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कैक्टस का नाम सुनते ही कांटों से भरे हरे पौधे की तस्वीर सामने आती है, लेकिन गाजीपुर की एक नर्सरी में मिलने वाला मून कैक्टस इससे बिल्कुल अलग है. लाल, पीले और गुलाबी रंग की गोल आकृति वाला यह पौधा पहली नजर में फूल जैसा दिखाई देता है. इसकी खास बात यह है कि रंगीन हिस्सा ग्राफ्टिंग तकनीक से हरे कैक्टस के आधार पर जोड़ा जाता है. ग्रीन गार्डन नर्सरी में इसकी कीमत करीब 150 से 210 रुपये तक बताई गई है.
गाजीपुर की ग्रीन गार्डन नर्सरी में लाल, पीले और गुलाबी रंग का मून कैक्टस लोगों का ध्यान खींच रहा है. इसका रंगीन ऊपरी हिस्सा और नीचे मौजूद हरा तना इसे सामान्य कैक्टस से अलग बनाते हैं. छोटे आकार के कारण इसे घर की सजावट में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
नर्सरी संचालक आजाद अली के मुताबिक, इस रंगीन कैक्टस को पुणे की नर्सरी से मंगाया गया है. इसकी कीमत आकार के हिसाब से अलग-अलग है. छोटा पौधा करीब 150 रुपये में मिलता है, जबकि नर्सरी में दिखाए गए एक पौधे की कीमत 210 रुपये बताई गई.
इस पौधे को तैयार करने के लिए रंगीन ऊपरी हिस्से को हरे कैक्टस के आधार पर जोड़ा जाता है. इस तकनीक को ग्राफ्टिंग कहते हैं. नर्सरी संचालक के मुताबिक, इसकी ग्राफ्टिंग फरवरी-मार्च के आसपास की जाती है और जड़ें विकसित होने के बाद पौधे को आगे बढ़ाया जाता है.
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मून कैक्टस के रंगीन ऊपरी हिस्से में क्लोरोफिल बहुत कम या नहीं के बराबर होता है. क्लोरोफिल पौधों को हरा रंग देने और प्रकाश संश्लेषण में मदद करता है. इसकी कमी के कारण ऊपरी हिस्सा लाल, पीला या गुलाबी दिखाई देता है और उसे जीवित रहने के लिए हरे आधार की जरूरत पड़ती है.
आजाद अली के मुताबिक, इस कैक्टस को घर की टेबल, लॉबी, बालकनी या सजावटी जगहों पर रखा जा सकता है. इसका छोटा आकार और चमकीले रंग इसे घर की सजावट के लिए आकर्षक विकल्प बनाते हैं. इसे ऐसी जगह रखना बेहतर है जहां पर्याप्त रोशनी मिले और तेज दोपहर की धूप सीधे न पड़े.
रंगीन मून कैक्टस को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. मिट्टी सूखने के बाद ही सीमित मात्रा में पानी देना चाहिए. गमले में पानी जमा नहीं होना चाहिए, इसलिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और छेद वाला गमला जरूरी है. पौधा खरीदते समय ग्राफ्टिंग वाले हिस्से और उसकी सेहत भी जरूर जांचनी चाहिए.