छठ में साक्षात सूर्य देव की पूजा का महत्व, लोकगायिका ने बताई पर्व की महिमा
Last Updated:
Chhath Folk Songs: बिहार में प्रकृति और लोकगीतों से जुड़े महापर्व छठ की धूम शुरू हो गई है. लोकगायिका अर्पित चौधरी ने इसके महत्व और परंपराओं पर प्रकाश डाला. चार दिवसीय इस अनुष्ठान में उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जो अब देश-विदेश तक फैल चुका है.
Chhath Folk Songs: कार्तिक मास आते ही बिहार में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलती है. दरअसल आपको बता दें कि इस माह में बिहार का सबसे बड़ा पर्व प्रारंभ हो जाता है. अब छठ की छठा नजर आने लगी है. ऐसे में बिहार की लोककला इस पर्व में गाई जाती है. जो इस पर्व को और भी खास बना देती है. आज इसी को लेकर लोकगायिक अर्पित चौधरी से लोकगीत सुनने को मिली. साथ ही उन्होंने छठ पर्व की महिमा बताई.
लोकगीत है इस पर्व की परंपरा
भागलपुर के रहने वाले लोकगायिका अर्पित चौधरी ने बताया कि छठ में लोक गायन का एक अलग ही महत्व है. बिना लोक गायन का यह पर्व अधूरा अधूरा सा लगने लगता है. ऐसे में इन्होंने कई लोकगीत सुनाया. उन्होंने कहा कि छठ पूजा के प्रारंभ होते ही आपको हर एक घरों में लोकगीत सुनने को मिल जाएंगे. यह पर्व प्रकृति से जुड़ा होता है. कार्तिक के षष्टि से यह पर्व प्रारंभ होता है. चार दिवसीय महापर्व का आनंद एक अलग ही लोगों के बीच रहता है. विदेश में रहने वाले लोग देश लौट आते हैं तो वहीं प्रदेश में रहने वाले अपने राज्य वापस आ जाते हैं. बिहार आने वाली सभी ट्रेनें फुल रहती है. आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि इस पर्व का बिहार के लिए कितना महत्व रखता है. हालांकि अब धीरे-धीरे कई राज्यों में यह पर्व मनाया जाने लगा और इसके साथ-साथ विदेश में भी अब यह पर्व देखने को मिलने लगा है.
प्रकृति से जुड़ा होता है यह पर्व
लोकगायिका अर्पित चौधरी ने बताया कि हमारे यहां मूर्ति पूजा की विशेष महत्व है. कहा जाता है कि अगर कोई भगवान आपकी मनोकामना नहीं सुनते हैं तो आप छठ महापर्व में अपनी मनोकामना मांगे. यहां आपकी इच्छा पूर्ण होगी. वहीं आपको बता दें कि इसमें डूबते हुए सूर्य व उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का समापन होता है. ऐसे में इस पर्व में सारी चीजें प्रकृति से जुड़ी होती है. जो भी फल चढ़ते है वो मौसमी फल होता है. गंगा के किनारे इस दिन मेला सा नजारा देखने को मिल जाता है. इसलिए यह पर्व काफी खास होता है.