ट्रंप हार गए, ईरान में तनाव, फिर भी कच्चे तेल के दाम क्यों गिरे, ये 6 वजह ज‍िम्‍मेदार

ट्रंप हार गए, ईरान में तनाव, फिर भी कच्चे तेल के दाम क्यों गिरे, ये 6 वजह ज‍िम्‍मेदार


अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप म‍िड टर्म इलेक्‍शन हार गए हैं. ईरान में तनाव कम नहीं है. अमेर‍िका एक द‍िन पहले ही ईरान में बम बरसाकर आया है, फ‍िर अचानक ऐसा क्‍या हुआ क‍ि कच्‍चे तेल की कीमतें कम होने लगी हैं. चार द‍िन पहले कच्‍चा तेल 110 डॉलर के आसपास था. जब भी कोई हलचल होती थी तो कीमतें नाचने लगती थीं, लेकिन अभी शांत‍ि है. तेल की कीमतें बुधवार को भी एक फीसदी से ज्‍यादा नीचे आ गईं. सीएनबीसी आवाज से बातचीत में एनर्जी एक्‍सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने इसके पीछे की वजह बताई है.

कच्चे तेल में गिरावट की ये 3 वजह

1. तेल के टैंकरों का सुरक्षित निकल जाना
नरेंद्र तनेजा के मुताब‍िक- तेल बाजार बहुत हद तक साइकोलॉजी पर चलता है. जब तक डर रहता है कि सप्लाई रुक जाएगी, दाम बढ़ते रहते हैं. लेकिन जैसे ही बाजार को यह खबर मिलती है कि युद्ध के माहौल के बावजूद तेल से लदे कुछ टैंकर सुरक्षित रूप से अपने रास्ते पर निकल गए हैं, तो बाजार को तुरंत राहत महसूस होती है. इसी राहत की वजह से तेल की कीमतों में नरमी आ जाती है.

2. मिडिल ईस्ट से सप्लाई का चालू रहना
नरेंद्र तनेजा के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का फुजैराह पोर्ट तेल की सप्लाई का एक बहुत बड़ा केंद्र है. जब फुजैराह से तेल की सप्लाई में थोड़ी भी तेजी देखी जाती है, तो दुनिया भर के निवेशकों को यह संदेश जाता है कि फिलहाल तेल की किल्लत नहीं होने वाली है. सप्लाई चालू रहने की खबर से बाजार में घबराहट कम होती है और दाम नीचे आ जाते हैं.

3. अमेरिकी चुनाव में ट्रंप की हार का असर
तेल की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका के म‍िडटर्म इलेक्‍शन भी हैं. इन चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ा है. डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट पर कब्जा जमा लिया है.

खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने माना है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के युद्ध का इस चुनावी हार में बड़ा हाथ रहा है. बाजार को लगता है कि अब चूंकि डेमोक्रेट्स का संसद पर कंट्रोल हो गया है, इसलिए शायद ट्रंप युद्ध को ज्यादा लंबा नहीं खींच पाएंगे या उन्हें कड़े फैसले लेने में मुश्किल होगी. ट्रंप ने खुद भी कहा था कि फिलहाल अमेरिका की ईरान पर तत्काल कोई बड़ा हमला करने की योजना नहीं है. इस बयान से भी तेल बाजार में शांति आई है.

4. निवेशकों को समझ नहीं आ रहा क्या करें
‘फिलिप नोवा’ की मार्केट एक्सपर्ट प्रियंका सचदेवा ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा, राष्ट्रपति ट्रंप के मिले-जुले बयानों ने बाजार में भ्रम पैदा कर दिया है. एक तरफ अमेरिका ईरान के ठिकानों पर सैन्य हमले कर रहा है, तो दूसरी तरफ ट्रंप कह रहे हैं कि युद्ध को ज्यादा नहीं बढ़ाया जाएगा. इस दुविधा की वजह से तेल व्यापारी कोई लंबी और पक्की रणनीति नहीं बना पा रहे हैं. अक्टूबर में जब दाम बहुत तेजी से बढ़े थे, तो अब लोगों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है, जिससे कीमतें गिर रही हैं.

5. शांति वार्ता की उम्मीद भी
बाजार की नजर इस बात पर भी टिकी है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए कतर मध्यस्थता की कोशिशें कर रहा है. हालांकि, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया है कि अभी किसी समझौते तक पहुंचने में बहुत समय है, फिर भी शांति की किसी भी कोशिश से तेल बाजार को ठंडक मिलती है.

6. म‍िड‍िल ईस्‍ट से कच्चे तेल की सप्लाई
शिप-ट्रैकिंग डेटा Vortexa के अनुसार, अक्टूबर में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों की सप्लाई 1.71 करोड़ बैरल प्रतिदिन रही. हालांकि यह सितंबर के 1.89 करोड़ बैरल से कम है, लेकिन युद्ध से पहले के स्तर का लगभग 75% हिस्सा अब भी बाजार में पहुंच रहा है. सैक्सो बैंक (Saxo Bank) के विश्लेषक ओले हेन्सन का कहना है कि मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल के शिपमेंट में जो लगातार सुधार हो रहा है, वह कीमतों को नीचे लाने में मदद कर रहा है.

बुधवार का क्‍या रेट

  1. ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): यह दुनिया भर में तेल का बेंचमार्क है. इसके दाम 1.75 डॉलर (0.7%) गिरकर 101.85 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए.
  2. अमेरिकी क्रूड (WTI): अमेरिकी तेल (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) के दाम 1.18 डॉलर (1.2%) गिरकर 94.91 डॉलर प्रति बैरल हो गए.

अमेरिका में तेल का भंडार घटा
हालांकि, एक चौंकाने वाली बात यह रही कि अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार (Crude stocks) 30 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में 52.7 लाख (5.27 मिलियन) बैरल घट गया. जबकि अर्थशास्त्रियों को उम्मीद थी कि इसमें 8.8 लाख बैरल की बढ़ोतरी होगी.



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