हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों की बनेगी नई नीति, कई नियम बदलेगी सुक्खू सरकार, घर के पास ट्रांसफर चाहने वालों को लगेगा झटका

हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों की बनेगी नई नीति, कई नियम बदलेगी सुक्खू सरकार, घर के पास ट्रांसफर चाहने वालों को लगेगा झटका


शिमला. हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों को सामान्य तबादलों पर लगी रोक हटने का इंतजार अभी और लंबा हो सकता है. प्रदेश सरकार ने तबादलों पर प्रतिबंध हटाने से पहले मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है. सरकार तबादला नियमों में कई बदलाव कर सकती है. इसके लिए राज्य सरकार ने डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय कैबिनेट सब कमेटी गठित की है.

सुक्खू सरकार ने व्यापक मार्गदर्शक सिद्धांत-2013 (सीजीपी-2013) की समीक्षा के लिए इस कैबिनेट सब कमेटी का गठन किया है. ऐसे में सरकार के पास लंबित पड़े 6 हजार से अधिक तबादला आवेदनों पर फैसले से पहले नई व्यवस्था का इंतजार करना पड़ सकता है.

सुक्खू सरकार के इस कदम से उन हजारों कर्मचारियों की उम्मीदों को झटका लग सकता है, जो लंबे समय से अपने गृह जिले या एक ही जिले के भीतर मनचाही जगह पर तबादले की प्रतीक्षा कर रहे हैं. हालांकि, तबादलों पर प्रतिबंध हटाने को लेकर अभी कोई नई तारीख तय नहीं हुई है. कमेटी की सिफारिशों और सरकार के अगले फैसले पर कर्मचारियों की निगाहें टिकी रहेंगी.

ये मंत्री होंगे कमेटी में

सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट सब कमेटी में कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी को सदस्य बनाया गया है. प्रधान सचिव (कार्मिक) समिति के सदस्य सचिव होंगे.

ये कमेटी मौजूदा तबादला नीति के प्रावधानों की समीक्षा करेगी और तबादलों की प्रक्रिया को अधिक नियमित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए सिफारिशें देगी. इसके बाद सरकार इन सिफारिशों के आधार पर नए दिशा-निर्देशों और नियमों को लेकर निर्णय ले सकती है. ऐसे में सामान्य तबादलों पर रोक हटाने से पहले नियमों में बदलाव की संभावना ने कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है.

6 हजार से अधिक आवेदन लंबित, मंत्रियों-विधायकों के डीओ नोट भी शामिल

प्रदेश में वर्तमान में करीब 6 हजार से अधिक तबादला आवेदन सरकार के पास लंबित बताए जा रहे हैं. इनमें कर्मचारियों के व्यक्तिगत अनुरोधों के साथ मंत्रियों और विधायकों की ओर से भेजे गए डीओ नोट भी शामिल हैं. सामान्य तबादलों पर प्रतिबंध के बावजूद विशेष परिस्थितियों और रिक्त पदों के आधार पर स्थानांतरण किए जा रहे हैं.

अब सवाल यह है कि लंबित आवेदनों का निपटारा मौजूदा नियमों के तहत होगा या सरकार पहले नई व्यवस्था लागू करेगी. यदि सरकार कमेटी की सिफारिशों के बाद ही व्यापक स्तर पर तबादलों को लेकर फैसला लेती है, तो कर्मचारियों को और इंतजार करना पड़ सकता है. हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अभी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है.

कैबिनेट में उठा था तबादलों में हस्तक्षेप का मुद्दा

तबादला नीति की समीक्षा के पीछे प्रशासनिक और राजनीतिक परिस्थितियां भी अहम मानी जा रही हैं. 11 अक्तूबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने अपने विधानसभा क्षेत्र में कर्मचारियों के तबादलों और अन्य प्रशासनिक कार्यों में कथित हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया था.

उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें विश्वास में लिए बिना कर्मचारियों के तबादले करवाए जा रहे हैं और एक युवा नेता अपनी मर्जी से स्थानांतरण करवा रहा है. बैठक में तबादलों से जुड़े न्यायालय के आदेशों और प्रशासनिक पहलुओं पर भी चर्चा हुई थी. इसके बाद तबादला नीति की समीक्षा के लिए कैबिनेट सब कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया.

जनवरी में हटी थी रोक, अप्रैल में फिर लगा प्रतिबंध

हिमाचल प्रदेश में सामान्य तबादलों पर लगी रोक 14 जनवरी को हटाई गई थी, लेकिन 6 अप्रैल को सरकार ने दोबारा प्रतिबंध लगा दिया. इसके बाद 4 जून को मुख्य सचिव की ओर से जारी आदेश में भी तबादलों पर रोक जारी रखने के निर्देश दिए गए थे. तब से कर्मचारी सामान्य तबादलों पर प्रतिबंध हटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.



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