आलू की खेती करने वाले किसान जान लें ये योजना, कैसे मिलेगा 35 हजार का लाभ?
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आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत की खबर है. बाजार में आलू के दाम गिरने पर अब किसानों को सरकार की ओर से अनुदान दिया जाएगा. यूपी सरकार की भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना के तहत पात्र किसानों को प्रति क्विंटल के हिसाब से सहायता मिलेगी. सहारनपुर के वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक भूपेंद्र कुमार ने योजना की पात्रता और लाभ लेने का तरीका बताया है.
बाजार में आलू की कीमतें कम होने पर किसानों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए यूपी सरकार ने भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना की व्यवस्था की है. इसके तहत बाजार भाव गिरने पर पात्र किसानों को अनुदान दिया जाएगा. इसके अलावा निजी शीतगृहों में आलू भंडारित करने वाले किसानों को भंडारण शुल्क पर भी आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है.
योजना के तहत आलू का बाजार भाव गिरने पर किसान को न्यूनतम उत्पादन लागत के 25 प्रतिशत और न्यूनतम उत्पादन लागत तथा बिक्री दर के अंतर में से जो राशि कम होगी, उसके आधार पर अनुदान दिया जाएगा. इसका उद्देश्य कम कीमत पर आलू बेचने वाले किसानों को आर्थिक राहत देना है.
एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर रोपित क्षेत्र के आधार पर अनुदान मिलेगा. प्रति हेक्टेयर अधिकतम 240 क्विंटल उत्पादन की सीमा तय की गई है. रोपित क्षेत्रफल का निर्धारण खसरा-खतौनी के आधार पर किया जाएगा.
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योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास फार्मर आईडी होना अनिवार्य है. इसके साथ ही एग्रीटेक पोर्टल पर आलू उत्पादक के रूप में पंजीकरण भी जरूरी है. बिना पंजीकरण के किसान योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे.
सहारनपुर के वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक भूपेंद्र कुमार के मुताबिक, योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड और बैंक पासबुक की जरूरत होगी. इसके अलावा मंडी में आलू बेचने की रसीद भी जमा करनी होगी. इसी के आधार पर अनुदान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
खबर के अनुसार, योजना में 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान दिया जाता है और एक किसान को अधिकतम 35 हजार रुपये तक सहायता मिल सकती है. अधिकारी ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसान 500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से आलू बेचता है, तो उस पर 175 रुपये का अनुदान मिलेगा.