथ शारीरिक फिटनेस पर भी उनका खास ध्यान रहता है.
साहिल सुबह 8 बजे तक लगातार तीन घंटे पसीना बहाने के बाद शाम 4 से 7 बजे तक दोबारा ट्रेनिंग करते हैं
250 ग्राम बादाम और 250 ग्राम देसी घी रोज की खुराक
साहिल खान की खुराक भी उनकी दिनचर्या की तरह खास है. वह रोजाना करीब 250 ग्राम बादाम और 250 ग्राम देसी घी लेते हैं. इसके अलावा दूध, दही, फल और दूसरे पारंपरिक खाद्य पदार्थ उनकी डाइट में शामिल हैं. साहिल का कहना है कि वह नेचुरल और पारंपरिक खानपान पर भरोसा करते हैं. घंटों के अभ्यास के साथ संतुलित खानपान उनकी शारीरिक तैयारी का हिस्सा है.
साहिल की रोजाना की खुराक में 250 ग्राम बादाम और 250 ग्राम देसी घी शामिल है.
खिलाड़ियों को मिल रही है सुविधाएं
साहिल खान के मुताबिक, अखाड़े में जीत सिर्फ मुकाबले के कुछ मिनटों में नहीं मिलती, बल्कि उसके पीछे सालों का अनुशासन, मेहनत और समर्पण होता है. राजस्थान राज्य कुश्ती संघ के अध्यक्ष राजीव दत्ता की ओर से खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं. खिलाड़ियों को घी के साथ किट, जूते, मैच सूट और ट्रैक सूट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं. राजस्थान केसरी बनने के बाद अब साहिल का अगला लक्ष्य सीनियर नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में पदक जीतना है. वह राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश के लिए मेडल हासिल करना चाहते हैं.