Bageshwar News : कुटकी की खेती से बदली 400 महिलाओं की किस्मत, कौन हैं बागेश्वर की दया दानू?

Bageshwar News : कुटकी की खेती से बदली 400 महिलाओं की किस्मत, कौन हैं बागेश्वर की दया दानू?


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कुटकी की खेती से बदली 400 महिलाओं की किस्मत, कौन हैं बागेश्वर की दया दानू?

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Who is Daya Danu Bageshwar : बागेश्वर की उद्यमी दया दानू ने कुटकी उगाकर 400 महिलाओं की जिंदगी बदल डाली है. कपकोट तहसील के सुदूर बोरबलड़ गांव की रहने वाली दया दानू ने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि क्षेत्र की 400 से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा. उनके प्रयासों का नतीजा है कि पहाड़ में बंजर पड़ी जमीन का उपयोग बढ़ गया है. लोकल 18 से दया दानू बताती हैं कि पर्वतीय इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियों को समझते हुए कुटकी की खेती की जा सकती है. दया के प्रयासों से कपकोट क्षेत्र में कुटकी की खेती का दायरा बढ़ा है. कुटकी की खेती से महिलाओं को स्वरोजगार मिला है और पलायन भी रुका है.

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बागेश्वर. उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बंजर होती जमीन को आजीविका का साधन बनाकर बोरबलड़ गांव की महिला किसान और उद्यमी दया दानू ने महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश की है. कपकोट तहसील के सुदूर बोरबलड़ गांव की रहने वाली दया दानू ने औषधीय पौधे कुटकी की खेती के माध्यम से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि क्षेत्र की 400 से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनने का रास्ता भी दिखाया है. उनके प्रयासों से पहाड़ में बंजर पड़ी जमीन का उपयोग बढ़ा है, और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं. लोकल 18 से दया दानू बताती हैं कि पर्वतीय इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियों को समझते हुए कुटकी की खेती की जा सकती है. उन्होंने ऐसी जमीन पर औषधीय पौधे की खेती शुरू की, जिसका उपयोग लंबे समय से नहीं हो रहा था. उनके इस प्रयास ने साबित किया कि पहाड़ों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है.

पिछले साल बेची 65 लाख की फसल

कुटकी एक औषधीय पौधा है, जिसकी मदद से पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है. दया दानू ने इसके उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही स्थानीय महिलाओं को खेती से जुड़ी गतिविधियों में शामिल किया. इससे महिलाओं को अपने गांव में ही रोजगार के मौके मिले और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनने में मदद मिली. दया दानू के प्रयासों से कपकोट क्षेत्र में कुटकी की खेती का दायरा बढ़ा है. उद्यान विभाग और भेषज संघ के सहयोग से क्षेत्र में इस खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में कपकोट क्लस्टर के किसानों ने कुटकी की बिक्री से करीब 65 लाख रुपये की सामूहिक आय अर्जित की.

पा चुकी तीलू रौतेली पुरस्कार

कुटकी की खेती से महिलाओं को स्वरोजगार मिला है और पलायन भी रुका है. बंजर भूमि का उपयोग होने से कृषि को भी बढ़ावा मिल रहा है. दया दानू के योगदान को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने अगस्त 2026 में उन्हें प्रतिष्ठित तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया. यह सम्मान उनके प्रयासों और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए गए कार्यो की पहचान है. दया दानू की यह पहल पहाड़ की दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.



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